संसद की सुरक्षा में सेंध के अभियुक्तों ने कहा- बिजली के झटके देकर किया जा रहा टॉर्चर

संसद की सुरक्षा में सेंध

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    • Author, उमंग पोद्दार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के छह में से पाँच अभियुक्तों ने बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल कर ये बताया है कि उन्हें बिजली के झटके देकर टॉर्चर किया जा रहा है और 70 कोरे पन्नों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए गए हैं.

इस याचिका में अभियुक्तों ने कहा है कि "उनसे यूएपीए के तहत अपराध करने और राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से संबंध होने जैसे कबूलनामों पर भी हस्ताक्षर करवाए गए हैं."

अभियुक्तों ने कहा है कि इनमें से दो लोगों से "जबरन एक कागज़ पर ये लिखवाया गया है कि उनका एक राजनीतिक पार्टी/ विपक्षी पार्टी के नेता से संबंध है."

ये अर्ज़ी मनोरंजन डी, सागर शर्मा, ललित झा, अमोल शिंदे और महेश कुमावत की ओर से दाख़िल की गई है.

इन पाँच अभियुक्तों की ओर से अदालत में दलील देने वाले वकील अमित शुक्ला ने कहा, "हमने उचित कार्रवाई की मांग की है. हम ये तथ्य अदालत के संज्ञान में लाना चाहते थे, क्योंकि चार्जशीट दाखिल करते समय पुलिस इन तथ्यों के साथ कुछ न कुछ करेगी."

उन्होंने कहा, "बाद में ज़मानत अर्ज़ी दायर करते समय हम इन तथ्यों का इस्तेमाल करेंगे."

वकील अमित शुक्ला ने कहा, "अभियोजन पक्ष ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है. वे इसे अगली तारीख तक जमा करेंगे, जो कि 17 फ़रवरी है."

उन्होंने कहा, "लेकिन मुझे यकीन है कि वे इन आरोपों को खारिज करेंगे. मगर वो इसे न भी माने तो भी जाँच तो होनी चाहिए कि क्या इस तरह की घटनाएं हुई हैं या नहीं."

अभियुक्तों ने ये भी कहा है कि उन्हें अपने मौजूदा और पुराने सिम नंबरों को जारी करवाने के लिए एयरटेल, वोडाफ़ोन और बीएसएनएल के दफ़्तरों में भी ले जाया गया. इसकी वजह "अभियोजन पक्ष को अच्छे से पता होगी."

वकील ने कहा कि पाँचों अभियुक्तों को ये डर है कि इनके नंबरों के साथ छेड़छाड़ कर के ये दावा किया जा सकता है कि इनके संबंध गलत लोगों या फिर किसी राजनीति दल से थे.

अभियुक्तों ने ये भी कहा है कि उनसे जबरन ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड लिए गए हैं. वकील अमित शुक्ला ने कहा, "दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशानुसार ये ग़ैर-क़ानूनी है."

दिल्ली पुलिस क्या कह रही है?

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दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत में पेश होने वाले विशेष सरकारी अभियोजक अखंड प्रताप सिंह ने कहा, "हम अपना उचित जवाब दाखिल करेंगे."

हालांकि, उन्होंने ये भी बताया कि पहले ही अदालत के संज्ञान में ये मामला लाया जा चुका था लेकिन जब जज ने अभियुक्तों से इस बारे में पूछा तो उन्होंने इनकार कर दिया.

वह कहते हैं, "13 जनवरी को जब सभी अभियुक्त कोर्ट में पेश हुए थे, उस समय भी मौखिक तौर पर यही आरोप लगाए गए थे और कोर्ट ने बारी-बारी से सभी अभियुक्तों से इस बारे में सवाल किया था. हालांकि, उस समय अभियुक्तों ने दिल्ली पुलिस की ओर से किसी भी तरह के दबाव या इस तरह के आरोपों को खारिज कर दिया था. 13 जनवरी के आदेश में भी ये दर्ज है."

हालांकि, पाँच अभियुक्तों के वकील ने कहा कि ये सभी पुलिस के डर से कुछ नहीं बोले. उन्होंने कहा, "नीलम आज़ाद (छठी अभियुक्त) ने ये मुद्दा तब उठाया जब एक महिला अफ़सर ने उनपर 50 कोरे पन्ने पर साइन करने का दबाव बनाया. जब उन्होंने इसका ज़िक्र किया तो मेरे मुवक्किलों ने कहा कि उनसे भी जबरदस्ती खाली कागज़ों पर साइन लिए गए हैं."

उन्होंने कहा, "जब मैंने ये मामला उठाया और कहा कि इसे दर्ज किया जाना चाहिए, तब कोर्ट ने कहा कि वह हर अभियुक्त से इस बारे में पूछेगी. जब कोर्ट ने अभियुक्तों से पूछा, उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ."

"उस दिन वे (अभियुक्त) पुलिस अफसरों के साथ खड़े थे. तो कुछ तो हुआ (पुलिस की तरफ़ से) जिसके बाद उन्होंने (अभियुक्त) कहा कि पुलिस उनपर दबाव नहीं बना रही."

"बाद में जब उनसे मैं जेल में मिला, उन्होंने मुझे बताया कि उनपर दबाव था कि वे अदालत में कुछ न बोलें."

"उस दिन (13 जनवरी) को वे पुलिस की हिरासत में थे. ये हिरासत उसी दिन पूरी हुई थी. पुलिस हिरासत ख़त्म होने के बाद मैं उनसे न्यायिक हिरासत में मिला, जब उन्होंने मुझे सबकुछ बताया. जब वे आश्वस्त हो गए कि अब न्यायिक हिरासत में पुलिस उनका उत्पीड़न नहीं करेगी, तब उन्होंने सारी बातें मुझे बताई."

अभियुक्तों की न्यायिक हिरासत बढ़ी

ललित झा

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इमेज कैप्शन, हमले के कथित मास्टरमाइंड ललित झा

बुधवार को हुई सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने सभी छह अभियुक्तों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी. अदालत ने ये हिरासत एक मार्च तक के लिए बढ़ा दी.

सरकारी अधिवक्ता अखंड प्रताप सिंह ने कहा, "जाँच अभी भी लंबित है. अगर ये लोग हिरासत में नहीं रखे गए, तो गवाहों पर दबाव बनाने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बनी रहेगी."

ये छह अभियुक्त 13 दिसंबर को संसद पर हमले की बरसी के दिन ही उसकी सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में हिरासत में हैं.

उस दिन मनोरंजन डी और सागर शर्मा ने एमपी चैंबर में घुसकर नारेबाज़ी की और एक स्मोक कैन फेंका. दो अन्य अभियुक्त नीलम और अमोल शिंदे को संसद के बाहर नारेबाज़ी करने और रंगीन गैस छिड़कने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

मामले में महेश कुमावत और ललित झा को भी गिरफ़्तार किया गया. पुलिस के अनुसार पेशे से शिक्षक ललित झा इस हमले के 'मास्टरमाइंड' थे और कुमावत सुरक्षा में सेंध लगाने की उनकी योजना में मदद कर रहे थे.

बाद में अभियुक्तों ने पुलिस को बताया था कि वे बेरोज़गार हैं और रोज़गान न मिलने का मुद्दा संसद में उठाना चाहते थे. इन सभी अभियुक्तों पर आतंकवाद-रोधी क़ानून यूएपीए के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है.

अभियुक्तों के वकील ने ये भी दावा किया है कि उन्हें अभी तक एफ़आईआर की कॉपी नहीं मिली है.

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