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बिड़ला परिवार का ख़ज़ाना मिला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कोलकाता में बिड़ला परिवार के एक घर से सोने के सैकड़ों सिक्के और बहुमूल्य जेवरात मिले हैं जो इस अमीर ख़ानदान की विरासत का हिस्सा बताए जा रहे हैं. इस ख़ज़ाने का पता तब चला जब ख़ानदान की दौलत के बँटवारे के लिए धन-संपत्ति की सूची तैयार की जा रही थी. इस ख़ज़ाने का मालिक कौन होगा इसे लेकर कटु विवाद चल रहा है. दशकों तक बिड़ला परिवार के चार्टर्ड एकाउंटेट राजेंद्र लोढा का दावा है कि इस दौलत की मालकिन प्रियंवदा बिड़ला ने एक वसीयत के ज़रिए सब कुछ उनके नाम कर दिया है जबकि बिड़ला परिवार के सदस्य वसीयत को अदालत में चुनौती दे रहे हैं. कोलकाता हाईकोर्ट ने बिड़ला परिवार की दौलत की सूची बनाने के लिए चार अधिकारियों की समिति बनाई है जिसके हाथ यह ख़ज़ाना लगा है. कहा जा रहा है कि सोने के कुछ सिक्के तो मौर्य और गुप्त काल के हैं यानी सैकड़ों वर्ष पुराने हैं. प्रियंवदा बिड़ला के पति एमपी बिड़ला सिक्के जमा करने के जाने-माने शौक़ीन थे. इस परिवार के ख़ज़ाने में मुग़ल काल के भी अनेक सिक्के हैं जो ख़ालिस सोने के हैं. यह ख़ज़ाना प्रियंवदा बिड़ला की बंद पड़ी अलमारियों में से मिला है. अपना नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, "इस ख़ज़ाने को एक तिजोरी में बंद करके रखा गया था, यह तिजोरी लकड़ी की एक अलमारी के पीछे छिपी हुई थी." इसी अधिकारी ने बताया कि ख़ज़ाने के साथ ही तीन पिस्तौल भी मिले हैं जिनके लाइसेंस वहीं मिले हैं. इस ख़ज़ाने के पाए जाने की जानकारी तत्काल मामले की सुनवाई कर रहे कोलकाता हाईकोर्ट के जज को दे दी गई है. मौक़े पर मौजूद अधिकारियों ने बताया, "कमरे को सील कर दिया गया है और जज के निर्देश के मुताबिक़ वहाँ हथियारबंद गार्ड तैनात कर दिए गए हैं." प्रियंवदा बिड़ला और माधव प्रसाद बिड़ला की कोई औलाद नहीं थी और 1990 में माधव प्रसाद बिड़ला के निधन के बाद प्रियंवदा ही उनकी कंपनियाँ चलाती थीं. पिछले वर्ष 76 वर्ष की उम्र में उनका निधन होने के बाद संपत्ति का विवाद सामने आया. |
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