पुलिस की सख़्ती के बावजूद किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च नहीं थमा

न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए क़ानून बनाने और स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफ़ारिशों को लागू करने की मांग को लेकर निकले पंजाब के किसान मंगलवार दोपहर पंजाब-हरियाणा के शंभू सीमा पर पहुँचे.

किसान जब हरियाणा सीमा में दाखिल होने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की.

जब किसान नहीं रुके तो पुलिस ने उन पर आंसू गैस के गोले बरसाए. किसान और सुरक्षा बलों के जवान इसके बाद आमने सामने हो गए. बुधवार सुबह से एक बार टकराव शुरू होने के आसार हैं.

पंजाब-हरियाणा की शंभू सीमा पर मौजूद बीबीसी संवाददाता अभिनव गोयल के मुताबिक़ पुलिस ने किसानों पर ड्रोन से आंसू गैस के गोले बरसाए.

ड्रोन से एक मिनट में आंसू गैस के 20 से 25 गोल बरसाए गए. यह सिलसिला शाम सात-आठ बजे तक चलता रहा. पुलिस ने किसानों पर रबर की गोलियां भी चलाईं.

देर शाम तक किसानों ने पुलिस की ओर से लगाए कंक्रीट के बैरिकेड को हटाना शुरू कर दिया था. दूसरी तरफ़ देर रात भी पुलिस के जवान आंसू गैस के गोले छोड़ते दिखे.

पुलिस ने किसानों को कहाँ रोक रखा है?

इस दौरान क़रीब 35 लोगों के घायल होने की ख़बर है, लेकिन इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है.

वहीं हरियाणा पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा है कि किसानों के साथ टकराव में वाटर कैनन, आंसू गैस और हल्का बल प्रयोग कर क़ानून-व्यवस्था बनाए रखी गई.

हरियाणा पुलिस का कहना है कि पथराव में 24 पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं. इनमें से 15 पुलिसकर्मी शंभू बॉर्डर पर और 9 पुलिसकर्मी दाता सिंह बॉर्डर जींद में घायल हुए हैं.

हरियाणा पुलिस ने पंजाब से आए हज़ारों किसानों को दिल्ली से 212 किलोमीटर पहले ही शंभू बार्डर पर रोक दिया है. जहाँ किसानों के जत्थे को रोका गया है, वहाँ से अंबाला 12 किमी और पानीपत क़रीब 118 किमी दूर है.

किसान बुधवार सुबह एक बार फिर बैरिकेड हटा कर हरियाणा की सीमा में दाखिल होकर दिल्ली की ओर बढ़ने का काम शुरू कर सकते हैं.

किसानों को रोकने के लिए वहाँ हरियाणा पुलिस के जवानों के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी तैनात किया गया है.

शंभू बॉर्डर पर जगह-जगह लंगर लगे हुए हैं, जिनमें आंदोलनकारी किसानों के लिए खाना बन रहा है. एक जगह पूरी रात चाय पिलाने के लिए लंगर लगा हुआ था.

किसान अपनी गाड़ियों में आराम कर रहे हैं. नाके पर क़रीब 50 किसान देर रात तक मोर्चा संभाले हुए थे.

किसान संगठन क़रीब एक हज़ार गाड़ियों का काफिला लेकर निकले हैं. इनमें हर तरह की गाड़िया शामिल हैं. इन गाड़ियों में बड़ी संख्या में लोग सवार हैं.

पंजाब से आ रहे किसानों को पंजाब की पुलिस या प्रशासन ने नहीं रोका. किसानों को रास्ता देने के लिए पुलिस ने सीमा से 10-12 किमी पहले राजपुरा में ही आम ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया है.

उनका कहना था कि हरियाण में तो इंटरनेट की सेवा बंद है, लेकिन पंजाब में इंटरनेट पर किसी तरह की रोक नहीं है.

शंभू बॉर्डर पर सीमेंट के बैरियर और कटीली तारें लगाई गई थीं. इस तरह अवरोध के कई लेयर खड़े किए गए हैं. एक लेयर से दूसरे लेयर के बीच क़रीब 100 मीटर की दूरी रखी गई है.

क्या है किसान संगठनों की प्रमुख मांगें

किसान एमएसपी पर क़ानून बनाने, स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफ़ारिशों को लागू करने, सभी फसलों के लिए एमएसपी घोषित करने और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में कथित तौर पर किसानों को कुचलकर मारने के दोषियों पर कार्रवाई समेत अन्य मांगों को लेकर दिल्ली की ओर रवाना हुए हैं.

किसानों के दो बड़े संगठनों, संयुक्त किसान मोर्चा (ग़ैर राजनीतिक) और किसान मज़दूर मोर्चा ने 13 फ़रवरी को 'दिल्ली चलो' का नारा दिया था. मंगलवार को पंजाब के फतेहगढ़ से किसानों ने दिल्ली कूच शुरू किया था.

पंजाब किसान मज़दूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंढेर मंगलवार शाम घोषणा की कि अब बुधवार सुबह एक बार फिर पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पार करके, हरियाणा में दाखिल होने की कोशिश की जाएगी.

उन्होंने कहा, "भारत के इतिहास में, भारतीय राजनीति में ये एक काला दिन है. आज देश के किसान और खेत मज़दूर के ऊपर इस तरह से हमला किया गया है. किसानों की जितनी लीडरशिप है वो मोर्चे पर डटी रहेगी. हम हज़ारों किसान हैं, हम उन्हें बताने जा रहे हैं कि अब अगला कार्यक्रम कल सुबह शुरू होगा."

आंदोलन में शामिल एक किसान ने बताया, ''हमें अपनी ही राजधानी में दाख़िल नहीं होने दिया जा रहा है. ये कितनी बड़ी त्रासदी है. बाद में यही लोग हमें परजीवी, आंदोलनजीवी और खालिस्तानी बुलाते हैं. मैं पूर्व सैनिक हूँ. हमने पूरा देश देखा है. हम सरकारों से नहीं डरते.''

किसान आंदोलन को देखते हुए दिल्ली की अन्य राज्यों से लगती सीमाओं सिंघु, टीकरी और ग़ाजीपुर बॉर्डर पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढा दी गई है. दिल्ली की सभी सीमाओं पर बैरियर लगाए गए हैं.

इससे पहले किसान संगठनों और सरकार के बीच चंडीगढ़ में हुई बातचीत बेनतीजा रही थी. बातचीत में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय शामिल हुए थे.

केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच अधिकांश मामलों पर सहमति बन चुकी थी. उन्होंने आशंका जताई कि आंदोलन में शामिल लोगों में से कुछ ऐसे भी हो सकते हैं जो समाधान के बजाए इसे समस्या के रूप में देखना चाहते हैं.

कांग्रेस की एमएसपी पर क़ानून की गारंटी

भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि अगर केंद्र में उनकी सरकार बनी तो किसानों को एमएसपी की क़ानूनी गारंटी देंगे.

उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर किसानों को संबोधित करते अपने एक पोस्ट में आज के दिन को ऐतिहासिक बताया.

राहुल गांधी ने लिखा, “किसान भाइयों आज ऐतिहासिक दिन है! कांग्रेस ने हर किसान को फसल पर स्वामीनाथन कमीशन के अनुसार MSP की क़ानूनी गारंटी देने का फ़ैसला लिया है. यह क़दम 15 करोड़ किसान परिवारों की समृद्धि सुनिश्चित कर उनका जीवन बदल देगा. न्याय के पथ पर यह कांग्रेस की पहली गारंटी है.''

हाई कोर्ट पहुँचा किसान आंदोलन का मुद्दा

किसानों के प्रदर्शन को लेकर मंगलवार को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में दो याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इनमें से एक याचिका में दिल्ली जाने के लिए बॉर्डर सील करने के ख़िलाफ़ थी और दूसरी याचिका प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ थी.

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस लपिता बनर्जी की डिविजन बेंच ने मैत्रीपूर्ण तरीक़े से मुद्दा सुलझाने के लिए कहा. बेंच ने राज्य सरकारों से कहा है कि वो प्रदर्शनकारियों के लिए जगह चिह्नित करें.

हाई कोर्ट ने केंद्र, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारी भारत के नागरिक हैं और उनके पास देश में मुक्त रूप से आने-जाने का अधिकार है. कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वो नागरिकों के अधिकार को सुरक्षित करे और इसकी वजह से असुविधा न हो.

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