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ट्रंप की युद्ध विराम घोषणा पर ईरान का जवाब, क्या बनेगी बात?
- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, उत्तरी अमेरिका
ईरान ने शनिवार को अपने परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमले का जवाब देने का वादा किया था और अब उसने ऐसा कर दिया है.
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, क़तर में मौजूद अमेरिकी ठिकाने पर दागी गई सभी ईरानी मिसाइलों को नष्ट कर दिया गया और इसमें कोई अमेरिकी हताहत नहीं हुआ है.
हालांकि अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़, ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि यह हमला उनकी जवाबी कार्रवाई का अंत नहीं है.
अब डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दावा किया है कि सभी पक्ष युद्ध विराम पर सहमत हो गए हैं और उन्हें उम्मीद है कि इससे संघर्ष का आधिकारिक अंत हो जाएगा.
लेकिन ईरान ने कहा है कि युद्ध विराम पर कोई समझौता नहीं हुआ है. इसराइल ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
उधर मंगलवार सुबह इसराइल की फ़ायर और रेस्क्यू सर्विस ने बताया है कि ईरान के ताज़ा मिसाइल हमलों में देश के दक्षिणी हिस्से में तीन लोगों की मौत हो गई है.
इसराइली अधिकारियों ने बताया, "हमने प्रभावित जगह से घना धुंआ उठते हुए देखा और हम जब हम नज़दीक पहुंचे, तो पाया कि वहां कई इमारतों को नुक़सान पहुंचा था."
सीज़फ़ायर: ट्रंप और अराग़ची ने क्या कहा?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगले 24 घंटे में युद्ध आधिकारिक रूप से समाप्त हो जाएगा.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "यह एक ऐसा युद्ध है, जो वर्षों तक चल सकता था और पूरे मध्य पूर्व को नष्ट कर सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और कभी नहीं होगा."
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस इसराइल-ईरान संघर्ष को '12 दिवसीय युद्ध' कहा है.
13 जून को इसराइल ने 'ऑपरेशन राइज़िंग लायन' के तहत ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए.
इसराइल का दावा है कि यह कार्रवाई ईरान की परमाणु हथियार हासिल करने की महत्वाकांक्षा को रोकने के लिए ज़रूरी थी. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने तेल अवीव पर मिसाइल हमले किए.
अमेरिका इस संघर्ष में स्पष्ट रूप से इसराइल के साथ खड़ा रहा और उसने भी ईरान के तीन परमाणु केंद्रों पर हमले किए. अमेरिका के जवाब में ईरान ने भी मध्य पूर्व में उसके सैन्य अड्डों को निशाना बनाया.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने एक्स पर लिखा, "जैसा कि ईरान बार-बार साफ़ कर चुका है: जंग ईरान ने नहीं, इसराइल ने शुरू की है."
अराग़ची ने बताया, "अभी तक किसी भी तरह का 'संघर्ष विराम' या सैन्य कार्रवाई रोकने पर कोई समझौता नहीं हुआ है. लेकिन अगर इसराइली हुकूमत ईरानी समय के मुताबिक़ सुबह 4 बजे तक ईरान के ख़िलाफ़ अपनी ग़ैरक़ानूनी जंग रोक देती है, तो हमारा जवाबी हमला जारी रखने का कोई इरादा नहीं है."
अब्बास अराग़ची का कहना है कि उनकी तरफ़ से सैन्य कार्रवाई रोकने का फ़ैसला बाद में लिया जाएगा.
क्या ट्रंप का फ़ैसला जोख़िम भरा था?
शनिवार रात को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अमेरिकी हितों पर ईरान के किसी भी हमले का अमेरिका मुंहतोड़ जवाब देगा. उन्होंने कहा था कि ज़रूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना और भी ठिकानों पर हमला कर सकती है.
दुनिया ने 24 घंटे से ज़्यादा इंतज़ार किया कि ईरान का अगला क़दम क्या होगा. जब ईरान ने हमले किए तो लोगों का ध्यान एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर गया और कुछ घंटों बाद उन्होंने अपनी बात रखी.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "ईरान ने उनके परमाणु कार्यक्रम पर हुए अमेरिका हमलों का आधिकारिक रूप से काफ़ी कमज़ोर जवाब दिया. हमें इसकी उम्मीद थी और हमने इसे बहुत प्रभावी ढंग से रोका."
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अपना ग़ुस्सा निकाल लिया है और उम्मीद जताई कि अब ईरान शांति और सद्भाव की ओर बढ़ सकता है.
अगर वाकई नुक़सान कम हुआ है और ईरान की ओर से कोई और हमला नहीं होता, तो ट्रंप भी जवाबी हमले से बचना चाहेंगे और बातचीत की उम्मीद रखेंगे.
अगर हालात वैसे ही रहे जैसे ट्रंप ने बताया, तो यह मुमकिन है.
ट्रंप का हालिया हमला एक बड़ा जोख़िम भरा क़दम था, लेकिन इसके नतीजे अब सामने आने लगे हैं.
ऐसा ही कुछ जनवरी 2020 में हुआ था, जब ट्रंप ने बगदाद में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के नेता क़ासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था.
इसके बाद ईरान ने इराक़ में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागीं.
इस हमले में 100 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हुए, लेकिन अमेरिका ने लड़ाई को आगे बढ़ाने से परहेज किया. आख़िरकार दोनों ओर से संयम रखा गया.
संघर्ष बढ़ा तो क्या हो सकता है?
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार को किए गए ताज़ा हमलों में ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर उतनी मिसाइलें दागी, जितने अमेरिका के लड़ाकू विमानों ने बम गिराए थे.
इसके साथ ही ईरान ने क़तर की सरकार को हमले से पहले जानकारी दी थी, जिसके लिए ट्रंप ने आभार व्यक्त किया है. यह इशारा है कि ईरान लड़ाई बढ़ाना नहीं चाहता, बल्कि बराबरी का जवाब देना चाहता है.
दिनभर ट्रंप का ध्यान तेल की क़ीमतों, अमेरिकी मीडिया की ख़बरों और रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के इस सुझाव पर रहा कि कोई बाहरी देश ईरान को परमाणु हथियार दे सकता है.
कनाडा में जी-7 की बैठक से वापस आते समय ट्रंप ने विमान में पत्रकारों से कहा था कि अमेरिकी सेना ईरानी ख़तरे के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, "हमारे पास ऐसे बेहतरीन लोग हैं, जो अपनी हिफ़ाज़त करना जानते हैं. हमारे सैनिक तैयार हैं."
अगर ईरान फिर हमला करता है और उसमें किसी अमेरिकी नागरिक की मौत होती है या बड़ा नुक़सान होता है, तो ट्रंप पर जवाबी कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा.
रविवार को अमेरिकी अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा था कि पहले के अमेरिकी नेताओं के उलट, ये राष्ट्रपति (ट्रंप) अपनी चेतावनियों पर अमल करते हैं.
फ़िलहाल ईरान इस टकराव से निकलने का रास्ता दिखा रहा है और ट्रंप इस रास्ते को अपनाने को तैयार दिख रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित