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सुनीता विलियम्स नौ महीने बाद अंतरिक्ष से लौटीं लेकिन पृथ्वी पर अब कैसी चुनौती
सुनीता विलियम्स जब अंतरिक्ष में थीं तो पिछले साल नवंबर में उनकी सेहत को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें लिखी जा रही थीं.
इन अफ़वाहों के बीच सुनीता विलियम्स ने ख़ुद ही 12 नवंबर को न्यू इंग्लैंड स्पोर्ट्स नेटवर्क के साथ इंटरव्यू में कहा था, ''ऐसी अफ़वाहें हैं कि मेरा वजन कम हो रहा है. लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है. मैं बिल्कुल ठीक हूँ."
दरअसल, न्यूयॉर्क पोस्ट ने नवंबर के पहले हफ़्ते में नासा के एक गुमनाम अधिकारी के हवाले से कहा था कि सुनीता विलियम्स का वजन कम हो रहा है. न्यूयॉर्क पोस्ट ने कहा था कि सुनीता पर्याप्त कैलरी नहीं ले पा रही हैं, इसलिए उनका वजन कम हो रहा है.
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट पर स्पेस एजेंसी नासा के चीफ़ हेल्थ और मेडिकल ऑफिसर डॉ जेम्स डी पोल्क ने कहा था, ''यह सही नहीं है. मैं सुनीता को पिछले 20 सालों से जानता हूँ और ये बात दावे के साथ कह सकता हूँ कि सुनीता पहले की तरह ही दिख रही हैं. उनकी सेहत बिल्कुल अच्छी है.''
सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर महज आठ दिनों के मिशन पर गए थे लेकिन तकनीकी समस्या के कारण यह मिशन नौ महीने तक फँसा रहा. यानी सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर अंतरिक्ष में 286 दिनों तक रहे.
सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर दोनों नासा के चर्चित अंतरिक्ष यात्री हैं. नासा के मुताबिक़ मंगलवार को पृथ्वी पर लौटने से पहले इन्होंने पृथ्वी की 4,500 बार परिक्रमा की थी और 17,500 मील प्रति घंटा की गति से 12 करोड़ मील की यात्रा की.
लेकिन लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड रूसी अंतरिक्ष यात्री वलेरी पोल्याकोव के नाम है. न्यू मेक्सिको म्यूजिअम ऑफ स्पेस हिस्ट्री के अनुसार, वलेरी ने अंतरिक्ष में 437 दिन, 17 घंटे और 38 मिनट गुज़ारे थे. उन्होंने इस दौरान पृथ्वी की 7,075 बार परिक्रमा की थी.
वलेरी पोल्याकोव ने मॉस्को इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एंड बायोलॉजिकल प्रॉब्लम्स में एस्ट्रोनॉटिकल मेडिसिन की पढ़ाई की थी. अंतरिक्ष में मानव शरीर पर कैसा प्रभाव पड़ता है, उसकी स्टडी के लिए पोल्याकोव को काफ़ी अहम माना जाता है.
माइक्रोग्रेविटी का असर
62 साल के विलमोर और 59 साल की विलियम्स ने कहा है कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से वे ख़ुश हैं. दोनों नेवी के रिटायर्ड कैप्टन हैं और इनके पास अंतरिक्ष का विशाल अनुभव है.
सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने भले ही अंतरिक्ष से पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी कर ली है, लेकिन अभी सामान्य जीवन नहीं जी पाएंगे. अंतरिक्ष से वापसी के बाद एक मुकम्मल रिकवरी प्रक्रिया से गुज़रना होता है. दोनों को कैप्सुल से सीधे स्ट्रैचर पर लाया गया और मेडिकल निगरानी में भेज दिया गया था.
यह एक रूटीन प्रक्रिया है क्योंकि माइक्रोग्रेविटी में मांसपेशियां कमज़ोर होने लगती हैं, शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और शरीर में फ्लूड शिफ़्ट होने लगते हैं.
माइक्रोग्रेविटी वैसी स्थिति है, जब कोई इंसान या वस्तु भारहीन हो जाती है. अंतरिक्ष में चूंकि गुरुत्वाकर्षण काम नहीं करता है, इसलिए अंतरिक्ष यात्री भारहीन हो जाते हैं.
क्या असर पड़ता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने का असर स्वास्थ्य पर सीधा पड़ता है. अंतरिक्ष में महीनों रहने से इंसान के शरीर और मनोविज्ञान में बदलाव भी आते हैं.
सबसे बड़ा बदलाव तब आता है, जब अंतरिक्षयात्री माइक्रोग्रेविटी में होते हैं. इस स्थिति में अंतरिक्षयात्री स्पेसक्राफ़्ट के भीतर या बाहर तैरने लगते हैं. यानी हवा में लटके दिखते हैं.
इस दौरान मांसपेशियां कमज़ोर होने लगती हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल नहीं होता है. आप ऐसी स्थिति में कोई एक्सरसाइज उपकरण का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते हैं.
नासा का कहना है कि हड्डियां भी कमज़ोर पड़ने लगती हैं. हड्डियां शरीर के भार को संभालती हैं या सहारा देती हैं, लेकिन अंतरिक्ष में बिना पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के हर महीने हड्डियां औसत एक प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत तक मिनरल डेनसिटी खो देती हैं.
इसके अलावा उचित खान-पान और एक्सरसाइज के बिना धरती की तुलना में माइक्रोग्रेविटी में अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशियां ज़्यादा पतली होने लगती हैं. नासा का यह भी कहना है कि माइक्रोग्रेविटी में ख़ून और सेरेब्रोस्पााइनल फ्लूड नीचे से ऊपर शिफ्ट होने लगते हैं. ऐसे में आँख और मस्तिष्क के आकार में बदलाव की आशंका प्रबल रहती है.
डीहाइड्रेशन या हड्डियों से कैल्सियम निकलने के कारण किडनी में स्टोन का ख़तरा भी रहता है. लंबे समय तक माइक्रोग्रेविटी में रहने के बाद पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के साथ ताल-मेल बैठाना बहुत मुश्किल काम होता है.
ऐसे में अंतरिक्षयात्रियों के पृथ्वी पर आते ही मेडिकल निगरानी में रखा जाता है. माइक्रोग्रेविटी से ग्रेविटी में शरीर का संतुलन बनाना और उसके हिसाब से व्यवहार करना मुश्किल इम्तहान होता है.
इसके लिए सीधा चलना, सीधा खड़ा होना और शरीर का संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना हर दिन करना होता है.
रेडिएशन का असर
इसके अलावा, अंतरिक्ष का रेडिएशन पृथ्वी के रेडिएशन से अलग होता है. नासा का कहना है कि पृथ्वी मैग्नैटिक फील्ड से घिरी है, जिसे मैग्नेटोस्फेयर कहा जाता है और लोगों को अंतरिक्ष के हानिकारक रेडिएशन से सुरक्षा मिलती है.
लेकिन जब कोई व्यक्ति बहुत ऊंचाई पर होता है तो रेडिएशन का ख़तरा ज़्यादा बढ़ जाता है. लंबे समय तक इस स्थिति में रहने के कारण अंतरिक्षयात्री के रेडिएशन से पीड़ित होने का ख़तरा बढ़ जाता है. ऐसे में कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है और सेंट्रल नर्वस सिस्टम प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है.
नासा की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में अंतरिक्ष यात्रियों को छह महीने रहने के दौरान औसत 80 से 160 मिलिसिवर्ट्स रेडिएशन का सामना करना पड़ता है.
हालांकि रेडिएशन अलग तरह का होता है. एक मिलिसिवर्ट्स स्पेस रेडिएशन तीन चेस्ट एक्सरे के बराबर होता है. इसकी तुलना में पृथ्वी पर एक व्यक्ति हर साल औसत दो मिलिसिवर्ट्स रेडिएशन का ही सामना करता है.
नासा का कहना है कि इंटरनेशनल स्पेस सेंटर के लिए क्रू का चुनाव बहुत ही सावधानी से किया जाता है. उनकी ट्रेनिंग भी ऐसी होती है कि अंतरिक्ष में जाने के बाद मिशन को कम से कम छह महीने या उससे ज़्यादा समय तक हैंडल कर सकें. अंतरिक्ष में रहने के दौरान व्यवहार में बदलाव, थकान, तनाव और नींद नहीं आना सामान्य बात है.
लटकता रहा मिशन
अंतरिक्ष की गतिविधियों और उससे जुड़े रिसर्च पर केंद्रित अमेरिकी एजेंसी नासा (नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर भारतीय समयानुसार, तड़के साढ़े तीन बजे पृथ्वी पर आ गए.
मंगलवार शाम (स्थानीय समयानुसार) मेक्सिको की खाड़ी में सुनीता और बुच को लेकर अंतरिक्ष यान पहुँचा.
सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर नासा के निक हेग और रूसी अंतरिक्ष यात्री एलेकसांद्र गोर्बुनोव के साथ लौटे हैं. ये दोनों स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल के क्रू-9 के साथ थे. मंगलवार सुबह जब कैप्सूल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर अलग हुआ तो निक हेग ने कहा- क्रू-9 वापस घर आ रहा है.
सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर छह जून को एक टेस्ट फ्लाइट बोइंग स्टारलाइनर स्पेसक्राफ़्ट से अंतरिक्ष में पहुँचे थे लेकिन इसमें तकनीकी ख़राबी आ जाने कारण यह मिशन लटकता गया.
नासा ने आख़िरकार फ़ैसला किया कि इस क्राफ्ट से अंतरिक्ष यात्रियों का वापस लौटना सुरक्षित नहीं है. इसके बाद नासा ने स्पेसएक्स को यह काम सौंपा जो 2020 से अंतरिक्ष में अपने क्रू को भेज रहा है. स्टारलाइनर ख़ाली वापस लौटा था लेकिन इसके भविष्य को लेकर अब भी अनिश्चितता है.
यह मिशन विवादों में घिर गया था, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सलाहकार एलन मस्क जो कि स्पेसएक्स के मालिक भी हैं, ने दावा किया था कि दोनों अंतरिक्षयात्री पहले ही वापस आ गए होते लेकिन बाइडन प्रशासन के इनकार के कारण देरी हुई. हालांकि विलमोर और विलियम्स ने कहा था कि उन्हें पहले वापस आने की योजना के बारे में कुछ पता नहीं था.
स्टारलाइनर में जब तकनीकी दिक़्क़तें आईं तो नासा ने कई अन्य संभावित विकल्पों पर विचार किया था. नासा के सहायक प्रशासक केन बोवरसोक्स ने इस महीने की शुरुआत में प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि एक अन्य कैप्सूल भेजने पर विचार किया गया था.
रविवार को सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की जगह स्पेस स्टेशन में चार अन्य अंतरिक्ष यात्रियों ने ले ली थी. इनके पहुँचने के बाद ही क्रू-9 की वापसी हो पाई. नासा स्पेस स्टेशन में अंतरिक्ष यात्रियों की अदला-बदली करता रहता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित