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आतंक से पर्यटन तक: जॉर्जिया की पंकिसी घाटी ने फिर से कैसे लिखी अपनी कहानी?
- Author, एलोइस स्टार्क
लंबे अर्से से चरमपंथ को लेकर सुर्खियों में रही जॉर्जिया की पंकिसी घाटी अब पर्यटकों का अपने पहाड़ी रास्तों पर सूफ़ी रीति-रिवाजों और घर पर तैयार किस्ट फ़ूड के साथ स्वागत कर रही है.
एक गोल घेरे में पालथी मारकर बैठी महिलाएं अरबी और चेचेन भाषा में यहां कलमा पढ़ रही हैं. धीमी आवाज़ में वह एक दूसरे का साथ देती हैं. इनकी आवाज़ में विश्व शांति और ईश्वर की प्रार्थना होती है. जैसे-जैसे इनकी आवाज़ बढ़ती जाती है, ये सभी महिलाएं खड़ी होकर तालियां बजाने लगती हैं...'ला इलाहा इल्लल्लाह.'
उनकी संगीतबद्ध आवाज़ एक लय के साथ तेज़ होती जाती है और वो एक गोलाई में घूमने लगती हैं. एक बुज़ुर्ग महिला के माथे पर पसीने की बूंदे उभरने लगती हैं.
इसके बावजूद भी उनका घूमना जारी रहता है. चक्कर और कलमा की गति तेज़ और तेज़ होती जाती है, आवाज़ ऊँची और ऊँची होती जाती है, जो एक ध्यान मुद्रा में बदल जाती है. फिर कलमा बंद हो जाता है और महिलाएं एक दूसरे को गले लगा लेती हैं.
यह सूफ़ी प्रार्थना का एक तरीक़ा 'ज़िक्र' है. अरबी में इसका अर्थ 'स्मरण' है और जो आत्मा को अल्लाह के क़रीब लाने के लिए होता है.
जॉर्जिया की पंकिसी घाटी का यह छोटा सा गाँव, काकेशस में एकमात्र स्थान है जहाँ महिलाएं मस्जिद में पुरुषों की तरह ज़िक्र करती हैं. अमेरिका, यूरोप और मध्यपूर्व से आए पर्यटकों का समूह एक कमरे के कोने में बैठकर इसे देखता रहता है.
दो दशक पहले बहुत कम पर्यटक पंकिसी घाटी में क़दम रखने की हिम्मत जुटा पाते थे.
काकेशस पर्वतों के बीच बसी यह हरी-भरी घाटी किस्टों (चेचेन मूल के मुस्लिम समुदाय) का घर है लेकिन यह इतना कुख्यात हो गया था जिससे पीछा छुड़ाना बहुत मुश्किल था.
समाचारों में इस क्षेत्र को इतना "अराजक" करार दे दिया गया था कि पर्यटकों को यहां यात्रा न करने की सलाह दी जाती थी.
आज, स्थानीय परिवार पर्यटकों की मेज़बानी और उन्हें असली पंकिसी घाटी दिखाकर यह छवि तोड़ रहे हैं.
वो डंपलिंग बनाते हैं और शांंति और समर्पण का गीत गाते हैं.
यहां ओसामा बिन लादेन के छिपने की थी अफ़वाह
पंकिसी घाटी की बदनामी 2000 के दशक से शुरू हुई, जब रूस में युद्ध से भाग रहे चेचेन्यों के लिए यह शरणस्थली बनी.
किस्ट चेचेन बोली बोलते थे और यह घाटी चेचेन्या की सीमा के ठीक पार स्थित है. जो इसे शरणार्थी परिवारों के लिए एक मुफ़ीद जगह बनाती है.
शरणार्थियों में नागरिकों के अलावा कुछ उग्रवादी और पूर्व सैनिक भी थे. इसके कारण बिना किसी आधार के यह अफ़वाह फैल गई कि अलकायदा के सदस्य यहां तक कि ओसामा बिन लादेन भी घाटी में है.
रूस और अमेरिका के दबाव में जॉर्जियाई सरकार ने इस क्षेत्र में आतंकवाद-रोधी अभियान शुरू किए.
हज़ारों शरणार्थियों के आने से स्थानीय संसाधनों पर काफी दबाव पड़ा और उस समय की सरकार स्थानीय समुदाय की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का हल नहीं कर पाई.
जॉर्जियाई शिक्षाविदों माइया बारकाया और बारबरे जनेलिद्ज़े ने साल 2018 के एक शोध पत्र में लिखा, "केवल आतंकवाद-रोधी विशेष अभियानों के माध्यम से ही राज्य ने निवासियों को अपनी मौजूदगी का अहसास कराया."
"पंकिसी संकट" अंततः ख़त्म हो गया और चेचेन शरणार्थी घाटी छोड़कर मध्य और पश्चिमी यूरोप चले गए. लेकिन सालों तक आर्थिक और सामाजिक उपेक्षा के कारण 2010 के दशक में आईएसआईएस के लिए दरवाजे़ खुल गए.
आईएसआईएस ने प्रचार के माध्यम से दुनिया भर में हाशिए पर पड़े युवाओं को आकर्षित करना शुरू किया.
साल 2010 और 2016 के बीच करीब 50 से 200 लोग पंकिसी घाटी से सीरिया गए और यह सभी आईएसआईएस के संदेशों से आकर्षित थे.
इसमें शीर्ष आईएसआईएस कमांडर के रूप में अबू उमर अल-शिशानी बहुत कुख्यात हुआ, इसके चेचेन्या से होने ने पंकिसी में वैश्विक मीडिया की रुचि फिर से जगा दी– इसे एक बार फिर से आतंकवादी केंद्र के रूप में चित्रित किया जाने लगा.
पंकिसी में अपराध दर बहुत कम है फिर भी इसकी छवि आज भी बहुत ख़तरनाक बनी हुई है.
डेनिश इमिग्रेशन मिनिस्ट्री ने 2020 की एक रिपोर्ट में उल्लेख किया, "पंकिसी में अपराध दर अधिक नहीं है. यह क्षेत्र बहुत शांत है."
स्थानीय निवासी अक्सर यह मज़ाक करते हैं कि पुलिस को यहां चाय पीने के अलावा पूरे दिन कुछ नहीं करना पड़ता है.
हरी पहाड़ियों से लेकर नीले आकाश तक
दुइसी में पर्यटक गाइड के रूप में काम करने वाली फ़ातिमा कहती हैं, "जब मैंने त्बिलिसी विश्वविद्यालय में पढ़ना शुरू किया, तो मेरे सहपाठियों के मन में अभी भी पंकिसी के असुरक्षित होने के बारे में कई धारणाएं थीं."
"मुझे उन्हें समझाना पड़ा कि वह समय अब बहुत पीछे छूट चुका है. यह एक बहुत शांतिपूर्ण जगह है और यही मुझे पसंद है."
दुइसी और जोकोलो गाँवों के सांस्कृतिक पैदल भ्रमण के दौरान फ़ातिमा मुझे एक खड़ी पगडंडी पर ले जाती है, जो एक जीर्ण-शीर्ण पुराने वॉच टावर तक जाती है, यहां से एक बहुत ही व्यापक दृश्य दिखाई देता है.
करीब तीन किलोमीटर चौड़ी घनी हरी घाटी एक नदी के किनारे बसे गांवों की एक श्रृंखला समेटे हुए है.
जटिल नक्काशीदार लकड़ी के घरों के सामने गायें इंतज़ार कर रही हैं और ऊपरी मंज़िलों पर एक कतार में बनी खिड़कियों से बसंत की कोमल धूप अंदर आ रही है.
गांवों के आसपास के खेतों में भेड़ों के पदचिह्न दिखाई देते हैं जो घने जंगलों से ढकी पहाड़ियों पर चढ़ते हैं.
उत्तर की तरफ, मैं काकेशस पर्वतों की बर्फ़ से ढकी चोटियाँ देख रहा हूँ.
दक्षिण में आंखों से ओझल सूरज की रोशनी से नहाए अंगूर के बाग हैं, जो जॉर्जिया का सबसे बड़ा शराब उत्पादन करने वाला क्षेत्र है.
फ़ातिमा कहती हैं, "यहाँ के लोग बाहरी गतिविधियों को बहुत पसंद करते हैं. गर्मियों में हम पहाड़ पर पिकनिक करने जाते हैं या पहाड़ियों में घुड़सवारी करते हैं. मुझे नहीं लगता कि ऐसी जगह से आने के बाद मैं कभी शहर में रह सकती हूँ."
मैं समझ सकता था कि क्यों? पंकिसी घाटी बहुत ही मनोरम लगती है. आख़िरी गांव के बाद यहां सड़क ख़त्म हो जाती है और यहां की पर्वतीय श्रृंखला जॉर्जिया की सीमा के आख़िरी हिस्से को चिह्नित करती है.
मुझे लगता है जैसे हरी पहाड़ियों और नीले आकाश के एक आरामदायक आवरण में लिपटा हुआ मैं दुनिया के किनारे पर हूँ. स्थानीय निवासियों का दोस्ताना व्यवहार इस आराम की भावना को और बढ़ा देता है.
बच्चे दौड़कर आते हैं और शुद्ध अंग्रेज़ी में पूछते हैं कि मैं कहाँ से हूँ, और अपनी साइकिलों पर करतब दिखाते हैं.
बड़े लोग मुझे हर्बल चाय पिलाते हैं और जब उन्हें लगता है कि मैं रास्ता भटक गया हूं तो वह इशारों से रास्ता भी बताते हैं.
सूफ़ी परंपरा की वाहक पंकिसी
जॉर्जिया में ट्रैवल एजेंसी वंडर लश चलाने वाली एमिली लश कहती हैं, "जॉर्जिया आकर अगर आप यहां के प्रसिद्ध मेहमाननवाज़ी का अनुभव करना चाहते हैं तो पंकिसी उन जगहों में से एक है. जहां आप अभी भी इसे अनुभव कर सकते हैं. संस्कृति, परंपरा और व्यंजनों के मामले में इसकी जैसी कोई जगह नहीं है."
सूफ़ी मुसलमानों के रूप में किस्ट समुदाय की परंपराएँ जॉर्जिया की मुख्य रूप से रूढ़िवादी आबादी से अलग हैं. आध्यात्मिक संगीत और अनुष्ठान रोज़मर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं.
घाटी का भोजन और भाषा भी विशिष्ट है. जो 19वीं सदी की शुरुआत में पहाड़ों के पार से घाटी में बसे चेचेन प्रवासियों द्वारा लाए गए थे.
घाटी की इस अनूठी संस्कृति के बावजूद भी यहाँ पर्यटकों को आकर्षित करना आसान नहीं रहा है.
इसका कारण इसकी दूरी नहीं है. पंकिसी घाटी त्बिलिसी से ढाई घंटे की दूरी पर पूर्वोत्तर में स्थित है और अखमेता शहर से इसकी दूरी 20 किलोमीटर से भी कम है, जो अपने शराब उत्पादन के कारण कई पर्यटकों को आकर्षित करता है.
2013 में खोला गया था पहला गेस्ट हाउस
नज़ी कुराशविली पहली शख्स थीं जिन्होंने पर्यटकों को कुछ अतिरिक्त किलोमीटर की यात्रा करके पंकिसी घाटी देखने के लिए प्रोत्साहित किया.
उन्होंने 2013 में क्षेत्र का पहला गेस्ट हाउस "नज़ी का गेस्टहाउस" खोला.
इसके बाद उन्होंने जॉर्जियाई पर्यटन मंत्रालय को पंकिसी घाटी के बारे में जानकारी वेबसाइट पर देने के लिए भी मनाया और इलाके को दिखाने के लिए विदेशी राजदूतों को भी गेस्ट हाउस में आमंत्रित किया.
उन्होंने दूसरों को पर्यटन व्यवसाय शुरू करने में मदद करने के लिए साल 2018 में पंकिसी घाटी पर्यटन और विकास संघ की स्थापना की. इसके बाद धीरे-धीरे इस मनोरम घाटी की ख़बर फैलने लगी.
पंकिसी को 2020 में जॉर्जिया के लोनली प्लैनेट, आर्मेनिया और अज़रबैजान गाइडबुक में शामिल किया गया और इंटरपिड ट्रैवल जैसी पर्यटन कंपनियों ने इसे अपनी यात्रा कार्यक्रमों में शामिल करना शुरू किया.
आज हर साल सैकड़ों पर्यटक पंकिसी आते हैं और पर्यटकों के आने पर उनके लिए यहां बहुत कुछ इंतज़ार कर रहा होता है.
पर्यटक यहां घुड़सवारी या पहाड़ों में पैदल यात्राएं कर सकते हैं और पुराने घरों, ऐतिहासिक चर्चों और मस्जिदों का दौरा कर सकते हैं.
वह यहां किस्ट व्यंजनों में खाना बनाने की कक्षाओं में शामिल हो सकते हैं.
दुइसी गाँव में एक छोटा एथनोग्राफ़िक (सामाजिक और व्यवहार विज्ञान) म्यूज़ियम है और यहां साप्ताहिक सूफ़ी ज़िक्र समारोह आयोजित होता है.
यहां पास में ही बटसारा नेचर रिज़र्व है. यह दुनिया के सबसे बड़े और प्राचीन जंगलों में से एक है.
लश कहती हैं, "पर्यटन ने घाटी को लेकर फैली नकारात्मक सोच को ख़त्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पर्यटन ने लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिया है."
खातूना मार्गोशविली घाटी में बढ़ते अवसरों का लाभ उठा रही हैं. उन्होंने विदेश में कई सालों तक काम करके पर्याप्त धन इसलिए बचाया जिससे वह अपने घर वापस लौटकर घाटी में एक गेस्ट हाउस खोल सकें.
वह कहती हैं, "मुझे लोगों की मेज़बानी करना पसंद है, कुछ लोग बस बगीचे में रुकते हैं. अन्य लोग घूमना चाहते हैं और बहुत से लोग खाना बनाना सीखना चाहते हैं."
किस्ट संस्कृति की तरह भोजन भी मिश्रित है
किस्ट व्यंजन इसकी संस्कृति की तरह ही मिश्रित है. इस पर चेचेन और जॉर्जियाई प्रभाव है.
इसमें घाटी में सीधे मिलने वाली सामग्री शामिल होती है. इनमें घर पर उगाई गई सब्ज़ियां, स्थानीय पनीर और शहद शामिल हैं.
यहां का सबसे लोकप्रिय व्यंजन झिझिग गलनाश है. इसका आटा पास्ता जैसा होता है जो मुंह में घुलने वाले मेमने के मांस और पिसे हुए लहसुन के साथ परोसा जाता है.
एक और पसंदीदा व्यंजन खिनकाली है. यह एक पारंपरिक जॉर्जियाई डंपलिंग है.
नज़ी के गेस्ट हाउस में हर रात मेज़ पर किस्ट व्यंजनों और रोज़हिप से बनी स्थानीय बियर प्रचुर मात्रा में रखी होती है.
रात का भोजन एक सामूहिक आयोजन है. मेहमान एक लंबी मेज़ के चारों ओर बैठते हैं और दिन भर की रोमांचक कहानियाँ साझा करते हैं.
इनमें पुराने जंगलों में पैदल यात्राएँ, घुड़सवारी, सांस्कृतिक भ्रमण के किस्से होते हैं.
कई पर्यटक यहां अपने रुकने की योजना बढ़ा देते हैं, जिससे वह घाटी में थोड़ा और समय बिता सकें.
वो घुड़सवारी करते, डंपलिंग खाते और रोज़हिप बियर पीते हुए दिन बिताते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित