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'साइबर कुली बना रहे हैं कॉल सेंटर'
यूरोप और अमरीका से कॉल सेंटरों का भारत स्थानांतरण उपमहाद्वीप के लिए अच्छा नहीं है. ये कहना है कि जाने-माने पत्रकार और लेखक प्रफुल्ल बिदवई का. उनका कहना है कि ये कॉल सेंटर भारतीय युवाओं को 'साइबर कुली' बना रहे हैं. प्रफुल्ल बिदवई ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के वन प्लेनेट कार्यक्रम में कहा," ये लोग लंबे समय तक काम करते हैं और उन्हें कम वेतन मिलता है." उनका कहना था,"ये लोग तनाव में काम करते हैं और उनके लिए अपने कैरियर के विकास के कोई अवसर उपलब्ध नहीं हैं."
प्रफुल्ल बिदवई का कहना था," इसके आगे उनके लिए कोई राह नहीं है. यहाँ भरपूर शोषण होता है केवल फर्क़ इतना है कि आप कंप्यूटर और इलेक्टॉनिक उपकरणों के बीच काम करते हैं किसी हथकरघा इकाई में नहीं." प्रफुल्ल बिदवई का कहना था कि कॉल सेंटर अँग्रेज़ी बोलने वाले युवाओं का शोषण कर रहे हैं. उनका कहना था कि भारतीय अर्थव्यवस्था की दुखद बात ये है कि इसकी विकास दर अच्छी रही है लेकिन बेरोज़गारी बढ़ी है. अहमियत भारतीय अर्थव्यवस्था में कॉल सेंटर की अहम भूमिका मानी जा रही है. पिछले तीन वर्षों में कॉल सेंटरों की संख्या बढ़कर 50 से 800 तक पहुँच गई है. अनेक विदेशी कंपनियाँ काम लागत के कारण भारत में अपने कॉल सेंटर स्थानांतरित कर रही हैं. ब्रिटेन की तुलना में भारत में कॉल सेंटर 30 से 40 प्रतिशत सस्ते पड़ते हैं. भारत में कम तनख़्वाह पर ही बड़ी संख्या में प्रशिक्षित लोग मिल जाते हैं जिससे पश्चिमी देशों की बहुत सी कंपनियों ने अपने कॉल सेंटर भारत में बना लिए हैं. भारत में बने इन कॉल सेंटरों से पश्चिमी देशों में ग्राहकों से टेलीफ़ोन पर संपर्क करके काम चलाया जाता है. एक अनुमान के अनुसार कॉल सेंटरों के क्षेत्र में फ़िलहाल भारत में क़रीब चालीस करोड़ डॉलर यानी दो सौ करोड़ रुपए का कारोबार होता है. |
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