सार्वजनिक शौचालय, चेंजिंग रूम या होटल में छिपे हुए कैमरे से कैसे बचा जाए, जानिए इस रिपोर्ट में

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बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी में काम करने वाली 35 वर्षीय महिला का वॉशरूम में वीडियो बनाए जाने का मामला सामने आया है.

आरोप है कि महिला का ही सहकर्मी बगल के क्यूबिकल में खड़ा होकर मोबाइल से उसका वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था.

महिला को दरवाजे पर परछाईं दिखी, तो उन्होंने कमोड पर चढ़कर देखा और अभियुक्त को रंगे हाथ पकड़ लिया.

बीबीसी के सहयोगी पत्रकार इमरान क़ुरैशी के मुताबिक़, पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार किया, लेकिन बाद में उसे ज़मानत मिल गई. घटना के बाद कंपनी ने अभियुक्त को नौकरी से निकाल दिया.

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ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं जब बाथरूम, चेंजिंग रूम और होटल के कमरों में हिडन कैमरे पाए जाते हैं.

2015 में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इसी तरह की एक शिकायत की थी जिसमें एक स्टोर के सीसीटीवी कैमरे का मुंह चेंजिंग रूम की ओर था.

ऐसी घटनाओं से डरकर सार्वजनिक शौचालय, चेंजिंग रूम या होटल जाना बंद तो नहीं किया जा सकता, मगर सतर्क रहकर इस तरह के कैमरों के शिकार होने से बचा जा सकता है.

वर्ष 2018 में बीबीसी हिंदी ने यह कहानी पहली बार प्रकाशित की थी. अब हम इसे दोबारा प्रकाशित कर रहे हैं.

एक बाथरूम में लगे हिडन कैमरे से ली गई तस्वीर

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हिडन कैमरों का पता कैसे लगाएं

सबसे पहले ये जान लें कि कैमरे कहां-कहां छिपे हो सकते हैं.

हिडन कैमरे काफ़ी छोटे होते हैं, लेकिन ये आपकी सारी गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकते हैं. फिर चाहे आप बाथरूम में हों, किसी स्टोर के चेंजिंग रूम में कपड़े बदल रहे हों या होटल के कमरे में अपने पार्टनर के साथ हों.

इन कैमरों को कहीं भी आसानी से छिपाया जा सकता है, जैसे कि-

  • शीशे के पीछे
  • दरवाज़े में
  • दीवार के किसी कोने में
  • छत पर
  • लैंप में
  • फ़ोटो फ़्रेम में
  • टिश्यू पेपर के डब्बे में
  • किसी गुलदस्ते में
  • स्मोक डिटेक्टर में

तो कैसे पता करें कि कैमरा है कहां?

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पहले जांच लें: साइबर एक्सपर्ट कहते हैं कि सबसे पहले तो आप सतर्क रहें. जब भी आप सार्वजनिक शौचालय, चेंजिंग रूम या होटल के किसी कमरे में जाएं तो चारों ओर अच्छे से देख लें. आस-पास रखे सामान को देख लें. छत के कोनों में भी देखें.

कोई छेद तो नहीं है: कहीं कोई छेद दिखे तो उसके अंदर झांक कर देखें कि कहीं उसमें कुछ लगा तो नहीं है. दरअसल कैमरों को शीशे के पीछे, फोटो फ्रेम में या बैक डोर जैसी जगहों पर लगा दिया जाता है. थोड़ा-सा सतर्क रहकर इन्हें पकड़ सकते हैं.

कोई तार दिख रहा है: ये भी देखें कि कहीं से एक्स्ट्रा तार जाता हुआ तो नहीं दिख रहा. अगर कोई तार दिखे तो पता करें कि कहां तक जा रहा है. हो सकता है कि वो आपको कैमरे तक ले जाए. कई कैमरों में कोई तार नहीं होता. वो बैटरी से चलते हैं और मैगनेट की तरह कहीं भी चिपक जाते हैं.

लाइट बंद करके देख लें: अगर चेंजिंग रूम में या होटल के किसी कमरे में हैं तो एक बार लाइट बंद करके चारों ओर देखें. अगर कहीं एलईडी की रोशनी दिखे तो हो सकता है कि वो कैमरा हो. दरअसल कुछ नाइट विज़न कैमरे होते हैं, जो अंधेरे में हो रही गतिविधि को भी रिकॉर्ड कर लेते हैं. इन कैमरों में एलईडी लाइट लगी होती है. अंधेरे में इसे पकड़ा जा सकता है.

मिरर टेस्ट: चेंजिंग रूम, बाथरूम और कमरों में हर जगह शीशे लगे होते हैं जिनके सामने आप कपड़े बदलते हैं, टॉयलेट करते हैं. होटल के कमरों में भी बड़ा-सा शीशा होता है. इसलिए हो सकता है कि शीशे के दूसरी तरफ से आपको कोई देख रहा हो या पीछे कोई कैमरा लगा हो जो सब रिकॉर्ड कर रहा हो. ऐसे में शीशे को जांचना भी ज़रूरी है. इसके लिए शीशे पर उंगली रखें और देखें. अगर आपकी उंगली और शीशे पर बन रही इमेज के बीच थोड़ा गैप दिखे, तो शीशा सही है. लेकिन अगर आपकी उंगली और इमेज में गैप ना दिखे मतलब कोई गड़बड़ है.

फ्लैश ऑन करके देख लें: लाइट बंद कर मोबाइल का फ्लैश ऑन करें और चारो ओर देखें. अगर कहीं से रिफ्लेक्शन आए तो हो सकता है कि कैमरे के कांच से आ रहा हो. उस दिशा में जाकर अच्छे से देखें कि कहीं हिडन कैमरा तो नहीं है.

ऐप और डिटेक्टर: आपको कई ऐप मिल जाएंगे जिससे आप हिडन कैमरे का पता लगा सकते हैं. लेकिन साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक कई ऐप फ़ेक भी हो सकते हैं, जो कुछ बता ही नहीं पाएंगे और उल्टा आपके फ़ोन में ही वायरस छोड़ जाएंगे. इसके अलावा कुछ डिटेक्टर डिवाइस भी मार्केट में उपलब्ध हैं, जिन्हें खरीदकर आप अपने पास रख सकते हैं. लेकिन ये महंगे होते हैं, जिन्हें हर कोई ख़रीद नहीं सकता. ये अक्सर पुलिस के पास होते हैं.

कैमरा दिख जाए तो क्या करें

अगर आपको हिडन कैमरा दिख जाए तो घबराएं नहीं. तुरंत पुलिस से संपर्क करें. कैमरे को न छुएं, क्योंकि उसपर अभियुक्त के फ़िंगरप्रिंट होंगे. पुलिस के आने तक वहीं रुके.

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वीडियो का क्या करते हैं

साइबर एक्सपर्ट विनीत कुमार ने इस रिपोर्ट के लिए हमें बताया था कि, "एक तो लोग ख़ुद देखने के लिए ऐसे वीडियो बनाते हैं. दूसरा इसका एक बहुत बड़ा मार्केट भी है. इन वीडियो को बेच दिया जाता है. इन्हें वेबसाइट्स पर डाल दिया जाता है. इन वीडियो को बहुत लोग देखते हैं."

"कई बार लड़कियां इसकी शिकायत नहीं करतीं. उन्हें लगता है कि किसी को बताएंगी तो उनकी ही बदनामी होगी. लेकिन उन्हें डरना नहीं चाहिए, बल्कि पुलिस से संपर्क कर मदद मांगनी चाहिए."

भारत सरकार की वेबसाइट (cybercrime.gov.in) पर भी ऐसे मामले दर्ज़ किए जाते हैं. साथ ही महिला आयोग की साइबर सेल और महिला और बाल विकास मंत्रालय के साइबर सेल में भी इसकी शिकायत कर सकते हैं.

छिपे हुए कैमरों का पता लगाने के लिए साइबर एक्सपर्ट्स ने कई ट्रिक्स तो बताईं, लेकिन वो सबसे ज़्यादा ज़ोर सतर्क रहने पर देते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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