BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 13 नवंबर, 2003 को 03:29 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
एशिया में भारतीयों की तनख़्वाह सबसे ज़्यादा बढ़ी
भारत का एक कॉल सेंटर
आने वाले दिनों में और अधिक काम मिलने की संभावना है

सूचना तकनीक के क्षेत्र में हुई तरक्की और कॉल सेंटरों की बढ़ती संख्या के कारण एशिया में तनख़्वाह बढ़ने की दर भारत में सबसे अधिक है.

एक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2003 भारतीयों की तनख़्वाह में औसतन 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

यह फ़िलीपीन्स की तुलना में दोगुना है जहाँ तनख़्वाह में सात फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.

सिंगापुर में तनख़्वाह में सिर्फ़ 2.1 से 2.4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.

यह सर्वेक्षण हैविट एसोशिएट ने किया है.

सर्वेक्षण का कहना है कि भारतीय कॉल सेंटरों में काम कर रहे पढ़े लिखे और अंग्रेज़ी बोलने वाले लोगों को ब्रिटेन से नया काम मिलना जारी है.

अपना काम दिल्ली और बैंगलोर में ले जाने से ब्रिटेन की कंपनियों को कोई चालीस फ़ीसदी की बचत हो रही है.

ब्रिटेन की जिन कंपनियों ने अपने कॉल सेंटर भारत में खोले हैं और अपना कंप्यूटर का कामकाज वहाँ स्थानांतरित किया है उनमें लॉयड टीएसबी बैंक, टेलीकॉम समूह बीटी, ब्रिटिश एयरवेज़, इंश्योरेंस कंपनियाँ अवीवा और प्रुडेंशियल आदि.

इस तरह के काम जुटाने वाली बैंगलोर की एक कंपनी का कहना है, ''हर स्तर पर तनख़्वाह बढ़ रही है.''

मा फ़ोई कंसलटेंट्स का कहना है कि भारत में कई देशों के कॉल सेंटरों की बाढ़ आ गई है और लोगों को काम मिल रहा है.

हालांकि भारत में अभी भी तकनीकी रुप से सक्षम और अच्छी अंग्रेज़ी बोलने वालों की कमी है इसलिए इन कॉल सेंटरों के भारत आने की रफ़्तार में कुछ कम है.

माना जा रहा है कि जिस रफ़्तार से काम बढ़ रहा है उसके चलते भारत में ठेके लेने वाली कंपनियों को जल्दी ही प्रशिक्षण पर पैसा ख़र्च करना पड़ सकता है.

हालांकि भारत में तनख़्वाह बढ़ रही है लेकिन ब्रिटेन की तुलना में वह अभी भी बहुत कम है.

सूचना तकनीक और कॉल सेंटरों में काम करने वालों की तनख़्वाह तो बढ़ रही है लेकिन भारत में अभी भी एशिया में सबसे कम तनख़्वाह देने वाले देशों में से एक है.

सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>