ज़ोहरान ममदानी कौन हैं जो न्यूयॉर्क मेयर का चुनाव जीते, ट्रंप के लिए क्या बोले

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इमेज कैप्शन, ज़ोहरान ममदानी ने न्यूयार्क मेयर का चुनाव जीत लिया है

डेमोक्रेटिक कैंडिडेट ज़ोहरान ममदानी न्यूयॉर्क का मेयर चुनाव जीत गए हैं.

सीबीएस के मुताबिक, 34 साल के ममदानी 100 साल से भी अधिक समय में न्यूयॉर्क के सबसे युवा और पहले मुसलमान और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर होंगे.

ममदानी की जीत तय होने के साथ ही उनके समर्थक खुशी से उछल गए और जश्न मनाने लगे.

बीबीसी संवाददाता मैडलिन हलपर्ट के मुताबिक लोग ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहे थे, "ज़ोहरान, ज़ोरहान, ज़ोहरान".

वहाँ मौजूद तकरीबन हर शख्स चिल्ला रहा था और लोग एक-दूसरे को बधाइयां दे रहे थे.

मेयर पद के लिए मुख्य मुक़ाबला ज़ोहरान ममदानी और एंड्रयू कुओमो के बीच था. ममदानी से डेमोक्रेट प्राइमरी में हारने के बाद कुओमो इंडिपेंडेंट उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे.

वहीं, रिपब्लिकन पार्टी की ओर से कर्टिस स्लिवा उम्मीदवार थे.

स्लिवा ने अपनी हार स्वीकर कर ली है और ममदानी को शुभकामनाएं दी हैं.

उन्होंने कहा, "अब हमारे पास निर्वाचित मेयर हैं. मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं. क्योंकि वह अच्छा करेंगे, तो हम सब अच्छा करेंगे."

जीत के बाद क्या बोले ज़ोहरान ममदानी

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इमेज कैप्शन, ज़ोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के 100 साल के इतिहास में पहले दक्षिण एशियाई मूल के मेयर भी होंगे.
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जीत के बाद ममदानी ने कैंपेन पार्टी में हिस्सा लिया. उन्होंने अपने माता-पिता और पत्नी का शुक्रिया कहा.

यहां उन्होंने मंच से कहा, "मेरे दोस्तों हमने एक राजनीतिक वंशवाद को उखाड़ फेंका है."

उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी एंड्रयू कुओमो के लिए कहा, "मैं एंड्रयू कुओमो को सिर्फ़ निजी जीवन में शुभकामनाएं देता हूं. लेकिन आज की रात आख़िरी बार मैं उनका नाम ले रहा हूं."

ममदानी ने कहा कि मतदाताओं ने बदलाव के लिए जनमत दिया है. इसलिए जनमत दिया है कि इस शहर में जीवनयापन संभव हो.

ममदानी ने अपने माता-पिता के लिए कहा, "आज मैं जैसा हूं वह आप लोगों ने मुझे बनाया है. मुझे आपका बेटा होने पर बहुत गर्व है."

अपनी पत्नी रमा दुवाजी के लिए ममदानी बोले, "इस पल और हर पल, अपने साथ मैं सिर्फ़ तुम्हें चाहता हूं."

ममदानी ने आधे घंटे लंबे भाषण में ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग उन्हें कामयाब बना सकते हैं वही लोग उन्हें हरा भी सकते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले ज़ोहरान ममदानी को वोट न करने की अपील की थी.

उन्होंने फ़्रीस बस सेवा, यूनिवर्सल चाइल्डकेयर और बढ़ती महंगाई काबू करने समेत अपने सभी चुनावी वादों को पूरा करने की बात कही.

कौन हैं ज़ोहरान ममदानी?

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ज़ोहरान क्वामे ममदानी का जन्म साल 1991 में युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था. ममदानी के पिता ने उन्हें एक क्रांतिकारी और घाना के पहले प्रधानमंत्री क्वामे एन्क्रूमाह के नाम पर मिडिल नेम क्वामे दिया था.

ममदानी मशहूर भारतीय-अमेरिकी फ़िल्म निर्देशक मीरा नायर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जाने-माने प्रोफे़सर महमूद ममदानी के बेटे हैं.

कंपाला में उन्होंने अपने शुरुआती दिन बिताए और फिर पांच साल की उम्र में दक्षिण अफ़्रीका आ गए.

ममदानी के भारतीय मूल के पिता महमूद ममदानी केपटाउन विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर थे. केपटाउन में ही 1848 में शुरू हुए दक्षिण अफ़्रीका के सबसे पुराने स्कूल सेंट जॉर्ज ग्रामर में उन्होंने शुरुआती पढ़ाई-लिखाई की.

सात साल की उम्र में वे न्यूयॉर्क आ गए. उन्होंने ब्रॉन्क्स हाई स्कूल ऑफ़ साइंस से पढ़ाई की.

साल 2014 में उन्होंने बोडन कॉलेज से 'बैचलर इन अफ़्रीकन स्टडीज़' में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.

कुछ साल बाद 2018 में, ममदानी एक अमेरिकी नागरिक बन गए.

ममदानी का राजनीतिक सफ़र

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ज़ोहरान ममदानी ने सक्रिय राजनीति में क़दम रखने से पहले एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम किया.

राजनीति में आने से पहले ज़ोहरान ममदानी क्वींस, न्यूयॉर्क में बतौर फॉरक्लोज़र काउंसलर (घर ज़ब्ती मामलों में सलाहकार) का काम करते थे. ममदानी कम आय वाले परिवारों की मदद करते थे जो आर्थिक तंगी के कारण अपने घर खोने की कगार पर थे.

इस काम के दौरान उन्होंने देखा कि जिन परिवारों की मदद वह कर रहे थे, उनकी दिक्कतें केवल आर्थिक नहीं बल्कि नीतिगत भी थीं. इसी अनुभव ने उन्हें सक्रिय राजनीति की ओर प्रेरित किया ताकि वह नीतियां बदल सकें जो आम लोगों को प्रभावित करती हैं.

इसके बाद साल 2020 में उन्होंने पहला चुनाव लड़ा. उन्होंने न्यूयॉर्क असेंबली के 36वें डिस्ट्रिक्ट (एस्टोरिया, क्वींस) से डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा.

ज़ोहरान ममदानी पहली बार में ही जीत गए और न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में पहले दक्षिण एशियाई और पहले सोशलिस्ट प्रतिनिधि बने.

अब डेमोक्रेट ममदानी ने न्यूयॉर्क मेयर प्राइमरी में पूर्व गवर्नर को पीछे छोड़कर सभी को चौंका दिया है.

राज्य के पूर्व गवर्नर 67 वर्षीय कुओमो, यौन उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में 2021 में पद से इस्तीफ़ा देने के बाद राजनीतिक वापसी का प्रयास कर रहे थे.

जीत के बाद ममदानी ने कहा, "आज रात हमने इतिहास लिखा है. जैसा कि नेल्सन मंडेला ने कहा था- 'जब तक यह पूरा नहीं हो जाता, यह हमेशा असंभव लगता है.' मेरे दोस्तों, हमने इसे कर दिखाया. मैं डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के रूप में आपकी न्यूयॉर्क सिटी का मेयर बनूंगा."

मोदी और इसराइल की आलोचना

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ज़ोहरान ममदानी इसराइल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की खुलकर आलोचना कर चुके हैं.

मई, 2025 में एक कार्यक्रम में उनसे एक सवाल पूछा गया कि अगर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैडिसन स्क्वायर गार्डन में रैली करते हैं और फिर न्यूयॉर्क के मेयर के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करना चाहते हैं, तो क्या वह उसमें शामिल होंगे?

ममदानी ने 'नहीं' में जवाब देते हुए कहा था, "मेरे पिता और उनका परिवार गुजरात से है. नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मुसलमानों के बड़े पैमाने पर क़त्लेआम को अंजाम देने में मदद की, इतनी बड़ी हिंसा हुई कि अब तो ऐसा लगता है जैसे गुजराती मुसलमान हैं ही नहीं. हमें मोदी को उसी नज़र से देखना चाहिए जैसे हम बिन्यामिन नेतन्याहू को देखते हैं. वह एक युद्ध अपराधी हैं."

इस बयान के बाद न्यूयॉर्क के कुछ इंडो-अमेरिकन और हिंदू, सिख समुदायों ने इसे विभाजनकारी और घृणास्पद बताया था. साथ ही इन लोगों ने ममदानी से माफ़ी की मांग की थी.

यहां ये बताना ज़रूरी है कि गुजरात दंगों के सभी आरोपों से सुप्रीम कोर्ट ने जून 2022 में नरेन्द्र मोदी को मुक्त कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गठित विशेष जाँच दल की उस रिपोर्ट को शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया जिसमें उन्हें दोषमुक्त बताया गया था.

ज़ोहरान ममदानी का फ़लस्तीन के समर्थन और इसराइल की आलोचना को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के ज़्यादातर नेताओं से मतभेद रहा है.

एक अमेरिकी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इसराइल के यहूदी देश के रूप में अस्तित्व का विरोध किया था.

उन्होंने कहा, "मैं किसी ऐसे देश का समर्थन नहीं कर सकता जहां नागरिकता धर्म या किसी और आधार पर बांटी जाती हो. हर देश में समानता होनी चाहिए, यही मेरा विश्वास है."

ममदानी ने कथित तौर पर इसराइल के लिए उकसावे वाले काफ़ी विवादित 'ग्लोबलाइज़ द इंतिफ़ादा' नारे से दूरी नहीं बनाई. उन्होंने इसे फ़लस्तीनी लोगों की मानवाधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बताया- वह इसे हिंसक नहीं, बल्कि समानता की आवाज़ मानते हैं.

मुस्लिम पहचान पर हुए हमले

ज़ोहरान ममदानी अपनी मां मीरा नायर के साथ

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प्राइमरी चुनाव जीतने के बाद ममदानी की मुस्लिम पहचान पर हमले बढ़े. उनपर खुलेआम नस्ली हमले हुए.रिपब्लिकन सांसद एंडी ओगल्स ने तो जस्टिस डिपार्टमेंट को पत्र लिखकर ज़ोहरान ममदानी की नागरिकता रद्द कर वापस भेजने की मांग कर दी थी.

ममदानी धार्मिक पहचान से जुड़े हमलों का खुलकर जवाब देते रहे हैं. उन्हें कैंपेन के दौरान हिंसक हमले की भी धमकियां मिलती रहीं. कई बार तो ममदानी ने अपने कैंपेन में उन धमकियों की रिकॉर्डिंग भी सुनाई थी.

इस बारे में ज़ोहरान ममदानी से एमएसएनबीसी ने पूछा कि आपको वापस भेजने की मांग हो रही है. आप पर इस्लामोफोबिक हमले हो रहे हैं. इन हमलों को आपके परिवार में कैसे देखा जाता है? इसके जवाब में ममदानी ने कहा, ''यह बहुत ही मुश्किल है. ऐसा आए दिन हो रहा है. मेरे नाम और आस्था के आधार पर नियमित रूप से हमले हो रहे हैं. इससे जूझना बहुत मुश्किल है. मेरी जीत यह बताने का मौक़ा है कि एक मुसलमान होना किसी दूसरे धर्म के अनुयायी होने जैसा ही है.''

साउथ कैरलाइना से रिपब्लिकन रीप्रेजेंटेटिव नैंसी मैक ने ईद के मौक़े पर ज़ोहरान ममदानी के कुर्ते पायजामे वाली तस्वीर शेयर करते हुए 25 जून को लिखा था, ''9/11 के बाद हमने कहा था- हम कभी नहीं भूलेंगे. मुझे लगता है कि हम भूल गए. यह बहुत ही दुखद है.''

9/11 का हमला जब हुआ था तो ज़ोहरान ममदानी नौ साल के थे और मैनहटन में रह रहे थे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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