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क्या अपने साझीदारों का भरोसा खो रहे हैं ट्रंप?- द लेंस
दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति चर्चा में है.
बीते हफ़्ते ही उन्होंने ग़ज़ा में संघर्ष को ख़त्म करने के लिए 20 पॉइंट का प्रस्ताव रखा. कई देशों ने उनकी इस कोशिश का स्वागत भी किया.
इससे पहले रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध, ग़ज़ा का संघर्ष, बीते दिनों भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य संघर्ष, नेटो और यूरोपीय देशों की सुरक्षा के सवाल, चीन के साथ उतार-चढ़ाव, मध्य पूर्व में सऊदी अरब की भूमिका, पूर्वी एशिया में जापान और दक्षिण कोरिया जैसे पुराने सहयोगियों के साथ बर्ताव जैसे कई मुद्दों ने भी डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को बहस के केंद्र में ला दिया था.
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अमेरिका की भूमिका को लेकर काफ़ी कुछ कहा और लिखा जा रहा है. ऐसे में कई सवाल भी उठ रहे हैं.
क्या अमेरिका अब भी दुनिया के एक बड़े तबके का भरोसेमंद सहयोगी है? क्या अमेरिका अपने प्रतिद्वंद्वियों के लिए जगह-जगह जाने-अनजाने राह खोल रहा है?
सवाल ये भी है कि ट्रंप के स्टाइल का अमेरिका के लिए लंबे समय में क्या मतलब होगा? भारत क्या ट्रंप की विदेश नीति को समझने में चूक गया या भारत के सामने इस विषय में कोई और विकल्प नहीं था? और दुनिया के लिए ट्रंप की इस विदेश नीति के क्या सबक हैं?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार शिवकांत और कूटनीतिक विश्लेषक डॉक्टर श्वेता कुमारी.
प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर / सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः सुमित वैद्य
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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