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राष्ट्रीय विदेश व्यापार नीति की घोषणा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने मंगलवार को अपनी विदेश व्यापार नीति की घोषणा की जिसमें वार्षिक व्यापार को वर्ष 2009 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है. केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को दिल्ली में नई नीति का एलान करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की भागीदारी को बढ़ाकर वर्ष 2009 तक 150 अरब प्रतिवर्ष तक लाने की कोशिश की जाएगी. फ़िलहाल विश्व व्यापार में भारतीय निर्यात का हिस्सा मात्र 0.7 प्रतिशत है. भारत सरकार ने अगले पाँच वर्षों में इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. कमलनाथ ने कहा कि सरकार इसके लिए एक बोर्ड का गठन करेगी जिसकी अध्यक्षता कोई मशहूर शख़्सियत करेगी. कमलनाथ ने कहा,"हम व्यापार बोर्ड की भूमिका को पुनः परिभाषित कर इसे और प्रभावी बनाएँगे.पहले जो व्यापार बोर्ड था उसकी भूमिका औपचारिक ज़्यादा थी. इसलिए हमने तय किया है कि इसकी अध्यक्षता कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति करेगा ना कि मंत्री". वाणिज्य मंत्री ने इस नीति में सेवा निर्यात पर विशेष ध्यान दिया है और निर्यात बढ़ाने के लिए कृषि के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की है. साथ ही सभी उत्पादों और सेवाओं के निर्यात को सेवा कर से छूट दे दी गई है. पाँच करोड़ रूपए तक का कारोबार करनेवाले निर्यातकों को बैंक गारंटी देने की ज़रूरत नहीं होगी. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने विदेश व्यापार नीति के बारे में कहा है कि इसमें नया कुछ भी नहीं है और मूल रूप से भारत की आयात-निर्यात नीति को ही नया नाम दिया गया है. मगर आर्थिक विश्लेषक रोहित बंसल का कहना है कि राष्ट्रीय विदेश व्यापार नीति पहले की आयात-निर्यात नीति से थोड़ी अलग है. रोहित बंसल ने कहा,"पहले सिर्फ़ आयात-निर्यात नीति की पेचीदगियों पर ही ध्यान रहता था मगर अब पूरे विश्व व्यापार के स्वरूप पर ही चर्चा की गई है". |
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