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'अब तक की बातचीत संतोषजनक नहीं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विकसित देशों में कृषि सब्सिडी और कृषि उत्पाद पर लगने वाले आयात शुल्क के संदर्भ में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने कहा है कि विश्व व्यापार संगठन की अब तक की बातचीत संतोषजनक नहीं रही है. महत्वपूर्ण है कि दोहा दौर की बातचीत के दौरान मंत्रियों के स्तर की अगली बैठक दिसंबर में हाँगकाँग में होने वाली है. भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ इसी संबंध में सोमवार को अमरीका, यूरोपीय संघ, ब्राज़ील और जापान के मंत्रियों के साथ लंदन में मिल रहे हैं. मुलाक़ात से ठीक पहले उन्होंने कहा, "यूरोपीय संघ अब तक की बातचीत में सिर्फ़ एक इंच दे रहा है और भारत से चाहता है कि भारत एक मील दे दे." कमलनाथ ने कहा कि दिसंबर बहुत दूर नहीं और विकासशील देशों के कई मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं हो पाई है जो ये चिंताजनक होगा. हाँगकाँग में होने वाली बातचीत के बारे में कमलनाथ ने कहा कि विफलता यही हो सकती है कमलनाथ का कहना था, "भारत का किसान यूरोप और अमरीका के किसान से तो लड़ सकता है लेकिन यूरोप और अमरीका की सरकारों से नहीं लड़ सकता – हम इसी अन्यायपूर्ण व्यवस्था को बदलने की बात कर रहे हैं." लेकिन उन्होंने इसी के साथ कहा, "विकसित देशों को विकासशील देशों की बात सुननी पड़ेगी क्योंकि हमारी आवाज़ बहुत बड़ी है, बहुत मज़बूत है." | इससे जुड़ी ख़बरें डब्लूटीओ ने दिया नया प्रस्ताव30 जुलाई, 2004 | कारोबार व्यापार मुद्दों पर ग़रीब देशों के प्रयास शुरु16 अक्तूबर, 2003 को | कारोबार डब्ल्यूटीओ में मतभेद क़ायम13 सितंबर, 2003 | कारोबार कैनकुन व्यापार वार्ता 'असफल' 15 सितंबर, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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