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बांग्लादेश और शेख़ हसीना के मामले में ये हो सकते हैं भारत के कूटनीतिक रास्ते- द लेंस
बांग्लादेश में पिछले साल हुई राजनीतिक हलचल की गूँज इस हफ़्ते फिर एक बार सुनाई पड़ी.
बांग्लादेश में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को मौत की सज़ा सुनाई.
इससे संबंधित मामले की सुनवाई शेख़ हसीना की ग़ैर मौजूदगी में हुई थी क्योंकि वो बांग्लादेश छोड़ने के बाद से भारत में हैं.
शेख़ हसीना ने फ़ैसले के बाद दिए बयान में एक तरह से ये तो माना कि बीते साल हुए छात्रों के आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की जान गई थी, मगर उसकी ज़िम्मेदारी से इनकार किया.
अब बांग्लादेश सरकार-प्रशासन का भारत से कहना है कि उसे शेख़ हसीना को बांग्लादेश को सौंप देना चाहिए. हालांकि जानकारों का कहना है कि भारत ऐसा करने से परहेज़ करेगा.
इन हालात में बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्त्व वाली अंतरिम सरकार अगले साल फ़रवरी में चुनाव कराना चाहती है. इससे जुडे़ कई सवाल हैं, जैसे- भारत के लिए इस फ़ैसले के क्या मायने हैं?
क्या ये शेख़ हसीना की राजनीति का अंत है? क्या ये चीन और पाकिस्तान के लिए एक अवसर की तरह है? इसे लेकर क्या भारत को कूटनीतिक रुख़ अपनाना चाहिए?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी सवालों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर रहे और भारत के पूर्व विशेष प्रतिनिधि एस डी मुनि, बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त रीवा गांगुली दास और द हिंदू में विदेश मामलों के सीनियर असिस्टेंट एडिटर कल्लोल भट्टाचार्जी.
प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर / सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः निमित वत्स
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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