बिहार के ये बच्चे पढ़ना चाहते हैं, पर स्कूल जाने के लिए भी जान जोख़िम में डालनी पड़ती है

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बिहार के ये बच्चे पढ़ना चाहते हैं, पर स्कूल जाने के लिए भी जान जोख़िम में डालनी पड़ती है

मौजूदा वित्त वर्ष (2025-26) के बजट में बिहार सरकार ने शिक्षा के लिए सबसे ज़्यादा यानी 21.7 प्रतिशत (करीब 61 हज़ार करोड़ रुपए) का प्रावधान किया है.

लेकिन क्या इतने बड़े निवेश से ज़मीनी हालात बदल पाए हैं? क्या बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की गुणवत्ता बेहतर हुई है?

क्या सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की उपलब्धता और नतीजों में वाकई सुधार हो रहा है, या फिर आंकड़ों और घोषणाओं के पीछे अब भी वही पुरानी चुनौतियां छिपी हैं.

देखिए, शिक्षण संस्थाओं की असलियत बयान करती बीबीसी संवाददाता अभिनव गोयल की ये ग्राउंड रिपोर्ट.

शूट और एडिट: प्रभात कुमार

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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