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अमरीका ने एचवनबी वीज़ा में कटौती की
अमरीका ने एच वन बी वीज़ा की संख्या में कटौती कर रहा है और इससे सबसे ज़्यादा प्रभाव भारत के सॉफ़्टवेयर उद्योग पर पड़ने की आशंका है. एच वन बी वीज़ा जिन लोगों को दिया जाता है उनमें से आधे तो भारतीय ही होते हैं इसलिए सर्वाधिक असर भारतीय उद्योग पर पड़ेगा. अमरीका के लिए दुनिया भर में एच वन बी कोटे से पहले लगभग एक लाख पच्चानवे हज़ार वीज़ा दिए जाते थे. मगर बुधवार से ही लागू हो रहे नए कोटे के तहत अब एच वन बी श्रेणी के तहत सिर्फ़ 65 हज़ार वीज़ा ही दिए जाएँगे. हर साल लगभग ढाई लाख भारतीय अमरीका का वीज़ा पाने के लिए विभिन्न वर्गों में प्रार्थना पत्र देते हैं.
इस वर्ग में इंजीनियर, कंप्यूटर के जानकार, अकाउंटेंट, वित्त विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, वकील, आर्कीटेक्ट जैसे पेशों के लोग शामिल हैं. एच वन बी वर्ग में वीज़ा लेने वाला पेशावर अमरीका में ज़्यादा से ज़्यादा छह साल तक रहकर काम कर सकता है लेकिन शुरु में यह सिर्फ़ तीन साल के लिए ही दिया जाता है. इस वर्ग में वीज़ा हासिल करके छह साल तक अमरीका में काम करने वाला कोई व्यक्ति अगर फिर से छह साल के लिए वीज़ा के लिए अर्ज़ी दे तो उसे पहले एक साल के लिए अमरीका से बाहर रहना होगा. भारतीय उम्मीदें भारत से बहुत से लोग इसी श्रेणी में वीज़ा हासिल करके अमरीका में काम करते हैं क्योंकि अमरीका को वैज्ञानिकों, इंजानियरों, कंप्यूटर विश्लेषकों, अकाउटेंटों वग़ैरा की बहुत ज़रूरत होती है. इसलिए इस श्रेणी में वीज़ा की संख्या कम करने से भारत के पेशेवर लोगों पर बड़ा असर पड़ेगा.
अमरीका में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े अशोक लाहा अमरीका के इस फ़ैसले के भारतीय सॉफ़्टवेयर उद्योग पर पड़ने वाले असर के बारे में कहते हैं, "भारत के सॉफ़्टवेयर विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग एच वन बी वीज़ा का इस्तेमाल करता है." लाहा कहते हैं, "यही वर्ग एच वन बी वीज़ा के कोटे में कटौती से सबसे ज़्यादा प्रभावित होगा." वह कहते हैं कि अमरीकी बाज़ार में अगर इस क्षेत्र की माँग फिर हुई तो भारतीय सॉफ़्टवेयर उद्योग इससे काफ़ी हद तक प्रभावित होगा. लाहा के अनुसार, "अभी तो अमरीकी बाज़ार में मंदी है इसलिए इसका असर पता नहीं चलेगा मगर यदि माँग बढ़ी तो इसका असर लंबे समय तक होगा." उन्होंने कहा कि जब पहले भी वीज़ा की संख्या कम थी तो लोग पहले ही प्रार्थना पत्र दे देते थे जिससे वीज़ा जल्दी ही ख़त्म हो जाता था. माँग में कमी आव्रजन से जुड़े मसलों पर नज़र रखने वाली टेक्सास की वकील दीपा ठाकुर कहती हैं कि एच वन बी वीज़ा में कटौती सिर्फ़ इसलिए की जा रही है क्योंकि अब अमरीका में सॉफ़्टवेयर विशेषज्ञों की माँग कम हो गई है. ठाकुर कहती हैं, "जब 1990 के दशक में डॉटकॉम उद्योग में तेज़ी थी तब सॉफ़्टवेयर क्षेत्र से जुड़े लोगों की अमरीका में ज़बरदस्त माँग थी." वह कहती है, "अब जब अमरीकी अर्थव्यवस्था में मंदी आई है वीज़ा के कोटे का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. इसलिए ये महसूस किया गया कि 65 हज़ार वीज़ा पर्याप्त होंगे." इसके बाद अब भारतीय विशेषज्ञ शायद दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप का रुख़ कर सकते हैं. |
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