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पाकिस्तान चुनाव: कौन बनाएगा सरकार, पार्टियों के सामने हैं विकल्प चार
- Author, निकोलास योंग और बीबीसी उर्दू
- पदनाम, सिंगापुर और इस्लामाबाद से
आम चुनाव के चार दिन बाद भी पाकिस्तान के लोगों को अब तक भी ये नहीं मालूम कि अगली सरकार किस पार्टी या गठबंधन की बन रही है या उनका अगला प्रधानमंत्री कौन होगा.
इमरान ख़ान जेल में हैं और उनकी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ को रोकने के लिए कई जतन किए गए. पार्टी के भीतर चुनाव न करवाने के मुद्दे पर चुनाव आयोग ने पार्टी का सिंबल भी छीन लिया था.
इसके बावजूद इमरान ख़ान समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों ने 93 सीटें जीत लीं. इस जीत ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों को चौंका कर रख दिया है. लेकिन ये आंकड़ा बहुमत से कम है.
नवाज शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) दूसरे नंबर पर रही और उसे 75 सीटें मिलीं. पाँच वर्ष पहले पाकिस्तान में शर्मसार होकर विदेश गए शरीफ़ को इस बार देश की ताक़तवर सेना का साथ मिला हुआ था.
सेना का साथ होने के कारण उम्मीद थी कि वो आसानी से चुनाव जीत जाएंगे. बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपल्स पार्टी 54 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही.
पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक ये ज़रूरी है कि चुनाव के तीन हफ़्ते के भीतर यानी 29 फ़रवरी तक सरकार अस्तित्व में आ जाए.
पाकिस्तान की संसद में कुल 336 सीटें हैं. इनमें 266 सीटों पर सीधा मतदान होता है और 70 सीटें आरक्षित हैं. 60 सीटें महिलाओं के लिए और 10 सीटें ग़ैर-मुसलानों के लिए रिज़र्व हैं.
ये 70 सीटें हर पार्टी को उसके नेशनल असेंबली में प्रतिनिधित्व के अनुपात में दी जाती हैं.
राजनीतिक विश्लेषक रफ़ीउल्लाह काकड़ ने बीबीसी उर्दू को बताया, “ये एक खंडित जनादेश है. अब पार्टियों को मिलजुल कर काम करने के लिए साझा ग्राउंड तलाशना होगा.”
इमरान और नवाज़ शरीफ़ दोनों ने ही जीत की घोषणा की है लेकिन अब एक गठबंधन सरकार का बनना तय है.
सियासी उठापटक के बीच चुनाव हारने वाले निर्दलीय उम्मीदवार धांधली का आरोप लगाते हुए कोर्ट का रुख़ कर रहे हैं. इमरान की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने देश भर में चुनाव आयोग के दफ़्तरों के सामने प्रदर्शन किए हैं.
अब पाकिस्तान में क्या होगा. आइए एक नज़र डालते हैं अलग-अलग संभावनाओं पर -
1. नवाज़ शरीफ़ और बिलावल भुट्टो एक साथ आएं
यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की प्रोफ़ेसर समीना यासमीन के मुताबिक एक संभावना ये है कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी अन्य छोटी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे.
इन दोनों दलों के बीच 2022 में इमरान ख़ान के विश्वास मत हारने के बाद भी एक गठबंधन बना था. इसी गठबंधन ने अगस्त 2023 तक पाकिस्तान पर राज किया. इसके बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई और देश में कार्यवाहक सरकार अस्तित्व में आई.
प्रोफ़ेसर समीना यासमीन कहती हैं, “बात इस पर अड़ेगी कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा. इसके अलावा अलग-अलग प्रांतों में सरकार का गठन दोनों पार्टियों के बीच बात बिगाड़ सकता है.”
नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने कराची के बड़े दल मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) से भी बातचीत की है.एमक्यूएम के पास 17 सीटें हैं. शरीफ़ निर्दलीय उम्मीदवारों को भी रिझाने के प्रयास में हैं.
रविवार को शहबाज़ शरीफ़ पीपीसी के चेयरमैन आसिफ़ अली ज़रदारी से मिले थे. ऐसा लगता है कि पीपीसी अपने विकल्पों पर ग़ौर करने के लिए किसी जल्दबाज़ी में नहीं है. सोमवार को पार्टी की कार्यकारिणी इस्लामाबाद में एक बैठक कर रही है.
2. बिलावल भुट्टो इमरान ख़ान के साथ गठबंधन करें
बीबीसी उर्दू ने पीपीपी की वरिष्ठ नेता शेरी रहमान ने पूछा कि क्या वो पीटीआई के साथ आने को तैयार हैं? रहमान ने साफ़ कहा है कि उनकी पार्टी के दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं.
हालांकि इमरान ख़ान के मीडिया सलाहकार ज़ुल्फ़ी बुख़ारी ने बीबीसी को बताया है कि उनकी पार्टी को अगर बहुमत नहीं मिलता है तो वे गठबंधन सरकार बनाने के बजाय विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे.
कुछ ऐसे ही बयान अतीत में जेल में 14 साल की सज़ा काट रहे इमरान ख़ान ने भी दिए थे. उन्होंने 2018 में कहा था कि गठबंधन सरकारें कमज़ोर होती हैं. लेकिन इसके बाद उन्होंने एमक्यूएम के साथ गठबंधन बनाया था.
3. मुस्लिम लीग (नवाज़) और पीटीआई अन्य पार्टियों से मिलकर गठबंधन बना लें
ये एकदम चौंकाने वाली संभावना है, विशेषकर पीटीआई के लिए. लेकिन अप्रत्याशित दौर में कुछ भी मुमकिन है.
मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता आज़म नज़ीर तरार ने ‘एक मिली-जुली गठबंधन सरकार' की बात की है जिसमें सभी दल शामिल हों.
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के उदय चंद्रा ने बीबीसी को बताया, “जिन लोगों ने इमरान के लिए वोट नहीं डाले वो भी इस बात से नाराज़ हैं कि ख़ान को फौज ने बेवजह तंग किया है. ऐसा माना जा रहा है कि लोकतांत्रिक ईमानदारी का उल्लंघन हुआ है.”
उदय चंद्रा कहते हैं, “निर्दलीय उम्मीदवारों को जिताकर लोग फ़ौज को साफ़ संकेत दे रहे हैं कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी सरकार का सम्मान करें.”
4. पीटीआई समर्थित निर्दलीय किसी छोटे दल में मिल जाएं
एक संभावना ये भी जताई जा रही है कि पीटीआई के समर्थन वाले निर्दलीय उम्मीदवार किसी छोटी पार्टी में मिल जाएं और गठबंधन सरकार बनाने का प्रयास करें.
इससे उनकी सीटें भी बढ़ेंगी और नेशनल असेंबली की 60 महिला सीटों के मामले में भी उन्हें लाभ हो सकता है.
पाकिस्तान के संविधान के अनुसार प्रति 3.5 सीटों के बदले हर पार्टी को एक महिला सीट मिलती है. लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार किसी दल से जुड़े नहीं हैं इसलिए उन्हें इसका फ़ायदा नहीं मिल सकता.
चुनाव के सारे नतीजे घोषित होने के 72 घंटे के भीतर निर्दलीय उम्मीदारों को ये भी बताना होता है कि वो किसी पार्टी के साथ मिल रहे हैं और स्वतंत्र ही रहेंगे.
लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैनेजमेंट साइंसज़ की अस्मा फ़ैज़ कहती हैं कि इसकी संभावना न के बराबर है. उन्हें नहीं लगता कि पीटीआई किसी गठबंधन का हिस्सा बनना चाहेगी क्योंकि किसी छोटी पार्टी में निर्दलियों के विलय के बाद भी उन्हें बहुमत नहीं मिलेगा.
अस्मा फ़ैज़ कहती हैं, “पीटीआई के पास छोटी पार्टियों में विलय से कोई लाभ नहीं है क्योंकि इनके साथ कोई बड़ी संख्या में सांसद नहीं है. हाँ एक ढंग से ये कानूनी बाध्यता हो सकती है.”
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