कसाब के दिमाग को समझने की कोशिश?

अटैक्स ऑफ 26/11 के म्यूज़िक लॉन्च पर नाना पाटेकर और रामगोपाल वर्मा
इमेज कैप्शन, अटैक्स ऑफ 26/11 के म्यूज़िक लॉन्च पर नाना पाटेकर और रामगोपाल वर्मा

रामगोपाल वर्मा बॉलीवुड की परंपरागत शैली से हटकर काम करने के लिए जाने जाते हैं. ये और बात है कि अपनी इस शैली में उन्हें बॉक्स ऑफिस के नज़रिए से ज़्यादातर नाकामी हाथ लगी है.

अब वो लेकर आए हैं अपनी फ़िल्म 'अटैक्स ऑफ 26/11' जो 2008 में 26 नवंबर को हुए <link type="page"> <caption> मुंबई हमलों </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2012/11/121125_mumbai_attack_picture_gallery_aa.shtml" platform="highweb"/> </link>पर आधारित है.

रामगोपाल वर्मा कहते हैं कि ये सबको पता है उस दिन क्या हुआ था, लेकिन ये किसी को पता नहीं कि ये हुआ कैसे था. हमने फ़िल्म में वही दिखाया है.

बीबीसी से खास बात करते हुए रामगोपाल ने कहा, "लोगों को मारते वक़्त कसाब के चेहरे पर कैसे भाव थे. मुंबई के सीएसटी स्टेशन पर हमले के वक्त वहां मौजूद लोगों के बीच कैसी अफरातफरी थी, ये हमने दिखाया. बेचारों लोगों पर क्या बीती हमने ये दिखाया."

रामगोपाल आगे कहते हैं, " <link type="page"> <caption> हमलावर कसाब </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/11/121122_kasab_last_day_ml.shtml" platform="highweb"/> </link>के चेहरे पर उस समय जैसे गर्व और खुशी के भाव थे. निर्दोष लोगों को मारते वक्त कोई ऐसा कैसे कर सकता है. कहां से आती ये सोच, जो आपको बताती है कि ऐसा घिनौना काम करना सही है. कसाब के दिमाग को मैंने पढ़ने की कोशिश की है."

रामगोपाल वर्मा के मुताबिक कसाब जैसे शख्स से घृणा करके नहीं बल्कि उनकी सोच को समझने के बाद ही इस तरह की समस्या हल की जा सकती है.

वो कहते हैं कि कसाब जैसे लोग सोचने समझने की ताकत नहीं रखते. उन्हें कोई दूसरा कंट्रोल करता है. वो सिर्फ अपने मालिक के आदेश का पालन करने वाला बंदा था.

कलाकार

<link type="page"> <caption> 'अटैक्स ऑफ 26/11' </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/02/130213_nanapatekar_attacksof2611_ks.shtml" platform="highweb"/> </link>में नाना पाटेकर ने उस वक्त के मुंबई ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस राकेश मारिया का किरदार निभाया है.

रामगोपाल वर्मा कहते हैं कि नाना पाटेकर जैसा सशक्त अभिनेता ही इस रोल को निभा सकता था.

अजमल कसाब वो शख्स है जिससे भारत में ज़्यादातर लोग घृणा करते हैं. ऐसे शख़्स का रोल निभाने के लिए भला किसी कलाकार को कैसे तैयार किया.

इसके जवाब में रामगोपाल वर्मा कहते हैं, "संजीव जायसवाल ने ये रोल निभाया और बल्कि वो काफी उत्साहित थे ये रोल करने के लिए. क्योंकि ये काफी जटिल और चुनौतीपूर्ण किरदार है."

ये फ़िल्म एक मार्च को रिलीज़ होगी.