औरंगज़ेब की ज़िंदगी के आख़िरी दिनों की कहानी- विवेचना
मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब 1680 की शुरुआत में अपना मशहूर तख्त ए ताऊस दिल्ली में छोड़कर दक्षिण की तरफ बढ़ गए थे.
फिर वो वहां से कभी दिल्ली वापस नहीं लौटे.
उनके बारे में बताते हुए अपनी किताब अ शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ़ औरंगज़ेब में जगुनाथ सरकार लिखते हैं कि औरंगज़ेब अपने बुढ़ापे में अकेलेपन के शिकार हो गए थे.
किताब में लिखा है कि उनके सभी नज़दीकी साथी एक-एक कर इस दुनिया से चल बसे थे.
उनकी जवानी के सिर्फ़ एक साथी उनके वज़ीर असद खां ही जीवित थे.
मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब की ज़िंदगी के आखिरी दिनों में और क्या-क्या हुआ, इसी बारे में विवेचना में बता रहे हैं रेहान फ़ज़ल.
वीडियोः देवाशीष कुमार
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)



