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सोमवार, 10 जुलाई, 2006 को 11:56 GMT तक के समाचार
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टाटा की बांग्लादेश परियोजना स्थगित
टाटा
टाटा और बंगलादेश सरकार के बीच लंबे समय से जारी बातचीत के बावजूद फ़ैसला नहीं हो पाया
भारतीय औद्योगिक समूह टाटा ने बांग्लादेश में प्रस्तावित तीन अरब डॉलर की निवेश योजना के बारे में कहा है निवेश योजना पर अब बांग्लादेश सरकार के साथ आगे और बातचीत नहीं होगी.

बांग्लादेश सरकार के निवेश बोर्ड के साथ ढाका में हुई आधिकारिक बातचीत के बाद टाटा समूह के कार्यकारी निदेशक एलन रॉसलिंग ने निवेश परियोजनाओं को तुरंत स्थगित करने की घोषणा कर दी.

 आप सिर्फ़ एक टीम के साथ फुटबॉल नहीं खेल सकते. अगर सरकार बातचीत करने की स्थिति में नहीं है तो हम समझौता नहीं कर सकते
रॉसलिंग

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार कंपनी के प्रस्ताव पर संजीदा नहीं.

रॉसलिंग ने कहा कि बांग्लादेश सरकार परियोजनाओं को शुरु करने से संबंधित अंतिम समझौते पर दस्तख़त करने में काफ़ी देरी कर रही है.

दूसरी ओर बांग्लादेशी अधिकारियों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. वहाँ के एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें टाटा के बांग्लादेश में वापस आने की उम्मीद है.

टाटा निराश

टाटा के कार्यकारी निदेशक रॉसलिंग ने पत्रकारों से कहा, "आप सिर्फ़ एक टीम के साथ फुटबॉल नहीं खेल सकते. अगर सरकार बातचीत करने की स्थिति में नहीं है तो हम समझौता नहीं कर सकते."

इस निवेश प्रस्ताव पर बांग्लादेश में क़ाफी पहले से सावल उठाए जा रहे थे.

पिछले दिनों बांग्लादेश के तीन कैबिनेट मंत्रियों ने कहा था कि अगले जनवरी में आम चुनाव होने हैं, इसलिए अभी टाटा के प्रस्ताव को स्वीकर करने में दिक्कते हैं.

दूसरी ओर तीनों मंत्रियों ने माना कि भारतीय कंपनी का प्रस्ताव बांग्लादेश के हित में है.

बांग्लादेश की दलील

हलाँकि बांग्लादेश के निवेश बोर्ड के अध्यक्ष महमूदुर्रहमान ने इस बात से इनकार किया कि देश में भारत विरोधी सोच को देखते हुए अंतिम समझौते पर दस्तख़त में देरी हुई.

 हमारे यहाँ यह सच्चाई है कि इतने बड़े निवेश प्रस्ताव को मंज़ूरी देने पर लोग सोचेंगे कि जिस सरकार का कार्यकाल सिर्फ़ तीन माह बचा है उसने यह फ़ैसला क्यों किया.
महमूदूर्रहमान

उन्होंने कहा, "हमारे यहाँ यह सच्चाई है कि इतने बड़े निवेश प्रस्ताव को मंजूरी देने पर लोग सोचेंगे कि जिस सरकार का कार्यकाल सिर्फ़ तीन माह बचा है उसने यह फ़ैसला क्यों किया."

महमूदुर्रहमान ने आशा जताई कि आने वाले समय में टाटा अपने फ़ैसले को वापस ले लेगा.

टाटा समूह ने निवेश योजना के तहत इस्पात प्लांट, यूरिया फैक्ट्री और कोयला खदान के लिए 1000 मेगावाट क्षमता वाली बिजली इकाई लगाने का प्रस्ताव दिया था.

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