
कोको कोला ने अपना उत्पादन 1886 में शुरू किया था
क़रीब 60 साल बाद बर्मा में कोका-कोला की बिक्री शुरू हुई है.
लेकिन दुनिया के सबसे चर्चित ब्रांड्स में से एक और सॉफ़्ट ड्रिंक के क्षेत्र की बड़ी कंपनी कोका कोला कुछ देशों में अब भी नहीं बिकती.
कोका कोला का सफर अमरीका के बढ़ते प्रभुत्व के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है, शायद यही वजह है कि न चाहते हुए भी कंपनी कई बार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उलझी है और कंपनी ने बहिष्कार भी झेला है.
लेकिन कंपनी लगातार आगे बढ़ रही है.
प्रतिबंध
कोका कोला का कहना है कि कंपनी हर दिन अपनी ड्रिंक की 1.8 अरब सर्विंग बेचती है. लेकिन पिछले छह दशक से कंपनी बर्मा में कुछ नहीं कर पा रही थी.
"जैसे ही कोका कोला अपना माल भेजना शुरू करती है, आप कह सकते हो कि वहाँ असली बदलाव होने जा रहा है. कोका कोला एक बोतल में पूँजीवाद के बेहद क़रीब है"
टॉम स्टैंडेज
ऐसा इसलिए था क्योंकि बर्मा के सैनिक शासन पर अमरीका ने व्यापार प्रतिबंध लगा रखे थे. लोकतांत्रिक सुधार के बाद कुछ महीने पहले अमरीका ने पाबंदियों में ढील दी है.
अब कंपनी का कहना है कि जल्द ही बर्मा में स्थानीय तौर पर कंपनी अपना उत्पादन शुरू कर देगी.
अ हिस्ट्री ऑफ़ द वर्ल्ड इन सिक्स ग्लासेज के लेखक टॉम स्टैंडेज का कहना है कि किसी भी देश में कोका कोला की एंट्री एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में देखी जाती है.
वो कहते हैं, "जैसे ही कोका कोला अपना माल भेजना शुरू करती है, आप कह सकते हो कि वहाँ असली बदलाव होने जा रहा है. कोका कोला एक बोतल में पूँजीवाद के बेहद क़रीब है."
कोका कोला की प्रतिद्वंद्वी कंपनी पेप्सीको ने भी बर्मा में अपनी बिक्री शुरू करने की घोषणा की है.
यहाँ नहीं मिलता कोका कोला

कोका कोला का व्यापार लगातार बढ़ रहा है
अब इस दुनिया में दो ही देश ऐसे बचे हैं, जहाँ कोका कोला न ख़रीदा जा सकता है और न ही बेचा. ये दो देश हैं- क्यूबा और उत्तर कोरिया. इन दोनों ही देशों पर लंबे समय से अमरीका की ओर से व्यापारिक पाबंदी लगी हुई है.
क्यूबा पर ये पाबंदी 1962 से और उत्तर कोरिया पर 1950 से है.
दरअसल अमरीका के बाहर क्यूबा उन पहले तीन देशों में शामिल था, जिन्होंने 1906 में कोक की बॉटलिंग शुरू की थी.
लेकिन 1960 के दशक में जब फिडेल कास्त्रो की सरकार ने निजी संपत्तियों का अधिग्रहण शुरू किया, तो कंपनी ने क्यूबा से अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया. फिर कंपनी वापस नहीं लौटी.
क्यूबा के बाद उत्तर कोरिया ऐसा देश है, जहाँ कोका कोला नहीं बिकता, लेकिन हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा गया कि प्योंगयांग के एक रेस्तरां में कोका कोला की बिक्री हो रही है.
लेकिन कोका कोला का कहना है कि अगर उसके ड्रिंक्स वहाँ बिक रहे हैं, तो ऐसा स्मगलिंग करके हो रहा होगा. क्योंकि आधिकारिक स्तर पर ऐसा नहीं हो रहा है.
उत्पादन
ये काला गहरा बुलबुला वाला सोडा वर्ष 1886 में अटलांटा (जॉर्जिया) में तैयार किया गया था. अपने शुरुआती दिनों से ही कोका कोला ने दुनियाभर में अपने विस्तार की तरफ देखना शुरू किया.
"माना जाता था कि यूरोप में सहयोगी सेना के सुप्रीम कमांडर ड्विट आइजनहॉवर कोका कोला के बड़े फैन थे और उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि उत्तरी अफ़्रीका में ये उपलब्ध रहे."
1900 के दशक से कंपनी ने एशिया और यूरोप में बॉटलिंग का काम शुरू कर दिया.
लेकिन कंपनी को बड़ा बढ़ावा दूसरे विश्व युद्ध के कारण मिला, जब विदेशों में मौजूद अमरीकी सैनिकों को कोका कोला उपलब्ध कराया गया.
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान दुनियाभर में कोका कोला के 60 मिलिटरी बॉटलिंग प्लांट थे. इसका फायदा स्थानीय लोगों को भी मिला.
स्टैंडेज का कहना है कि कोका कोला अमरीकी देशभक्ति से प्रभावशाली तरीके से जुड़ गया. युद्ध के दौरान इसे इतना अहम माना गया कि इसे चीनी की राशनिंग से छूट दी गई.
माना जाता था कि यूरोप में सहयोगी सेना के सुप्रीम कमांडर ड्विट आइजनहॉवर कोका कोला के बड़े फैन थे और उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि उत्तरी अफ़्रीका में ये उपलब्ध रहे.
स्टैंडेज ने बताया कि आइजनहॉवर ने एक शीर्ष सोवियत कमांडर जॉर्जी जुकोव को भी ये ड्रिंक पिलाई थी, जिन्होंने आइजनहॉवर से ये कहा था कि क्या इसका एक विशेष और रंगहीन ड्रिंक तैयार किया जा सकता है, जो वोदका की तरह दिखे.
और कोका कोला ने कुछ समय के लिए ऐसा किया भी.
'अमरीकीवाद'

कोका कोला को कई देशों में विरोध का भी सामना करना पड़ा
कोका कोला कंपनी के साथ काम कर चुके ब्रांडिंग कंसल्ट ब्रूस वेबस्टर कहते हैं, "ये हमेशा ही अमरीकी सपने के बारे में रहा है."
लेकिन सभी देशों ने इस 'अमरीकीवाद' को नहीं अपनाया, जो कोका कोला की ओर से साकार किया जा रहा था.
सबसे पहले फ्रांस ने 1950 के दशक में निंदात्मक शब्द इजाद किया और इसे 'कोका कोलोनाइजेशन' का नाम दिया गया. कोका कोला के ट्रक पलट दिए गए और बोतलें तो़ड़ दी गई.
स्टैंडेज बताते हैं कि प्रदर्शनकारी कोका कोला को फ्रांसीसी समाज के लिए ख़तरा मानने लगे थे.
शीत युद्ध के दौरान कोका कोला पूँजीवाद का प्रतीक बन गया. वेबस्टर का कहना है कि ये पूँजीवाद और साम्यवाद के बीच भेद करने वाली चीज़ बन गई.
स्टैंडेज बताते हैं कि पूर्व सोवियत संघ में इसकी मार्केटिंग इसलिए नहीं की गई, क्योंकि ऐसी आशंका थी कि कहीं इसका लाभ कम्युनिस्ट सरकार की तिजोरी में न चला जाए.
पेप्सी ने इस कमी को पूरा किया और यहाँ इसकी खूब बिक्री हुई.
आज़ादी

भारत, चीन और ब्राज़ील में कंपनी ने अपनी पैठ बनाई है
वर्ष 1989 में जब बर्लिन की दीवार गिरी, तो पूर्वी जर्मनी में रहने वाले कई लोग क्रेट भर-भर कर कोका कोला लेकर आए. स्टैंडेज कहते हैं, "कोका कोला पीना आज़ादी का प्रतीक बन गया."
पूर्व सोवियत संघ के अलावा जिन क्षेत्रों में कोका कोला को संघर्ष करना पड़ा, वो था मध्य पूर्व. यहाँ अरब लीग ने इसका बहिष्कार कर रखा था, क्योंकि इसराइल में इसकी बिक्री होती थी.
इस कारण मध्य पूर्व में पेप्सी की खूब बिक्री हुई. मध्य पूर्व में इन ड्रिंक्स के कई स्थानीय रूप भी सामने आए.
वेबस्टर कहते हैं कि कोका कोला राजनीति से जुड़ने की कोशिश नहीं करता, लेकिन अमरीका से जुड़ा एक बड़ा ब्रांड होने के नाते ये अपने आप को राजनीति में उलझा पाता है और इसे आलोचना का भी सामना करना पड़ता है.
वर्ष 2003 में इराक़ पर अमरीकी कार्रवाई के विरोध में थाईलैंड में लोगों ने सड़कों पर कोका कोला बहाया और वहाँ कुछ समय के लिए उसकी बिक्री भी रोक दी गई.
ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने भी कोका कोला पर पाबंदी की धमकी दी है, तो वेनेजुएला के ह्यूगो चावेज ने लोगों से अपील की है कि वे कोका कोला और पेप्सी की बजाए स्थानीय तौर पर बने फलों के रस को पीएँ.
लेकिन अपने जन्म के 126 साल बाद भी कोका कोला बिक्री के मामले में लगातार आगे बढ़ रहा है. ख़ासकर भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे उभरते बाज़ारों में कंपनी की पैठ बढ़ रही है.








