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पुरुष बेली डांसर जिसे रिश्तेदार 'अपनाने से डरते हैं'
- Author, सुमिरन प्रीत कौर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इशान हिलाल दिल्ली में रहते हैं . वो बेली डांसर हैं, कथक नृत्य जानते हैं , फ़ैशन डिज़ाइनर हैं और पेंटर भी हैं .बेबाक इशान के लिए अपने मन की करना कोई आसान बात नहीं.
इशान बताते हैं," डांस के ज़रिए मैं अपने जज़्बात व्यक्त करता हूँ . जब मैं दुखी होता हूँ तो नाचता हूँ, जब मैं खुश होता हूँ तो नाचता हूँ. डिज़ाइनिंग और नाच के ज़रिए मैं अपनी बात सामने रखता हूँ . "
जब इशान 9वीं कक्षा में थे तो उन्होंने कत्थक सीखना शुरू किया. इशान बताते हैं, "बचपन में माधुरी दिक्षित को देख डांस करने का शौक हुआ. माधुरी से प्रेरित होकर मैने कत्थक सीखना शुरू क्या. मैं अपने ट्यूशन की फ़ीस कभी कभी कत्थक क्लास में दे आता और बंक करता. "
नाचना 'हराम' है
इशान ने दो साल पहले बेली डांस सीखना शुरू किया दिल्ली के 'बंजारा स्कूल ऑफ डांन्स' से. इशान मानते हीं कि बेली डांस एक खूबसूरत नृत्य है.
वो बताते हैं,"जो लोग बेली डांस को बुरा मानते हैं , मैं कहता हूँ कि आप इसे जिस्म के नज़रिए से मत देखो. इसका भी एक इतिहास है . "
लेकिन जैसे जैसे लोगों का ध्यान उन पर गया, उनकी परिवार से दूरियाँ बढ़ गईं. इशान बताते हैं, "बचपन में तो मुझे किसी ने ज़्यादा रोका नहीं लेकिन मैं जैसे बड़ा हुआ मेरे परिवार वालों ने कहा की नाचना 'हराम' है. मेरे घरवालों ने रोकने की कोशिश की. मेरी मां ने एक मौलाना से पूछ कर एक काला धागा भी बाँधा लेकिन मुझे नाचना पसंद हैं. मुझे बोला गया कि नाचना तो लड़कियों का काम है और इससे आपकी मर्दानगी पर सवाल उठेगा . "
मां बाप ने बात नहीं की
इशान आगे बताते हैं,"जब लोगों ने मेरे बारे में जानना शुरू किया तो मीडिया में मेरी नाचते हुए तस्वीरें छपीं. इस वजह से मेरे मां बाप ने करीब दो महीने से बात नही की क्योंकि उन्हे थोड़ी शर्मिंदगी होती है. मैं अपने मां बाप से बहुत प्यार करता हूँ और मैं जानता हूँ कि वो समाज और धर्म के कारण मुझे अपनाने से डरते हैं. हम एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार से हैं. लेकिन इस्लाम एक खूबसूरत धर्म है. "
इशान ने एक दिलचस्प बात बताई.
"एक बार जब मेरे पिता अस्पताल में थे तो मैं इतना आकेला और दुखी था कि मैंने नाचना शुरू कर दिया और उसके बाद मेरे माता पिता गुस्सा हो गए."
एक ही ज़िंदगी है
इशान बताते हैं कि जब से मीडिया में उनके बारे मे खबरें आई हैं तबसे नकारात्मक और सकारात्मक, हर किस्म की प्रतिक्रिया आई है.
इशान ने कहा ,"कुछ लोग कहते हैं कि मेरी वजह से वो अपने बच्चों की पीड़ा को समझ पायें हैं और कुछ युवा मुझे कहते हैं कि मुझ से प्रेरित होकर उन्होंने बेबाक अपने दिल की सुनी और अपने आस पास वालों के सामने अपने मन की बात कही."
इशान ने बताया- "मैं बस इतना कहूँगा कि समाज हमसे है. पहले मुझे अपने आप को अपनाना होगा, फिर मेरे परिवार वालों को और फिर समाज अपने आप मानेगा. लेकिन दूसरों के सामने मैं गिड़गि़ड़ाउंगा नहीं कि मुझे अपनाओ. मैं किसी और की वजह से ख़ुद को बदलकर नहीं जीना चाहता. एक ही ज़िंदगी है और उसे अपने ढंग से जीना है."
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