भारत के हाथों करारी हार ने पाकिस्तान क्रिकेट की किस दुखती रग को छेड़ दिया है

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- Author, रशीद शकूर
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, कराची से
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
पाकिस्तान की क्रिकेट टीम जब भी किसी टूर्नामेंट में भारत से हारती है तो यह एक नया ज़ख्म होता है लेकिन असल में हर नई शिकस्त पुराने ज़ख्मों को फिर से ताज़ा कर देती है.
टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में पाकिस्तान की टीम भारत से 13 मैच हार चुकी है. जहां तक टी-20 वर्ल्ड कप का संबंध है तो हार का यह सिलसिला 8 मैचों तक लंबा हो चुका है. इसके मुक़ाबले पाकिस्तान के खाते में सिर्फ़ एक जीत नज़र आती है.
कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में भारत के ख़िलाफ़ अपने तीसरे सबसे कम स्कोर पर आउट होकर 61 रनों की करारी हार से दो-चार होने वाली पाकिस्तान टीम की परफ़ॉरमेंस ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
खेल में हार-जीत होती रहती है लेकिन पाकिस्तान की टीम जिस तरह अब भारत से हारती जा रही है उसने इस सच्चाई को साफ़ कर दिया है कि दोनों टीमों के बीच अब एक बड़ा फ़र्क़ आ चुका है.
केवल यही नहीं कि भारत अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में पहले और पाकिस्तान छठे नंबर की टीम है, दोनों टीमों की मानसिक परिपक्वता और मज़बूती में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ नज़र आता है. मुश्किल हालात में हिम्मत बनाए रखने और हौसला खो देने का फ़र्क़ हमें कोलंबो के इस मैच में साफ़ तौर पर दिखा.
किन खिलाड़ियों को अब जाना चाहिए?

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उस्ताद क़मर जलालावी की मशहूर ग़ज़ल 'कब मेरा नशीमन अहल-ए-चमन…', जिसे हबीब वली मोहम्मद ने गाया था, उसका एक मिसरा मुझे इस मौक़े से याद आ रहा है: "जब कश्ती डूबने लगती है तो बोझ उतारा करते हैं."
हाल के दिनों में पाकिस्तान के प्रदर्शन को देखकर तो यही लगता है कि टीम पर बोझ बनने वाले खिलाड़ियों को रुख़्सत किए बिना अब बात नहीं बनेगी.
अगर आप कहें तो मैं इन खिलाड़ियों के नाम बताने में भी कोई हिचकिचाहट महसूस नहीं करूंगा क्योंकि सिर्फ़ मैं ही नहीं, पूरी दुनिया उन नामों को जानती है जो काफ़ी अरसे से बड़ी टीमों के ख़िलाफ़ अपनी असंतोषजनक परफ़ॉरमेंस के बावजूद टीम में जगह बनाए हुए हैं, ख़ासकर टी-20 इंटरनेशनल में.
शाहीन शाह अफ़रीदी पर सवाल

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पहला नाम शाहीन शाह अफ़रीदी का आता है जिनके ख़ूबसूरत कमर्शियल (विज्ञापन) बने. इनमें उन्हें यह कहते हुए सबने देखा कि वह पाकिस्तान के प्रीमियम फ़ास्ट बॉलर हैं लेकिन उनकी हाल की फ़ॉर्म उनके इस दावे को ग़लत साबित कर रही है.
इसमें कोई शक नहीं है कि कुछ समय पहले तक शाहीन शाह अफ़रीदी की धाक जमी हुई थी और वह किसी भी बैटिंग लाइन के लिए बड़ा ख़तरा बने हुए थे लेकिन अब हालात बदल चुके हैं.
शाहीन फ़िटनेस की समस्याओं की वजह से अपना असर खो बैठे हैं और उनकी रफ़्तार में कमी आई है. गेंद को स्विंग करने की महारत भी उनमें पहले जैसी नहीं दिख रही.
हालिया बिग बैश में हमने देखा कि एक मैच में उन्होंने तीन अधूरे ओवरों में 43 रन लुटा दिए और अगले ही मैच में उनके चार ओवरों में 49 रन बने.
भारत के ख़िलाफ़ इस टी-20 वर्ल्ड कप के अहम मैच में शाहीन की मायूसी भरी परफ़ॉरमेंस के बाद उनके ससुर शाहिद अफ़रीदी भी यह कहने पर मजबूर हो गए हैं कि शाहीन को बाबर आज़म और शादाब ख़ान के साथ नामीबिया के ख़िलाफ़ मैच से ड्रॉप कर देना चाहिए और बेंच पर बैठे खिलाड़ियों को मौक़ा देना चाहिए.
पूर्व टेस्ट क्रिकेटर मोहम्मद यूसुफ़ का भी यही कहना है कि शाहीन, बाबर और शादाब का वक़्त ख़त्म हो चुका है. केवल कमज़ोर टीमों के ख़िलाफ़ अच्छा खेलने वालों की नहीं बल्कि टी-20 टीम को अब बेहतर प्रदर्शन करने वाले नए खिलाड़ियों की ज़रूरत है.
बाबर आज़म: वक़्त की रफ़्तार से पीछे

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वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. हर खिलाड़ी पर बुरा वक़्त आता है, लेकिन वह हालात को देखकर अपने बारे में फ़ैसला करता है.
बाबर आज़म इस वक़्त तीनों फॉर्मेट्स में खेल रहे हैं लेकिन सब देख रहे हैं कि टी-20 फ़ॉर्मेट में वह मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं. एक फ़ॉर्मेट से जुड़े रहने के लिए उन्हें अपने बाक़ी दो फॉर्मेट्स को प्रभावित नहीं करना चाहिए जिनमें उनके लिए बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश मौजूद है.
इसमें कोई शक नहीं कि अतीत में बाबर ने टी-20 में शानदार प्रदर्शन किया है और वह इस वक़्त टी-20 इंटरनेशनल में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं लेकिन अब टी-20 क्रिकेट जिस तेज़ी से आगे बढ़ते हुए नया अंदाज़ अपनाती जा रही है, बाबर उन मांगों को पूरा करते नज़र नहीं आ रहे हैं.
पहले वह ओपनर के तौर से खेलते हुए कामयाब ज़रूर रहे, लेकिन उस वक़्त भी उनकी इस बात के लिए आलोचना होती थी कि वह आक्रामक अंदाज़ में बैटिंग नहीं करते और उनके स्ट्राइक रेट पर सवाल उठते थे.
उस दौर में भी पाकिस्तान टीम के ड्रेसिंग रूम में मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ यही आवाज़ उठाते थे कि बाबर और रिज़वान 'सेंचुरी पार्टनरशिप' ज़रूर करते हैं लेकिन जब दोनों 15वें-16वें ओवर में आउट होकर आते हैं, तो मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ों के पास खेलने के लिए बचता ही क्या है?
यहां यह बताना भी ज़रूरी है कि बाबर आज़म और मोहम्मद रिज़वान ने टी-20 इंटरनेशनल में कुल 10 शतकीय साझेदारियां की हैं. अब जब बाबर का बैटिंग ऑर्डर बदला है तो उनका अंदाज़ इस नई पोज़ीशन के मुताबिक़ नहीं है.
इसके लिए ज़रूरी है कि वह तीसरे या चौथे नंबर पर आकर तेज़ बैटिंग करें लेकिन चूंकि वह सेट होने में थोड़ा वक़्त लेते हैं, इसलिए वह इस बदलाव के साथ तालमेल नहीं बिठा सके हैं.
बाबर के साथ एक समस्या हमेशा से रही है, और वक़्त के साथ यह गहराती गई है, कि वह स्पिनर्स का शिकार बड़ी आसानी से बन जाते हैं, जैसा कि भारत के ख़िलाफ़ मैच में हमने देखा.
अगर हम आंकड़ों पर नज़र डालें तो बाबर टी-20 इंटरनेशनल में 25 बार स्पिनर्स के ख़िलाफ़ आउट हुए हैं. उन्हें सबसे ज़्यादा पांच बार ऑस्ट्रेलिया के एडम ज़म्पा ने आउट किया है जबकि माइकल ब्रेसवेल और आदिल रशीद उन्हें 4-4 बार आउट कर चुके हैं. ईश सोढ़ी ने उन्हें तीन बार आउट किया है.
बाबर चार टी-20 वर्ल्ड कप में 20 मैच खेल चुके हैं जिनमें वह केवल पांच हाफ़-सेंचुरी ही बना पाए हैं.
शादाब-साइम बड़े इम्तिहान में नाकाम

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भारत के ख़िलाफ़ वैसे तो कई खिलाड़ियों का ख़राब प्रदर्शन चर्चा में है लेकिन सीनियर होने के नाते शादाब ख़ान की बहुत ज़्यादा आलोचना हो रही है.
शादाब अनफ़िट होने की वजह से कुछ समय टीम से बाहर रहे लेकिन वापसी के बाद एक ऑलराउंडर और लेग-स्पिनर के तौर पर उनसे ऐसी उम्मीद थी जो टीम के काम आए.
शादाब ख़ान ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ दांबुला टी-20 में 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' अवॉर्ड जीता और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी दो मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया. अमेरिका के ख़िलाफ़ भी प्रदर्शन ठीक रहा लेकिन जब बात बड़ी टीम की आई तो वह बैटिंग और बॉलिंग दोनों में कोई ख़ास अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे.
शादाब ख़ान हों या अबरार अहमद, दोनों ऐसे बॉलर हैं जिनका मिडिल ओवर्स में विकेट लेना बहुत ज़रूरी है. अबरार अहमद ने भी भारत के ख़िलाफ़ निराश किया. उनकी 'मिस्ट्री बॉलिंग' का सबको इंतज़ार ही रहा.
पाकिस्तान टीम के हेड कोच माइक हेसन ने साइम अय्यूब को ऑलराउंडर तो बना दिया है लेकिन सब ओपनर साइम अय्यूब को ढूंढ रहे हैं. साइम का स्पिन ऑप्शन टीम को फ़ायदा पहुंचा रहा है लेकिन बतौर ओपनर उनका 'कभी अच्छा-कभी ख़राब' प्रदर्शन सबके सामने है.
साइम अय्यूब ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ एक हाफ़-सेंचुरी बनाई जबकि इस वर्ल्ड कप के तीन मैचों में उनका सबसे बड़ा स्कोर केवल 24 रन रहा है. पिछली 15 पारियों में उनके बल्ले से सिर्फ़ दो अर्द्धशतक निकले हैं.
टैलेंट बर्बाद न करें

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शाहीन अफ़रीदी, बाबर आज़म और शादाब ख़ान चार-चार टी-20 वर्ल्ड कप खेल चुके हैं. मुझे नहीं लगता कि अगले वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए इन तीनों को इस फ़ॉर्मेट में और खेलाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है तो यह किसी भी हाल में अक़्लमंदी नहीं होगी.
पाकिस्तान के पास टैलेंटेड बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों की कमी नहीं है, बस सही वक़्त पर मौक़ा देकर उनकी क़ाबिलियत का फ़ायदा उठाने की ज़रूरत है.
सूफ़ियान मुक़ीम, सलमान मिर्ज़ा, माज़ सदाक़त, शामिल हुसैन और कई दूसरे अच्छे खिलाड़ी मौक़े के इंतज़ार में हैं. इससे पहले कि वक़्त गुज़र जाए इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मैदान में उतार देना चाहिए.
बड़े नाम बहुत देख लिए.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.













