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यूसुफ़ पठान पर गुजरात हाई कोर्ट ने की तल्ख़ टिप्पणी, क्या है पूरा मामला
गुजरात हाई कोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ़ पठान को वडोदरा में एक भूखंड पर कब्जा छोड़ने का आदेश दिया है.
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मशहूर हस्तियों और सेलिब्रिटी की जवाबदेही दूसरों के मुक़ाबले कहीं अधिक है और क़ानून के उल्लंघन के मामले में अगर उन्हें कोई रियायत दी जाती है तो इससे समाज में गलत संदेश जाता है.
गुजरात हाई कोर्ट ने यूसुफ़ पठान की याचिका को ख़ारिज कर दिया और नगर निगम को ज़मीन से अवैध कब्जा हटाने को कहा.
12 सितंबर को वडोदरा नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया था कि निगम ने यूसुफ़ पठान के कब्जे वाले भूखंड को वापस पाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
हाई कोर्ट ने ये फ़ैसला 21 अगस्त को सुनाया था, लेकिन ये ऑर्डर दो सितंबर को कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया.
13 साल पुराना मामला
मार्च 2012 में यूसुफ़ पठान ने पहली बार इस प्लॉट का अलॉटमेंट हासिल करने के लिए अर्ज़ी दी थी. अर्ज़ी में कहा गया था कि 978 वर्ग मीटर क्षेत्रफल का यह भूखंड सुरक्षा कारणों से उन्हें आवंटित किया जाना चाहिए क्योंकि यह उनके बंगले से सटा हुआ है.
30 मार्च 2012 को वडोदरा नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी ने वैल्यूएशन प्रक्रिया के बाद यह भूखंड यूसुफ़ पठान को आवंटित करने का फ़ैसला किया और कीमत रखी 57 हज़ार 270 रुपए प्रति वर्ग मीटर.
दो महीने बाद निगम की जनरल बॉडी ने भी इस फ़ैसले पर सहमति जताई. क्योंकि इस मामले में ज़मीन (भूखंड) बगैर नीलामी के आवंटित की जानी थी, लिहाजा निगम ने इसकी सिफ़ारिश गुजरात सरकार को भेज दी.
गुजरात सरकार ने जून 2012 में ही निगम की इस सिफ़ारिश को ख़ारिज कर दिया. लेकिन ज़मीन पर यूसुफ़ पठान का कब्जा बना रहा. जून 2024 में वडोदरा नगर निगम के कमिश्नर ने एक नोटिस जारी कर यूसुफ़ पठान को सरकारी ज़मीन खाली करने को कहा.
पठान ने नगर निगम के इस नोटिस को चुनौती देते हुए गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की
यूसुफ़ पठान ने अपनी याचिका में क्या कहा था
पठान ने 20 जून 2024 को इस मामले में गुजरात हाई कोर्ट का रुख़ किया था.
पठान ने अपनी याचिका में कहा कि क्योंकि मामला 10 साल से अधिक पुराना है और जिस भूखंड को लेकर नोटिस भेजा गया है वह भी उनके (यूसुफ़ पठान) ही कब्जे में है, इसलिए वडोदरा नगर निगम को 'अतिक्रमण हटाने' और नगर निगम का प्लॉट फ्री करने का नोटिस देने के बजाय उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करना चाहिए था. यूसुफ़ ने कहा कि उन्हें इस भूखंड को ख़रीदने का मौका दिया जाना चाहिए.
यूसुफ़ पठान ने अपनी अर्ज़ी में यह भी दलील दी कि चूंकि यह ज़मीन नगर निगम की है इसलिए राज्य सरकार इस ज़मीन को बेचने के लिए मना नहीं कर सकती.
कोर्ट में क्या-क्या हुआ?
अपने 28 पेज के फ़ैसले में जस्टिस मौना एम भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले का हवाला देते हुए टिप्पणी की, सेलिब्रिटी सोशल रोल मॉडल के रूप में काम करते हैं और उनकी जवाबदेही अधिक होती है, कम नहीं. क़ानून का उल्लंघन करने के बावजूद ऐसे व्यक्तियों को रियायत देना समाज में गलत संदेश देता है और न्यायिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को कम करता है.
जस्टिस मौना भट्ट ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा, इस कोर्ट की राय है कि याचिकाकर्ता को उस भूखंड पर कब्जा जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिस पर उन्होंने अतिक्रमण किया है.
इससे पहले, यूसुफ़ पठान की पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट यतिन ओज़ा ने कहा कि गुजरात सरकार नगर निगम अधिनियम 1949 के तहत नगर निगम को इस मामले में ज़मीन बिक्री के लिए राज्य सरकार की अनुमति ज़रूरी नहीं है. ओज़ा ने कहा कि यहां यह देखा जाना चाहिए कि 12 साल तक वडोदरा नगर निगम ने कुछ नहीं किया, यहाँ तक कि एक भी चिट्ठी नहीं लिखी और अचानक साल 2024 में सीधे एक आदेश जारी कर दिया.
ओज़ा ने ये भी तर्क दिया कि यूसुफ़ पठान के ख़िलाफ़ कार्रवाई पश्चिम बंगाल से उनके लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद की गई और कहा कि ये 'टाइमिंग' बेहद अहम है. उन्होंने कहा कि पठान ने ज़मीन के लिए मौजूदा बाज़ार भाव चुकाने की पेशकश भी की थी.
वडोदरा नगर निगम ने क्या कहा?
नगर निगम का पक्ष रखते हुए एडवोकेट मौलिक नानावती ने कहा कि पठान का ज़मीन पर कोई क़ानूनी अधिकार नहीं है, क्योंकि न तो अलॉटमेंट ऑर्डर जारी किया गया है और ना ही कोई पेमेंट हुआ है.
नानावती ने कहा, "लंबे समय से ज़मीन पर कब्जे से उस संपत्ति पर अधिकार नहीं हो जाता. ज़मीन की बिक्री नीलामी से ही होनी चाहिए, हाँ ये ज़रूर किया जा सकता है कि अगर नीलामी में याचिकाकर्ता की बोली सबसे अधिक हुई तो उन्हें प्राथमिकता दी जा सकती है. "
कौन हैं यूसुफ़ पठान?
साल 2007 और 2011 में वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे यूसुफ़ पठान ने साल 2024 में राजनीति की पिच पर उतरते ही तहलका मचा दिया था.
तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लोक सभा चुनाव में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के बहरामपुर सीट से चुनावी मैदान में उतरे यूसुफ़ पठान ने कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी को हरा दिया था. यूसुफ़ पठान की यह जीत ऐतिहासिक थी क्योंकि बीते 25 सालों में पहली बार कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी इस सीट पर चुनाव हारे थे.
यूसुफ़ के भाई इरफ़ान पठान भी कई साल तक भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे. यूसुफ़ आईपीएल में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज़ भी हैं. उन्होंने 2010 में राजस्थान रॉयल्स की तरफ़ से खेलते हुए मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ मैच में सिर्फ़ 37 गेंदों पर शतक लगा दिया था.
यूसुफ़ पठान ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में भारत के लिए अपना पहला मैच खेला था. वीरेंद्र सहवाग फिट नहीं थे और ऐसे में यूसुफ़ को खेलने का मौका मिला. वह दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंटरनेशनल डेब्यू किया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित