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क्या 'आतंकवादी' भी व्यवसायी की तरह सोचते हैं?
आइए, एक सुपरिचित संगठन का जायज़ा लें. यह बहुराष्ट्रीय संगठन है और इसका एक बहुत ताक़तवर नेता है लेकिन इससे जुड़े संगठन आत्मनिर्भर हैं और एक स्वायत्त संस्था की तरह काम कर सकते हैं. इस संस्था का एक वित्त विभाग है, एक मानव संसाधन विभाग है, एक सक्षम जनसंपर्क विभाग है, उनका प्रशिक्षण कार्यक्रम दुनिया भर में जाना जाता है और यह संस्था इंटरनेट का बहुत प्रभावी उपयोग करती है. और इसका बहुत तगड़ा ब्रांड नाम है - अल क़ायदा. इस कंपनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी या कहें कि सीईओ हैं ओसामा बिन लादेन. लेकिन क्या किसी चरमपंथी संगठन या 'आतंकवादी संगठन' का विश्लेषण इस तरह किया जाना चाहिए? दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच में कुछ विद्वान मानते हैं कि ऐसा किया जाना चाहिए. कंपनी की तरह मुक़ाबला टाइम पत्रिका के संपादक माइकल इलियट ने 'चरमपंथियों से व्यावसायिक सीख' विषय पर हो रही चर्चा के नेताओं में से एक हैं और वे किसी देश की तुलना भी किसी बड़ी कंपनी से करते हैं. उनका कहना है कि उन्हें चरमपंथी संगठनों को ऐसे संगठन की तरह देखना चाहिए जो उनका व्यवसाय चौपट कर सकता है.
उनका कहना था कि यह ठीक है कि आत्मघाती हमलावर को तार्किक ढंग से समझाया नहीं जा सकता, लेकिन मुद्दा यह नहीं है. इलियट ने कहा, ''यदि व्यवसाय के सिंद्धांतों के अनुसार यदि आतंकवादी संगठनों को देखना शुरु करें तो उनकी कार्यप्रणाली को समझने में सुविधा होगा.'' हार्वर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्याता जेसिका स्टर्न का कहना है, ''आतंकवादी संगठनों को व्यावसायिक संगठनों की तरह से देखना उपयोगी साबित हो सकता है.'' वे कहती हैं, ''उनके पास पूँजी है, वे लोगों को काम देते हैं, उनके पास एक ब्रांड है और एक मिशन भी है.'' इसलिए यदि चरमपंथी ग्रुप अपना व्यवसाय बचाने के लिए अपने मिशन को लेकर लचीला व्यवहार निभाने लगें और अपना ढांचा बदल लें तो सरकारें किस तरह उनसे लड़ सकती हैं? इलियट कहते हैं, ''उनको एक बड़ी उभरती हुई कंपनी की तरह देखना चाहिए उनकी कमज़ोरियों को पहचानना चाहिए और उन पर जम कर हमला करना चाहिए.'' जेसिका स्टर्न कहती हैं, ''उनके ब्रांड को कमज़ोर करें और उनकी पूँजी का स्रोत ख़त्म करने की कोशिश करें.'' मानव संसाधन उनका कहना है कि अल क़ायदा जैसे संगठन के लिए यह आसान नहीं होगा लेकिन उनको किस कदम से नुक़सान हो सकता है यह जानना अपने आपमें महत्वपूर्ण है. अल क़ायदा प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित दोनों तरह के लोगों को काम देता है और उनकी क्षमता के अनुसार उनको भुगतान भी करता है.
सूडान से अल क़ायदा के लिए काम कर चुके एक व्यक्ति ने बताया कि किस तरह मिस्र में काम करने वाले किसी व्यक्ति को उसकी तुलना में तीन गुना भुगतान किया जाता रहा है. ओसामा बिन लादेन के नियम इस मामले में स्पष्ट हैं, भुगतान इस आधार पर होंगे कि वे अपने देश में कितनी कमाई कर सकते हैं. इसलिए हो सकता है कि कुछ ऐसे लोगों को तोड़ा जा सके जिन्हें ठीक तरह से भुगतान नहीं होता. दूसरी ओर लगता है कि व्यवसायियों को भी बहुत कुछ सीखना है. इलियट कहते हैं, ''अल क़ायदा को देखिए, उसका प्रबंधन समतल पर है, बहुत उसकी परत बहुत महीन सी है और वे जो कुछ भी करते हैं उसमें वे बहुत सफल हैं.'' उनका मानना है कि यह गुट प्रबंधन की सबसे उम्दा रणनीति पर काम करता है. अल क़ायदा जिस तरह अपने कार्पोरेट मिशन पर काम करता है उस तरह कम ही कंपनियाँ काम करती हैं. |
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