BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 28 अक्तूबर, 2003 को 09:30 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
क्या हैं सोनी की समस्याएँ?
सोनी
सोनी को इलेक्ट्रॉनिक बाज़ार में कड़ी टक्कर

एक समय अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक बाज़ार पर अपना वर्चस्व क़ायम कर चुनी जापान की शीर्ष कंपनी सोनी को अपने 20 हज़ार कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ रही है.

सात मई 1946 को स्थापित इस कंपनी को शायद बाज़ार से इतनी प्रतिस्पर्धा कभी नहीं मिली, जितनी पिछले छह-सात सालों में मिली है.

बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा सबसे ज़्यादा इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों की घटती क़ीमतों को लेकर हैं.

सोनी को इस चुनौती का आभास पहले ही हो चुका था, लेकिन उसने बाज़ार में नए-नए उत्पाद और दूसरे उपभोक्ता क्षेत्रों में निवेश कर इससे निपटने की पुरज़ोर कोशिश की.

कंपनी ने दूसरी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों के साथ समझौते भी किए, लेकिन उसका कोई ख़ास असर नहीं पड़ा.

फ़िक्की में आर्थिक मामलों के सलाहकार अंजन राय का कहना है कि जापान की कई कंपनियाँ रणनीति के तहत अपने को बाज़ार की माँग के अनुसार संगठित कर रही हैं और सोनी का फ़ैसला इसी के तहत लगता है.

 कई कंपनियाँ वहाँ से अपना उत्पादन केंद्र दूसरे देशों में ले जा रही हैं क्योंकि चीन और कोरिया जैसे देशों में उत्पादन में ख़र्च कम हो रहा है

अंजन राय, आर्थिक सलाहकार, फ़िक्की

बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में अंजन राय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय बाज़ार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.

जापान का ख़ास तौर पर जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई कंपनियाँ वहाँ से अपना उत्पादन केंद्र दूसरे देशों में ले जा रही हैं क्योंकि चीन और कोरिया जैसे देशों में उत्पादन में ख़र्च कम हो रहा है.

उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियाँ नए-नए डिज़ाइन और अच्छे उत्पाद बनाने की कोशिश कर रही हैं सोनी भी ऐसा कर रही है और उसकी ताज़ा घोषणा कंपनी को फिर से संगठित किए जाने की दिशा में एक क़दम है.

नुक़सान

यह इत्तिफ़ाक ही है कि सोनी की नौकरियों में कटौती की घोषणा के साथ जापान की एक और इलेक्ट्रॉनिक कंपनी मत्सुशिता ने अपने मुनाफ़े में 21 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई है.

लेकिन इस साल सितंबर में ख़त्म हुई दूसरी तिमाही में भी सोनी के मुनाफ़े में क़रीब 25 फीसदी की गिरावट आई. जबकि अप्रैल में कंपनी को एक अरब डॉलर के घाटे की ख़बर आई थी.

 जापान की कई कंपनियाँ रणनीति के तहत अपने को बाज़ार की माँग के अनुसार संगठित कर रही हैं और सोनी का फ़ैसला इसी के तहत लगता है.

अंजन राय, आर्थिक सलाहकार, फ़िक्की

यह पिछले साल की तुलना में 20 गुना गिरावट थी.

इससे सोनी के निवेशक भी घबरा गए थे और उसके शेयरों में भी 15 प्रतिशत की गिरावट आई.

सोनी को लगातार मिल रहे झटके इलेक्ट्रॉनिक उपभोक्ता सामग्रियों के बाज़ार की प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ म्यूजिक डिविज़न को फिर से खड़ा करने में किए गए भारी निवेश के कारण भी है.

सोनी ने खस्ताहाल इस डिविज़न को खड़ा करने के लिए क़रीब 11 अरब डॉलर ख़र्च किए.

इसके अलावा सोनी को चर्चित प्लेस्टेशन गेम, फ़्लैट स्क्रीन टेलीविज़न और मनोरंजन के बाज़ार में भी नुक़सान उठाना पड़ा.

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के साथ-साथ जापान के घरेलू बाज़ार पर भी सोनी की पकड़ कमज़ोर हो रही है.

इस कारण सोनी को भी अपने इलेक्ट्रॉनिक सामानों की क़ीमतों में कमी करनी पड़ी.

ऑडियो, वीडियो, टेलीविज़न, इलेक्ट्रॉनिक पुर्ज़े तक बनाने वाली सोनी को नई तक़नीक की भी चिंता है.

इस कारण मोबाइल फ़ोन से लेकर कंप्यूटर तक के निर्माण में कंपनी निवेश करने को इच्छुक है.

बाज़ार में प्रतिस्पर्द्घा
चीन और कोरिया कड़ी टक्कर दे रहे हैं

अपनी नई घोषणा से सोनी अपने निवेशकों को यह संकेत दिया है कि वह ख़र्च में कमी के साथ-साथ अपने में बड़े बदलाव के लिए भी तैयार है.

सोनी को जापानी कंपनी हिताची के साथ-साथ सैमसंग जैसी कोरियाई कंपनियों से भी कड़ी टक्कर मिल रही है.

दरअसल उपभोक्ता सामग्री बाज़ार में कम क़ीमतों के साथ उतर रही नई-नई कंपनियों ने ऐसी पैठ बना ली है कि सोनी की ज़्यादा क़ीमतों वाली इलेक्ट्रॉनिक सामान पीछे छूट रहे हैं.

टेलीविज़न का बाज़ार हो या ऑडियो-वीडियो का हर दिन नए-नए मॉडल में और कम क़ीमत में आ रहे सामान उपभोक्ता को ज़्यादा लुभा रहे हैं.

लेकिन जानकार मानते हैं कि इस घोषणा के बावजूद उभरती कंपनियों को कड़ी टक्कर देने में सोनी को लंबा समय लग सकता है.

भारत पर असर

फ़िक्की के आर्थिक मामलों के सलाहकार अंजन राय का मानना है कि सोनी पहले हाई वोल्यूम मार्केट यानी महंगे सामान बना रही थी.

लेकिन चीनी, कोरियाई और यूरोपीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के कारण वह दूसरे क्षेत्रों में भी आने की कोशिश कर रही है.

उन्होंने कहा कि सोनी के इस फ़ैसले का भारत के बाज़ार पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

अंजन राय ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक उपभोक्ता बाज़ार बढ़ता जा रहा है और उसकी माँग काफ़ी मज़बूत है.

उन्होंने कहा कि टीवी, फ्रिज़ बनाने वाली कंपनियाँ तो भारत में अपने और प्लांट लगा रही हैं.

इसलिए इससे भारत के लिए बाज़ार के लिए बहुत चिंतित होने का कारण नहीं है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>