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यूक्रेन का दावा- रूस में घुसकर एक और पुल किया नष्ट, आख़िर क्या है मक़सद
- Author, एंड्रे रोडेन पॉल और जेम्स ग्रेगोरी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौक़ा है, जब विदेशी सैनिक रूस की ज़मीन पर पहुँच गए हैं. क़रीब दो सप्ताह से यूक्रेन की सेना रूस के कुर्स्क इलाक़े में मौजूद है.
यूक्रेन ने दावा किया है कि उसने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में रणनीतिक लिहाज़ से अहम एक और पुल को नष्ट कर दिया है. यूक्रेन की सेना ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में कुछ दिन पहले की घुसपैठ की थी.
यूक्रेनी सेना ने रविवार को पुल पर हमले का वीडियो भी जारी किया है.
बताया जा रहा है कि यह हमला ज़्वानोए में सेयम नदी के ऊपर किया गया था.
रूस ने फ़रवरी 2022 में यूक्रेन पर पर हमला शुरू किया था. हाल के समय में पूर्वी यूक्रेन के इलाक़ों पर अपना कब्ज़ा बढ़ाने में रूस धीरे-धीरे आगे बढ़ पा रहा है.
रूस को उस वक़्त झटका लगा, जब यूक्रेन की सेना उसके कुर्स्क क्षेत्र में घुस गई, जहां क़रीब दो सप्ताह से यूक्रेन अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है.
उसके बाद से रूस ने इस इलाक़े से अपने हज़ारों नागरिकों को बाहर निकाल लिया है.
रूस के लिए कितना बड़ा ख़तरा
यूक्रेनी वायु सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मायकोला ओलेशुक ने हमले का वीडियो जारी करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है, "एक और पुल नष्ट हो गया."
जनरल ओलेशुक के मुताबिक़, "यूक्रेनी वायु सेना के विमान के सटीक हवाई हमलों ने दुश्मन की सैन्य क्षमता को कमज़ोर किया है और इससे जंग पर व्यापक असर पड़ा है."
यूक्रेनी सेना के वीडियो में पुल के ऊपर धुएं का एक बड़ा गुबार दिखाई दे रहा है और इसका एक हिस्सा नष्ट हो गया है. हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह हमला कब हुआ.
हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि कुर्स्क में सैन्य घुसपैठ का मक़सद रूसी हमलों को रोकने के लिए एक 'बफ़र ज़ोन' का निर्माण करना था.
साल 2022 में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया था. उसके बाद से दोनों देशों के बीज लगातार जंग जारी है. इस जंग में क़रीब दो सप्ताह से यूक्रेन ने रूस के इलाक़ों में बड़ा हमला जारी रखा है.
इस सप्ताह की शुरुआत में यूक्रेन ने ग्लुश्कोवो शहर के पास सेयम नदी पर बने एक अन्य पुल को नष्ट कर दिया था.
उस पुल का इस्तेमाल रूस अपने सैनिकों के लिए रसद आपूर्ति के लिए करता था.
इससे पहले यूक्रेन के सैन्य विश्लेषकों ने इस क्षेत्र में तीन ऐसे पुलों की पहचान की थी, जिससे रूस अपने सैनिकों के लिए ज़रूरी सामान की आपूर्ति करता था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि विशेषज्ञों के मुताबिक़, दो पुल या तो नष्ट हो गए हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
मक़सद क्या है?
यूक्रेनी सैनिकों के रूस की सीमा के अंदर कुर्स्क क्षेत्र में घुसपैठ करने के क़रीब दो सप्ताह बाद यह स्पष्ट हो रहा है कि वो यहाँ रूकने की योजना बना रहे हैं.
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने शनिवार को कहा था कि उनके सैनिक कुर्स्क में आगे बढ़ते हुए अपनी स्थिति मज़बूत कर रहे हैं.
रविवार की शाम को अपने संबोधन में उन्होंने कहा, "कुर्स्क क्षेत्र में हमारा अभियान अब भी रूस, उसकी सेना, उसके रक्षा उद्योग और अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचा रहा है."
उन्होंने कहा कि "यह यूक्रेन के लिए महज़ बचाव से कहीं ज़्यादा है. इसका मक़सद जहाँ तक संभव हो सके रूस की युद्ध क्षमता को नष्ट करना और जवाबी कार्रवाई करना है."
ज़ेलेंस्की ने कहा है कि कुर्स्क में आक्रामक क्षेत्र पर एक बफ़र ज़ोन बनाना भी शामिल होगा ताकि यूक्रेन में आगे रूसी हमलों को रोका जा सके.
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के सलाहकार मिखाइलो पोडोल्यकने ज़ोर देकर कहा कि यूक्रेन रूस पर कब्ज़ा करने में दिलचस्पी नहीं रखता है.
उनके मुताबिक़ यूक्रेन का मक़सद रूस को बातचीत के लिए राज़ी करना है.
रूस ने इस घुसपैठ को एक उकसावे वाली कार्रवाई बताया है और इसका ‘उचित जवाब’ देने की कसम खाई है.
जैसे-जैसे यूक्रेन पश्चिमी रूस में आगे बढ़ रहा है, रूस की सेना भी यूक्रेन के पूर्व में समान रूप से आगे बढ़ रही है.
हाल के हफ़्तों में रूस की सेना ने यूक्रेन के कई गांवों पर अपना कब्ज़ा भी कर लिया है.
परमाणु संयंत्र को ख़तरा
यह ख़बर ऐसे समय में आई है, जब संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि रूसी कब्ज़े वाले यूक्रेन में ज़ापोरीज्जिया बिजली संयंत्र में परमाणु सुरक्षा के हालात बिगड़ रहे हैं.
इस संयंत्र की दीवारों के क़रीब ही ड्रोन हमला हुआ है.
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि वो इससे चिंतित हैं.
उन्होंने इस परमाणु संयंत्र की सुरक्षा के लिए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है.
आईएईए ने कहा है कि हमले का असर संयंत्र के ठीक बाहर सड़क पर हुआ है जो संयंत्र में ज़रूरी जल छिड़काव के लिए इस्तेमाल होने वाले तालाबों के क़रीब है.
यह एकमात्र बची हुई हाई-वोल्टेज लाइन से क़रीब सौ मीटर की दूरी पर है.
रूस यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में इस संयंत्र पर रूसी सेना ने कब्ज़ा कर लिया था और इस पर बार-बार हमले हुए हैं, जिसके लिए दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं.
पिछले सप्ताह भी इस संयंत्र के एक कूलिंग टावर में आग लगने के बाद यूक्रेन और रूस ने एक दूसरे पर आरोप लगाया था.
हालाँकि आईएईए ने यह नहीं बताया है कि शनिवार का हमला किसने किया. लेकिन ज़ापोरीज्जिया में तैनात टीम ने कहा है कि ऐसा लगता है कि यह विस्फोटक ले जा रहे एक ड्रोन की वजह से हुआ है.
एजेंसी ने एक बयान में कहा है, "संयंत्र से कुछ दूरी पर लगातार धमाके, भारी मशीन गन, राइफल और तोप की आवाजें सुनी गई हैं."
इस संयंत्र में दो साल से ज़्यादा समय से बिजली का उत्पादन नहीं हुआ है और इसके सभी 6 रिएक्टर अप्रैल महीने से बंद पड़े हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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