'शादी के 10 साल बाद मैंने अपने पति को क्यों कहा कि अपने रिश्ते में खुलापन लाया जाए'

सेक्सोलॉजिस्ट इलाना ईलिया की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, सेक्सोलॉजिस्ट इलाना ईलिया ने अपने पति को कहा कि रिश्ते में खुलापन लाया जाए
    • Author, मरीना रॉसी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ ब्राज़ील
    • ........से, साओ पाउलो
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

लेखिका, शिक्षिका और सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर इलाना ईलिया ने अपनी शादी की दसवीं सालगिरह पर अपने पति के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा, जो उनकी शादी को पूरी तरह बदल देने वाला था: एकनिष्ठता (मोनोगमी- एक पार्टनर के साथ ही रहना) को छोड़कर आपसी रिश्ते में खुलापन लाने का.

कंटेम्पररी इंस्टीट्यूट ऑफ़ क्लिनिकल सेक्सोलॉजी से सेक्स थैरेपी में स्नातक डिग्री लेने वाली ब्राज़ील की ईलिया, 2011 से स्वीडन में रह रही हैं.

अपनी पहली कामुक कथा-श्रृंखला की किताब एम्मा ई ओ सेक्सो (एम्मा और सेक्स) लिखते समय वह कुछ समय से रिश्तों के खुलेपन पर अध्ययन कर रही थीं.

शीर्षक पात्र एम्मा के ज़रिए ईलिया ने उन विचारों को टटोला, जिन पर वह लंबे समय से शोध कर रही थीं.

उनके पति ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और दोनों ने शैम्पेन के जाम उठाकर इसे सेलिब्रेट किया.

पांच साल बाद, दंपति अपने रिश्ते को अब 'मिला-जुला' बताते हैं और इस नई व्यवस्था को काफ़ी हद तक सफल मानते हैं.

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लेकिन ईलिया इसका रूमानीकरण नहीं करतीं.

वह कहती हैं, "जो रिश्ते बाद में खुलते हैं, उनमें से लगभग एक-तिहाई टूट जाते हैं. लेकिन यही औसत एकनिष्ठ रिश्तों का भी है. यानी असल में इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. इसलिए बेहतर यही है कि आप उस ढांचे को चुनें, जिससे आप सबसे ज़्यादा जुड़ाव महसूस करते हों."

सहमति आधारित गैर‑एकनिष्ठता

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ईलिया 'कंसेंसुअल नॉन‑मोनोगमी' की अवधारणा को अपनाती हैं- यह एक वृहद शब्द है, जो ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिनके एक से अधिक भावनात्मक या यौन साथी होते हैं.

इसकी ख़ास पहचान है इसमें शामिल सभी लोगों के बीच 'खुली और स्पष्ट सहमति'.

इसी वजह से विशेषज्ञ इसे कभी‑कभी बेवफ़ाई के बजाय 'नैतिक' या 'ज़िम्मेदार गैर‑एकनिष्ठता' भी कहते हैं.

ईलिया बताती हैं, "यह अवधारणा ऐसे किसी भी रिश्ते को शामिल करती है, जिसमें शामिल लोगों की आपसी सहमति हो और जो भावनात्मक, कामुक, रोमांटिक या यौन किसी भी स्तर पर समर्पण की पारंपरिक धारणा को किसी न किसी तरह और किसी न किसी हद तक लचीला बनाता हो."

हालांकि वह खुले रिश्ते और पॉलीएमरी (एक से ज़्यादा लोगों से यौन-भावनात्मक संबंध) के बीच फर्क़ भी स्पष्ट करती हैं.

"खुले हुए रिश्तों में आम तौर पर रोमांस के बिना यौन स्वतंत्रता होती है- हल्के‑फुल्के संबंध, बिना प्यार में पड़े. पॉलीएमरी में प्यार और जुनून दोनों शामिल होते हैं, जिसमें 'न्यू रिलेशनशिप एनर्जी' भी होती है, जैसे दोबारा प्यार में पड़ने का उत्साह."

ख़ुद ईलिया जो रिश्ता निभाती हैं, उसे वह 'मिश्रित, संवेदनशील, प्रेमपूर्ण और सहानुभूतिपूर्ण समझौता' कहती हैं.

वह कहती हैं, "मैं पॉलीएमरी में एक पांव रखती हूं- पूरी तरह नहीं, लेकिन इस विचार के साथ कि एक से ज़्यादा लोगों से प्यार और रोमांटिक रिश्ते संभव हैं. मेरे पति हल्के, कैज़ुअल संबंधों को पसंद करते हैं. हम इस पर बात करते रहते हैं."

अपने रिश्ते के बारे में सोचिए

विशेषज्ञों का कहना है कि अपने रिश्तों में खुलापन लाने से पहले बातचीत करनी चाहिए

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ईलिया के अनुभव में, जो जोड़े अपने रिश्ते में खुलापन लाने का फैसला करते हैं, उनके लिए सबसे आम शुरुआती तरीका, 'पूछो-मत, बताओ-मत' होता है.

ईलिया समझाती हैं, "कुछ ऐसा कि- 'मुझे लगता है कि हमारे बीच पूरी तरह समर्पण शायद न तो संभव है और न ही ज़रूरी. लेकिन मैं इसके बारे में जानना नहीं चाहता/चाहती. तुम मुझे बताओगे नहीं, और मैं पूछूंगी नहीं'."

वह चेतावनी देती हैं कि यह मॉडल अक्सर इसलिए असफल हो जाता है क्योंकि इसमें ईमानदारी और संवाद की कमी होती है, "जो चीज़ लोगों को करीब लाने के लिए होती है, वही उल्टा दूरी पैदा कर देती है."

किसी पार्टनर से रिश्ता खोलने की बात करने से पहले, ईलिया एक 'इमोशनल इन्वेंट्री' लेने की सलाह देती हैं.

वह कहती हैं, "अपने रिश्ते के बारे में सोचिए. इसमें क्या कमी है? आपकी इच्छाएं और आपकी सीमाएं क्या हैं? अपनी कल्पनाएं ईमानदारी से लिखिए. अभी इसे कोई नहीं देखेगा - यह सिर्फ़ आपके लिए है."

रिश्ते में खुलापन लाने के लिए संवाद और सहानुभूति भी ज़रूरी है.

डॉक्टर ईलिया कहती हैं, "यह एक मुश्किल पल होता है… ख़ासतौर पर उनके लिए, जो इस सोच के साथ बड़े हुए हैं कि एकनिष्ठता ही प्यार करने का सबसे अच्छा तरीका है और यह प्यार करने वाले लोगों के बीच सम्मान और वफ़ादारी का प्रतीक है."

इलाना ईलिया

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इमेज कैप्शन, जब ईलिया ने पहली बार अपनी शादी में आए बदलाव के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की, तो उन्हें हज़ारों नफ़रत भरे कमेंट मिले.

वह आगे कहती हैं, "समझौते बातचीत से बनते हैं: आप किस हद तक जाएंगे? किसके साथ? और यह ज़रूरी है कि सीमाओं का मज़ाक न उड़ाया जाए, बल्कि उन्हें समझा जाए."

वह कहती हैं कि एक सपोर्ट नेटवर्क भी बेहद अहम है.

डॉक्टर ईलिया कहती हैं, "इस विषय पर पढ़िए, पॉडकास्ट सुनिए. अपनी रुचियों के हिसाब से समूह खोजिए."

वह सलाह देती हैं, "सामाजिक कलंक एक सच्चाई है. ऐसे पेशेवरों से मार्गदर्शन लीजिए जो समझते हों कि प्यार को महसूस करने के ये भी वैध तरीके हैं."

ईलिया यह भी जोड़ती हैं कि टूटी हुई चीज़ों को ठीक करने के लिए रिश्ते में खुलापन लाना शायद ही कभी काम करता है.

वह कहती हैं, "इस बारे में सोचने की भी ज़रूरत नहीं है. यह न तो थेरेपी है और न ही आख़िरी सहारा. आम तौर पर रिश्ते में खुलापन लाने का फैसला तब होता है जब रिश्ता पहले से अच्छा होता है, और दोनों इसे मिलकर और बेहतर बनाना चाहते हैं."

नफ़रत और उम्मीद

रिलेशनशिप

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जब ईलिया ने पहली बार अपनी शादी में आए बदलाव के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की, तो उन्हें हज़ारों नफ़रत भरे कमेंट मिले.

वह याद करती हैं, "कुछ तो बिल्कुल बेतुके थे- जैसे, 'तुम यह इसलिए कर रही हो क्योंकि तुम अपने आदमी को खोना नहीं चाहतीं'."

लेकिन उन्हें समर्थन भी मिला, जिनमें ऐसे जोड़ों के ख़त भी शामिल थे, जिन्होंने कहा कि इससे उन्हें इस तरह की बातचीत करने की हिम्मत मिली.

ईलिया तर्क देती हैं, "कोई भी इंसान जन्म से एकनिष्ठ नहीं होता. कोई आपसे यह नहीं पूछता कि आप ऐसा बनना चाहते हैं या नहीं. क़ानून, विश्वास, परीकथाएं, पारिवारिक अपेक्षाएं- सब कुछ यही संकेत देते हैं कि प्यार सिर्फ़ दो लोगों के बीच समर्पित भाव होना चाहिए. ऐतिहासिक रूप से पुरुषों को आज़ादी मिली, जबकि महिलाओं को सज़ा दी गई."

उनके मुताबिक़ यह व्यवस्था विरासत, धर्म और वंश से जुड़ी हुई है.

वह कहती हैं, "अनिवार्य एकनिष्ठता यह मानकर चलती है कि एकनिष्ठता अच्छी, पवित्र और नैतिक है, और जो भी इससे अलग राह चुनता है, यह उसे कलंकित करती है."

तो क्या ईलिया अब ज़्यादा खुश हैं?

वह कहती हैं, "बिल्कुल, इसमें कोई संदेह नहीं है."

"लेकिन इसका संबंध इस बात से भी है कि आज मैं कौन हूं. पंद्रह साल पहले, आघात और विश्वासघात के बाद, मैं इसके लिए कभी तैयार नहीं होती. उस समय समर्पण मुझे सुरक्षित महसूस कराता था. समय के साथ इच्छा कम होती चली गई. यह आम बात है, लंबे समय के 40% रिश्ते बिना सेक्स वाली शादियों में बदल जाते हैं."

उनके लिए रिश्ते में खुलापन लाना ईमानदारी और आज़ादी से जुड़ा था.

वह पूछती हैं, "क्या प्यार सिर्फ़ इसलिए ख़त्म हो जाना चाहिए क्योंकि लोग मानते हैं कि प्यार करने का एक ही तरीका है?"

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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