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अर्जेंटीना ने आख़िरकार क़र्ज़ चुकाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अर्जेंटीना ने अल्टीमेटम के बाद आख़िरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अरबों डॉलर का क़र्ज़ अदा कर दिया है. इसके लिए दोनों पक्षों के बीच मंगलवार को बातचीत हुई थी और बुधवार को भी अर्जेंटीना के राष्ट्रपति नेस्तोर किर्शनर और मुद्रा कोष के कार्यवाहक प्रबंध निदेशक एनी क्रुएगर के बीच बातचीत हुई. अर्जेंटीना के ऊपर मुद्रा कोष का क़रीब तीन अरब डॉलर का कर्ज़ था जिसे अदा करने के लिए उसे 9 मार्च यानी मंगलवार तक की समय सीमा दी गई थी. अगर अर्जेंटीना सरकार ये कर्ज़ नहीं चुका पाती तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के इतिहास में कर्ज़ नहीं अदा करने की ये अब तक की सबसे बड़ी घटना होती. जानकारों का कहना है कि अर्जेंटीना ने अगर यह धन नहीं अदा किया होता तो इससे उसकी साख को भारी धक्का लगता, साथ ही उसे मुद्रा कोष से और धन मिलने में भी मुश्किल होती. इस कारण विश्व अर्थव्यवस्था में अर्जेंटीना और अलग-थलग तो पड़ता ही, इसका असर पूरे लातिन अमरीका क्षेत्र पर पड़ सकता था. अर्जेंटीना के राष्ट्रपति नेस्तोर किर्शनर ने कहा है कि कर्ज़ की रक़म तभी दी जा सकती है जब आईएमएफ़ अर्जेंटीना की आर्थिक प्रगति को मान्यता दे और उसके लिए नए ऋण जारी करे. अर्जेंटीना आईएमएफ़ का सबसे बड़ा देनदार रहा है और जिन देशों ने क़र्ज़ में सहयोग दिया है वे आईएमएफ़ पर ये दबाव डाल रहे हैं कि वह अर्जेंटीना के राष्ट्रपति की बात नहीं माने. |
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