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काशी विश्वनाथ मंदिर में पुलिसकर्मियों के धोती-कुर्ता पहनने का क्या है मामला – प्रेस रिव्यू
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में पुजारी के वेश में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.
इस खबर को इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने अपने यहां प्रमुखता से छापा है. अखबार के मुताबिक पुजारी की तरह पुलिसकर्मियों ने धोती, कुर्ता और माथे पर तिलक लगाया हुआ है.
पुलिस का कहना है कि इस कदम से मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए माहौल को और अच्छा बनाने में मदद मिलेगी.
वाराणसी के पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कहा कि शुरू में इसे ट्रायल बेस पर 15 दिनों के लिए शुरू किया गया है, जिसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी.
अखबार के मुताबिक़, उन्होंने बताया कि इससे पहले भी साल 2018 में इसका ट्रायल किया गया था लेकिन ट्रायल खत्म होने के बाद बंद कर दिया गया.
अग्रवाल ने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि श्रद्धालु सम्मानित महसूस करें और खासकर उन मौकों पर जब मंदिर में भारी भीड़ और वीआईपी लोग आते हैं.”
अखबार के मुताबिक इस वक्त गर्भगृह के चारों दरवाज़ों पर सिर्फ चार पुरुष पुलिसकर्मी ही धोती और कुर्ता पहनकर खड़े हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि चार पुलिसकर्मियों के साथ चार महिला पुलिसकर्मी भी तैनात हैं, जो जल्द कुर्ता पहनना शुरू कर देंगी.
इसके अलावा गर्भगृह से 15 मीटर की दूरी पर कुछ और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है लेकिन इन लोगों ने खाकी वर्दी पहनी हुई है.
अखिलेश यादव ने जताई आपत्ति
पुजारी के वेश में पुलिसकर्मियों की तैनाती पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आपत्ति जताई है.
उन्होंने पुजारी के वेश में पुलिसकर्मियों को मंदिर में भीड़ को नियंत्रित करने से संबंधित एक वीडियो रिपोर्ट शेयर की और साथ में लिखा, "पुजारी के वेश में पुलिसकर्मियों का होना किस ‘पुलिस मैन्युअल’ के हिसाब से सही है?"
अखिलेश यादव ने लिखा, "इस तरह का आदेश देने वालों को निलंबित किया जाए. कल को इसका लाभ उठाकर कोई भी ठग भोली-भाली जनता को लूटेगा तो उप्र शासन-प्रशासन क्या जवाब देगा. निंदनीय."
हालांकि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर माहौल और पुलिस से जुड़ी किसी भी नकारात्मक धारणा को दूर करना है.
अधिकारी ने कहा कि जब मंदिर में लंबी कतारें लगती हैं, तो लोग काफी गुस्सा हो जाते हैं और इसे कम करने के लिए वहां तैनात पुलिसकर्मियों को श्रद्धालुओं से दोस्ती से भरा व्यवहार करना चाहिए.
अखबार के मुताबिक मंदिर में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए तीन दिवसीय कम्युनिकेशन स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चल रहा है.
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल का कहना है कि मंदिर में रस्सियों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसकी मदद से श्रद्धालु कतार में लगकर दर्शन कर पाएं.
उन्होंने कहा कि आमतौर पर वीआईपी मूवमेंट के समय पुलिसकर्मी, श्रद्धालुओं को हटा देते हैं जिससे उन्हें ठेस पहुंचती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
अखबार के मुताबिक करीब 800 पुलिसकर्मी काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए बारी-बारी से तैनात रहते हैं, जिनमें से किसी भी समय करीब 250 पुलिसकर्मी ड्यूटी पर होते हैं.
मौजूदा वक्त में हर दिन काशी विश्वनाथ मंदिर में करीब पांच लाख भक्त दर्शन के लिए आते हैं.
33 प्रतिशत महिलाओं को टिकट
बीजू जनता दल (बीजेडी) ने ओडिशा की एक तिहाई लोकसभा सीटों पर महिला उम्मीदवारों को उतारा है. 21 लोकसभा सीटों वाले ओडिशा में बीजेपी ने साल 2019 की तरह इस बार भी 7 महिलाओं को टिकट दी है.
राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुवार को घोषणा की कि बालासोर लोकसभा क्षेत्र से लेखाश्री सामंतसिंघर चुनाव लड़ेंगी.
लेखाश्री ने दो दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी छोड़ी है. हिंदुस्तान टाइम्स अखबार ने इस खबर को प्रमुखता से छापा है.
पार्टी अब तक घोषित 20 लोकसभा सीटों में से बारगढ़, भद्रक, जगतसिंहपुर, जाजपुर, कोरापुट और अस्का से छह महिला उम्मीदवारों को टिकट दे चुकी है.
साल 2019 में बीजेपी ने जिन सात महिला उम्मीदवारों को लोकसभा चुनाव में उतारा था, उनमें से पांच ने जीत दर्ज की थी, वहीं पार्टी को कोरापुट और सुंदरगढ़ में हार का सामना करना पड़ा था.
राज्य की कुल 21 लोकसभा सीटों पर पार्टी ने जिन उम्मीदवारों को उतारा है, उनमें से पांच ऐसे हैं जो पहले कांग्रेस या बीजेपी के साथ थे.
अखबार के मुताबिक बारगढ़ से परिणीता मिश्रा, बालासोर से लेखाश्री सामंतसिंघर और बरहामपुर से भृगु बक्शीपात्रा पहले बीजेपी के साथ थे, वहीं केंद्रपाड़ा से अंशुमान मोहंती और बोलनगीर से सुरेंद्र सिंह भोई कांग्रेस छोड़कर आए हैं.
बीजेडी नेता बिजय नायक ने कहा कि अपने पिता की तरह मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हमेशा राज्य की महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की कोशिश की है.
उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए काम करने और उनकी चिंता करने का फल पार्टी को बार-बार चुनावों में मिला है.
33 प्रतिशत आरक्षण की बात
अखबार के मुताबिक बीजेपी ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए 419 उम्मीदवार अभी तक उतारे हैं, जिसमें से 67 महिला उम्मीदवार हैं.
वहीं 2019 में बीजेपी ने 437 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें 53 सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारे थे. अखबार के मुताबिक साल 2019 में बीजेपी ने 12 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जो इस बार बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया है.
हालांकि महिला आरक्षण विधेयक, 2023 में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई है.
अखबार के मुताबिक 17वीं लोकसभा में महिला सांसदों का अनुपात सबसे ज्यादा था. तब 78 महिलाएं चुनकर संसद पहुंची थीं. हालांकि यह फिर भी 14 प्रतिशत के करीब ही था.
खबर के मुताबिक 2019 में कांग्रेस ने 262 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें से महिला उम्मीदवार 54 यानी 20 प्रतिशत थे, जिसमें से 11 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी.
इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस ने 42 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 16 महिलाओं को टिकट दिया था, जो 38 प्रतिशत है, जिसमें से 56 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी.
ईवीएम से जुड़े वीडियो पर यू-ट्यूब का एक्शन
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़ी वीडियोज़ पर यू-ट्यूब ने मोनिटाइज़ेशन से जुड़ी रोक लगाना शुरू कर दिया है.
इस खबर को इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर जगह दी है. अखबार के मुताबिक इस तरह का कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स को विज्ञापन से मिलने वाला पैसा नहीं मिलेगा.
अखबार के मुताबिक यू-ट्यूब ने कम से कम दो क्रिएटर्स को ऐसा कंटेंट बनाने को लेकर अलर्ट किया है, जिसमें मेघनाद और स्वतंत्र पत्रकार सोहित मिश्रा शामिल हैं.
यू-ट्यूब ने इन दोनों को ईवीएम और वोटर वीवीपैट से जुड़े वीडियोज़ पर होने वाली कमाई की सीमाओं को लेकर अलर्ट किया है.
प्लेटफॉर्म का कहना है कि गलत जानकारी वाले वीडियो एड रेवेन्यू के हकदार नहीं हैं.
अखबार के मुताबिक सोहित मिश्रा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 3.68 लाख और मेघनाद के चैनल पर 42 हज़ार से ज़्यादा सब्सक्राइबर्स हैं.
सोहित ने अखबार को बताया कि ईवीएम से जुड़े उनके चार वीडियोज़ को यू-ट्यूब ने लिमिटेड मॉनिटाइजेशन के तहत रखा है.
जब सोहित ने रिव्यू के प्लेटफार्म से अपील की तो एक वीडियो पर मोनेटाइजेशन को शुरू किया गया है.
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)
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