ग़ज़ा: निहत्थे फ़लस्तीनियों पर फ़ायरिंग के चश्मदीदों ने क्या बताया
ग़ज़ा में अमेरिका और इसराइल की मदद से काम कर रही संस्था 'ग़ज़ा हम्यूमैनिटेरियन फ़ाउंडेशन' या जीएचएफ़ पहले दिन से ही विवादों में है.
इसके एड सेंटर्स पर बतौर सिक्यॉरिटी गार्ड काम कर चुके एक शख़्स ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने साथ काम करने वालों को राहत सामग्री का इंतज़ार कर रहे आम लोगों पर गोलियां चलाते देखा है.
जीएचएफ़ ने इस साल मई में काम शुरू किया था. यूएन का कहना है कि तब से इसके सेंटर्स के पास 400 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.
हाल ही में कई संस्थाओं ने कहा कि इसराइली सैनिकों ने ऐसे फ़लस्तीनियों पर भी आए दिन गोलियां चलाईं, जिनसे कोई ख़तरा नहीं था.
वहीं, जीएचएफ़ का कहना है कि ये सारे दावे एकदम झूठे हैं. इसराइल पत्रकारों को स्वतंत्र तौर पर ग़ज़ा नहीं जाने देता. ऐसे में बीबीसी संवाददाता लूसी विलियम्सन ने यरुशलम से ये रिपोर्ट भेजी है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित



