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रविवार, 26 अक्तूबर, 2003 को 01:17 GMT तक के समाचार
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प्याज़ की किल्लत से जूझते बांग्लादेशी
ढाका का एक दुकानदार
दुकानदारों का कहना है कि थोक व्यापारियों ने क़ीमतें अचानक बढ़ा दी हैं

आपको याद होगा, कुछ समय पहले भारत में प्याज़ की आसमान छूती क़ीमतों को लेकर राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया था.

अब ऐसी ही हालत बांग्लादेश में नज़र आ रही है, रमज़ान से ठीक पहले प्याज़ की बढ़ी हुई क़ीमतों ने सरकार की नींद हराम कर दी है.

बढ़ी हुई क़ीमतों को देखते हुए सरकार ने प्याज़ के आयात पर लगने वाला शुल्क हटा दिया है ताकि पड़ोसी देशों से प्याज़ मँगाना आसान हो जाए.

भारत की ही तरह, बांग्लादेश में भी प्याज़ खाने का एक अहम हिस्सा है.

बांग्लादेश की प्याज़ की ज़्यादातर ज़रूरत भारत से पूरी होती है और इन दिनों थोक व्यापारियों ने अचानक क़ीमतें बढ़ा दी हैं.

थोक व्यापारियों का कहना है कि क़ीमतों के बढ़ने का कारण हाल में आई बाढ़ और बढ़ी हुई पेट्रोल की क़ीमतें हैं.

 रमज़ान के महीने में मैं परिवार के हर सदस्य को रोज़े के बाद अच्छा खाना खिलाना चाहती हूँ, लेकिन अगर प्याज़ ही नहीं मिलेगा तो खाना कैसे बनेगा?

हमीदा, ढाका की गृहिणी

बांग्लादेश के विपक्षी राजनीतिक दल और कई संगठन सरकार पर नाकामी का आरोप लगा रहे हैं, इनका कहना है कि सरकार जमाख़ोरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं कर रही है.

बांग्लादेश के वाणिज्य विभाग ने प्याज़ व्यापारियों के साथ कई बैठकें की हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि मुक्त आर्थिक व्यवस्था में क़ीमतें नियंत्रण करना उनके बस की बात नहीं है.

ढाका के गुलशन बाज़ार में प्याज़ बेचने वाले अब्दुल का कहना है कि "प्याज़ की क़ीमतें बढ़ने से आम जनता परेशान है. प्याज़ की क़ीमतें दोगुनी बढ़ गई हैं, सप्लाई की भारी कमी है."

इसी बाज़ार में सब्ज़ी ख़रीदने आई हमीदा का कहना है कि प्याज़ की बढ़ी हुई क़ीमत उनके लिए एक बड़ी समस्या है.

उनका कहना है, "रमज़ान के महीने में मैं परिवार के हर सदस्य को रोज़े के बाद अच्छा खाना खिलाना चाहती हूँ, लेकिन अगर प्याज़ ही नहीं मिलेगा तो खाना कैसे बनेगा."

बाज़ार के जानकारों का कहना है कि रमज़ान की वजह से माँग वैसे ही अधिक है, ऐसी हालत में प्याज़ की क़ीमतें गिरने की संभावना कुछ कम ही दिखती है.

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