इंडियाज़ गॉट लेटेंट: कॉमेडी में 'गाली' क्या समाज की हकीकत है? -द लेंस
जब-जब किसी हास्य-व्यंग्य करने वाले व्यक्ति पर उनके काम के कारण निशाना साधा जाता है, तब-तब बात उठती है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की.
मगर बीते हफ़्ते बात इस स्वतंत्रता से आगे बढ़कर विषय के चुनाव, भाषा के इस्तेमाल, डिजिटल माध्यमों के ज़रिए समाज के अलग-अलग वर्गों पर पड़ रहे असर पर पहुँची. वजह थी 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट' नाम के एक प्रोग्राम में समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अपूर्वा मखीजा की कही कुछ बातें.
शो की कुछ एक क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और उसके बाद विवाद काफ़ी बढ़ गया. बात अब एफ़आईआर और पुलिस की कार्रवाई तक पहुँच चुकी है.
इन्हीं सवालों पर द लेंस के इस एपिसोड में चर्चा की कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा ने. उनके साथ इस चर्चा में हिस्सा लिया व्लॉगर और कंटेंट क्रिएटर लखन रावत, बिहार के सूचना आयुक्त त्रिपुरारी शरण और स्टैंड अप कॉमेडियन संजय राजौरा और मुस्कान तनेजा ने.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)



