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अब सेल्फ़ी के लिए सितारे ना नहीं कहेंगे
- Author, सुमिरन प्रीत कौर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आप अपने पसंदीदा सितारों से रूबरू होकर फ़ोटो खिंचवा सकते हैं. वो आपको ना नहीं कहेंगे और ना ही उन्हें जल्दी होगी.
ऐसा इसलिए की भारत में जल्द आएंगे ऐसे मोम के पुतले जो बिल्कुल आपकी पसंदीदा हस्ती जैसे दिखते होंगे.
लंदन का मशहूर मैडम तुसाड्स संग्रहालय अब दिल्ली में खुलने वाला है. ये एक ऐसी दुनिया है जहाँ सितारे बनाए जाते हैं.
यहाँ आपको देश विदेश की जानी-मानी हस्तियों के मोम के पुतले देखने को मिलेंगे. यहां राजनीति, ग्लैमर, खेल और संगीत की दुनिया की नामी हस्तियों की प्रतिमा होगी.
सेल्फ़ी कपिल के 1983 वाला पोज़ के साथ
ये संग्रहालय अब से कुछ ही महीनों में खुलेगा, लेकिन धीरे-धीरे अलग-अलग हस्तियों के वैक्स फिगर्स यानी मोम के पुतलों की झलक आपको पहले ही देखने को मिल रही है.
हाल ही में कपिल देव की वैक्स फिगर का उद्घाटन किया गया.
पुतले का पोज़ ऐसा कि उसे देख दर्शकों को 1983 के क्रिकेट विश्वकप में के फाइनल मैच की याद आएगी जिसमें भारत ने जीत दर्ज की थी. उस टीम के कप्तान थे कपिल देव.
कपिल देव ने बताया, "पहले तो समझ नहीं आया कि ये लोग ऐसा करेंगे. अब मेरा एक्शन सबके सामने है और इसे देखकर मैं भी हैरान हूं. इसकी खुबसूरती बेमिसाल है और मैं इस प्रयास के लिए बधाई देता हूं. यह मेरे लिए बिल्कुल नया अनुभव है. "
कारीगरी ऐसी कि हैरान कर दे
वेक्स फिगर की शुरुआत आज से 250 साल पहले हुई और इसकी शुरुआत की मैडम तुसाड्स ने.
मैडम तुसाड ने साल 1777 में फ्रांस में पहली वैक्स फिगर बनाई थी. पहला पुतला था फ्रांस के मशहूर लेखक 'वोल्तेयर' का. कुछ समय बाद वो लंदन चली आईं.
1835 लंदन की बेकर स्ट्रीट में पहला मैडम तुसाड्स संग्रहालय खुला था. लंदन के संग्रहालय में जाएँ तो आपको कुछ ऐसी भी पुतले दिखेंगे जो खुद मैडम तुसाड ने बनाए थे.
ये संग्रहालय लंदन का एक अहम एतिहासिक और महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन चुका है.
रीगल की जगह खुलेगा तुसाड्स
अब दुनिया के कई शहरों में ऐसे संग्रहालय हैं. लंदन , सिंगापुर, हांगकांग, बर्लिन, सिडनी और टोक्यो सहित दुनिया भर में लगभग 22 स्थानों में मैडम तुसाड्स के संग्रहालय हैं.
दिल्ली के कनॉट प्लेस संग्रहालय वहाँ खुलेगा जहाँ हुआ करता था मशहूर रीगल सिनेमा.
मैडम तुसाड्स मर्लिन एंटरटेनमेंट्स का ब्रैंड है. मर्लिन एंटरटेनमेंट्स इंडिया के जनरल मैनेजर और डायरेक्टर अंशुल जैन ने बताया, "आपको यहां हर क्षेत्र की हस्तियों की वैक्स फिगर देखने को मिलेंगे. यहां लगभग 50 मोम के पुतले रखे जाएंगे जिनमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के पुतले होंगे."
अंशुल जैन कहते हैं, "एक फिगर को बनाने में 20 से ज़्यादा आर्टिस्ट लगते हैं. और इसमें कम से कम चार महीने का समय लगता है."
वो कहते हैं, "इस काम मूर्तिकार और मेक उप आर्टिस्ट शामिल होते हैं. शरीर के विभिन्न हिस्सों का नाप करीब 500 बार लिया जाता है .
अंशुल मानते हैं कि भारत में इस संग्रहालय को खोलने के कई कारण हैं.
वो कहते हैं, "भारत एक रोमांचक जगह है. साल 2015 में लंदन स्थित मैडम तुसाड्स में करीब 1.5 लाख भारतीय पहुंचे थे."
लंदन में तो पूरा एक अनुभाग है जहां आपको सलमान, माधुरी और शाहरुख के मोम के पुतले देखने को मिलेंगे .
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