|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विनिवेश पर सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की अपील
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड(एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन(बीपीसीएल) के निजीकरण संबंधी फ़ैसले पर गंभीरता से पुनर्विचार की अपील की है. सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पूरी विनिवेश प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग गया है. एटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने रेल कोच निर्माण कंपनी जेसप के निजीकरण के ख़िलाफ़ दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह अपील की. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सोराबजी ने सुप्रीम कोर्ट से अपने फ़ैसले के कुछ बिंदुओं पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया. स्थगन सुनवाई को दो सप्ताह के लिए स्थगित किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों एचपीसीएल और बीपीसीएल के विनिवेश पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि संसद की अनुमति से इनका राष्ट्रीयकरण किया गया था, इसलिए निजीकरण भी संसद की अनुमति से ही होनी चाहिए. फ़ैसले के बाद सरकार के महत्वाकांक्षी विनिवेश कार्यक्रम को ज़ोरदार झटका लगा क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों की क़ानूनी स्थिति इन दोनों तेल कंपनियों जैसी ही है. सरकार ने वर्ष 2003 में विनिवेश के ज़रिए 130 अरब रुपये से ज़्यादा उगाहने का लक्ष्य तय कर रखा है जिसका पूरा होना अब मुश्किल लग रहा है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||