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रविवार, 19 अक्तूबर, 2003 को 13:59 GMT तक के समाचार
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भारतीय नहीं चौंकते ब्लेन से

डेविड ब्लेन
ब्लेन 44 दिन तक सिर्फ़ पानी पीकर जिंदा रहे

भूख का जादू दिखाने वाले अमरीकी जादूगर डेविड ब्लेन ने इन दिनों ब्रिटेन में हंगामा मचाया हुआ है.

ब्लेन ने तीस फुट की ऊँचाई पर लटके काँच के एक हवादार बक्से में लेटकर 44 दिन सिर्फ़ पानी पर गुज़ारे हैं, उन्होंने 1056 घंटे बिना कुछ खाए बिताए हैं इसकी गवाही अनेक कैमरे दे सकते हैं जो चौबीसों घंटे ब्लेन के बक्से पर नज़र जमाए रहे.

क़रीब ढाई लाख लोगों ने वहाँ जाकर उनका हौसला बढ़ाया या फिर उनकी तरफ़ बर्गर फेंककर उनका हौसला तोड़ने की कोशिश की, कुल मिलाकर वे चर्चा का विषय बने रहे.

उनके करतब दिखाने के टेलीविज़न राइट्स लाखों पाउंड में बिके, एक ब्रितानी टीवी चैनल ने उनके करतब का लगातार 44 दिन तक सीधा प्रसारण किया.

डेविड ब्लेन ने जो कुछ किया वह आसान नहीं है लेकिन इसे देखकर अँगरेज़ जितने चकित हैं, मैंने किसी भारतीय को उतना हैरान नहीं पाया.

भारतीय नज़रिया

मुझे अच्छी तरह याद है कि हर साल दशहरे के समय एक आदमी हमारे स्कूल के सामने वाले मैदान में लगातार सात दिनों तक चौबीसों घंटे साइकिल चलाता था.

बसंत नाम के उस आदमी को कुल मिलाकर पाँच-सात सौ रूपए मिलते होंगे, एक लाउडस्पीकर पर गाने बजते थे और मुहल्ले के बीस-तीस लड़के झुंड बनाए खड़े रहते थे.

बसंत और ब्लेन, दोनों का काम मुश्किल है, कौन ज़्यादा मुश्किल है, इस बहस में पड़ना ज़रूरी नहीं.

डेविड
लाखों लोग डेविड को देखने पहुँचे

वैसे भी, इसका फ़ैसला मुश्किल है कि 168 घंटे साइकिल चलाते रहना आसान है या फिर 44 दिनों तक सिर्फ़ पानी पीकर पड़े रहना.

लेकिन एक अंतर साफ़ है कि बसंत को मार्केटिंग और मीडिया प्रमोशन का सहारा नहीं था, जो ब्लेन के पास है.

ब्रितानी अख़बारों ने लिखा है कि ब्लेन सबसे अमीर जादूगरों में से एक हैं जबकि मैंने दो वर्ष पहले राँची में बसंत को साइकिल के पंक्चर बनाते देखा, उसने बताया था कि “हड्डियों में अब वो ज़ोर नहीं रहा बाबू.”

हठयोग

भारत सदियों से हठयोगियों का देश रहा है, तरह-तरह के साधुओं,योगियों और तपस्वियों के क़िस्से लोगों के मन में बसे हैं, शायद यही वजह है कि ब्लेन के कारनामे भारत के लोगों को ज़्यादा नहीं चौंकाते.

सूखे कुएँ में खाना-पानी के बिना पायलट बाबा ने कई दिन गुज़ारे हैं, काँच के सीलबंद बक्से में बिना हवा के पाँच दिन तक रहना उनका मशहूर करतब रहा है.

भारत में व्रत और उपवास की पुरानी परंपरा रही है जिसने बाद में राजनीतिक संघर्ष के हथियार के तौर पर अनशन का रूप ले लिया.

लाखों-करोड़ों भारतीय लोगों को अच्छी तरह याद है कि प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी बाघा जतीन की मृत्यु जेल में 60 से अधिक दिनों का अनशन रखने के कारण हुई थी.

जिन लोगों के दिलों में आज़ादी हासिल करने का जुनून था, उनकी बात छोड़ भी दें तो आमरण अनशन के अनेक ताज़ा उदाहरण सामने हैं जिनमें लोग अक्सर पंद्रह-बीस दिन तक बिना खाए-पिए रहते हैं.

अण्णा हज़ारे, मेधा पाटकर, सुंदरलाल बहुगुणा जैसे अनेक लोग हैं जो जादूगर कतई नहीं हैं लेकिन वे कई-कई बार दस से पंद्रह दिन तक बिना-खाए पिए रहे हैं.

खड़ेश्री बाबा

अब तक मैं दो ऐसे बाबाओं से मिल चुका हूँ जो “पिछले कई वर्षों से” अपने एक पैर पर खड़े हैं, लोग उन्हें खड़ेश्री बाबा कहते हैं.

‘वर्षों’ वाले दावे में कितनी सच्चाई है यह तो पता नहीं. लेकिन उनके बुरी तरह से सूजे हुए पैर को देखकर साफ़ पता चलता है कि काफ़ी समय से वे इसी तरह खड़े हैं.

केवल खड़े रहने वाले ही नहीं, एक हाथ हवा में उठाए रखने वाले और केवल दूध पीकर रहने वाले, न जाने कितने तरह के बाबा भारत में पाए जाते हैं.

और फिर एक बात शायद यह भी है कि वर्षों से भुखमरी की ख़बरों के आदी हो चुके समाज से आने वाले व्यक्ति को भूख का जादू आकर्षित करेगा, कहना मुश्किल है.

वैसे भी, जो एक दिन के लिए भूखा न रहा हो उसके लिए 44 दिनों की कल्पना बहुत बड़ी है, कारण चाहे आर्थिक हो या धार्मिक, हर भारतीय जानता है कि भूखा रहने का मतलब क्या होता है.

डेविड ब्लेन का करतब या किसी और जादूगर का कोई करतब भारत के लोगों को उस तरह नहीं चौंका पाएगा जिस तरह पश्चिमी देशों की जनता को चौंकाता है.

वजह शायद ये है कि चौंकाना और हैरत में डालना तो सदियों से भारत की ख़ासियत रहा है.

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