मणिपुर पर सर्वदलीय बैठक: सरकार ने कहा, शांति के लिए जारी हर कोशिश, कांग्रेस ने रखी 8 मांगें

अमित शाह

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केंद्रीय गृह मंत्री ने शनिवार को मणिपुर को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी. वहीं विपक्षी दलों ने मांग की कि ज़मीनी स्थिति की पूरी जानकारी लेने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को मणिपुर भेजा जाना चाहिए.

गृह मंत्री अमित शाह ने बताया किसरकार मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है. वो हर दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्थिति की जानकारी दे रहे हैं.

बैठक के बाद कांग्रेस ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को तत्काल प्रभाव से हटाने समेत आठ मांगें की.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक समाजवादी पार्टी समेत कुछ और पार्टियों ने कहा है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए.

समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव समेत कुछ नेताओं ने कहा कि मणिपुर में राज्य सरकार पूरी तरह से नाकाम हो गई है. उन्होंने प्रदेश में शांति बहाल करने के लिए "राष्ट्रपति शासन लागू करने की" मांग की.

मणिपुर इस साल मई के महीने की तीन तारीख से लगतार हिंसा से जूझ रहा है. यहां दो समुदायों के बीच जारी हिंसा में अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी हैं, जबकि तीन हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं.

मणिपुर

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बैठक में क्या हुआ?

सर्वदलीय बैठक के बाद बीजेपी प्रवक्ता और मणिपुर के प्रभारी संबित पात्रा ने मीडिया को बताया कि गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में जानकारी दी कि मणिपुर में हिंसा शुरू होने के बाद से "एक भी दिन ऐसा नहीं हुआ" जब उन्होंने इसे लेकर पीएम मोदी से बात ना की हो और पीएम मोदी ने निर्देश ना दिए हों.

संबित पात्रा ने बताया, "इस बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने अपने प्रतिनिधि भेजे थे. सभी ने अपने विषय को बड़े ही सकारात्मक रूप से, एक सकारात्मक माहौल में रखा. बैठक से पहले गृह मंत्रालय की ओर से मणिपुर की परिस्थिति और सरकार के उठाए कदमों को लेकर विस्तार से प्रजेंटेशन दिया गया."

पात्रा ने बताया, "सभी प्रतिनिधियों को सुनने के पश्चात गृह मंत्री ने कहा कि जो भी आपने कहा है इन सभी विषयों पर हम विस्तार से चर्चा करेंगे. गृह मंत्री जी ने आश्वासन दिया है कि आपसी सहयोग के साथ हम जल्द ही शांति की ओर बढ़ेंगे."

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विपक्ष ने क्या कहा?

वहीं, विपक्ष ने इसे 'खुले मन से हुई बैठक' तो बताया है लेकिन अपनी कुछ मांगे भी रखी हैं.

बैठक के बाद राजद के सासंद मनोज झा ने कहा, "बैठक में बड़े खुले मन से बात हुई. 50 दिन हो गए, मौतें हो रही है, विस्थापन हो रहा है. वहां के राजनीतिक नेतृत्व पर पूरी तरह भरोसा नहीं है. ये लगभग सभी विपक्षी दलों ने कहा. उन्होंने यहां तक कह दिया कि जो शख़्स वहां पर प्रशासन चल रहा है वो भरोसमंद नहीं है. अगर वो शख़्स प्रभारी रहता है तो आप शांति नहीं ला सकते."

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टीएमसी नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि पटना में विपक्षी दलों की बैठक के चाौबीस घंटों के भीतर मणिपुर और उत्तरपूर्व के मामले में विपक्ष में एक सुर में अपना विरोध दर्ज कराया है.

मणिपुर में हालात को काबू में करने की सरकार की कोशिशों को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने सवाल किए और कहा कि उन्हें चिंता है कि "क्या सरकार मणिपुर को कश्मीर बना देना चाहती है."

पार्टी ने मांग की है कि सप्ताह भर के भीतर मणिपुर में हिंसाग्रस्त इलाक़ों का दौरा करने के लिए एक सर्वदलीय प्रतनिधिमंडल को भेजा जाना चाहिए.

डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने कहा, "हमने मणिपुर में 50 दिनों से चल रही घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की है. गृह मंत्री ने सभी को सुना और कहा कि वो इस पर ध्यान दे रहे हैं और हम उन पर भरोसा करें. हमने अनुरोध किया कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को मणिपुर भेजा जाए."

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कांग्रेस ने रखीं आठ मांगे

इसी तरह कांग्रेस ने भी मणिपुर के मुख्यमंत्री को तुरंत बदले जाने और प्रधानमंत्री को राज्य की स्थिति पर बयान देने सहित कुल आठ मांगें रखी हैं.

इनमें राज्य के मुख्यमंत्री को तुरंत बदले जाने और बिना देरी किए प्रभावित लोगों के लिए राहत, पुनर्वास और आजीविका का पैकेज तैयार किए जाने की मांग शामिल है.

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बैठक के बाद इबोबी सिंह ने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के नेतृत्व में चल रही सरकार के शासन में प्रदेश में शांति संभव नहीं है.

उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री को तुरंत प्रभाव से हटाया जाए और कहा कि उन्हें दुख है कि उन्हें अपनी बात रखने के लिए अधिक वक्त नहीं मिल पाया.

जब उनसे सवाल किया गया कि क्या गृह मंत्री ने प्रदेश में शाांति बहाल करने के लिए कोई रोडमैप दिया तो उन्होंने बताया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस समेत कुछ पार्टियों ने सर्वदलीय प्रतनिधिमंडल मणिपुर भेजने की बात की है लेकिन हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री विदेश यात्रा से लौटने के बाद इस तरह की एक बैठक का आयोजन ज़रूर करेंगे.

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बैठक में किन दलों ने लिया हिस्सा?

गृह मंत्री के बुलावे पर हुई सर्वदलीय बैठक में बीजेपी के अलावा कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, एआईएडीएमके, आम आदमी पार्टी और कम्यूनिस्ट पार्टी के नेताओं से शिरकत की.

बैठक में बीजेपी के पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ'ब्रायन, मेघालय के मुख्यमंत्री और एनपीपी के कॉनराड सिंह, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के नेता और सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेस सिंह तमांग, असम गण परिषद के बीरेंद्र प्रसाद वैश्य, डीएमके के तिरुची सिंह, एआईएडीएमके के एम थंबी दुरई, बीजेडी के पिनाकी मिश्रा, आम आदमी पार्टी संजय सिंह, आरजेडी के मनोज झा और शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी शामिल हुए.

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