बिहार में चुनाव आयोग की ये प्रक्रिया सवालों के घेरे में क्यों? द लेंस
बिहार में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है.
वजह है बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न जिसे एसआईआर भी कहा जा रहा है, यानी एक ऐसी प्रक्रिया जिसके तहत चुनाव आयोग का कहना है कि वो मतदाता सूची को ठीक कर रहा है.
उसका कहना है कि ये एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका मक़सद वोटर लिस्ट को ठीक करना है, यानी उसमें से डुप्लीकेट, मृत लोगों के नाम, या फिर ऐसे नाम हटाना जो गलत पते पर दर्ज हैं.
लेकिन विपक्ष का आरोप है कि चुनाव से पहले इस तरह लाखों नाम हटाना सीधे तौर पर एक समुदाय विशेष और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को निशाना बनाना है.
अब इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि कितने लोगों के पास अपने दावे साबित करने के लिए काग़ज़ात हैं या कितने लोगों तक सरकारी अधिकारी दूर-दराज़ के इलाक़ों में भी पहुंच पा रहे हैं? आखिर ये प्रक्रिया पहले क्यों नहीं अपनाई गई?
बड़ी आबादी जो प्रदेश से बाहर रहती है वो कैसे अपना नाम मतदाता सूची में रख पाएगी, क्या हर वर्ग के लोगों के पास दस्तावेज़ हैं?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए भारतीय जनता पार्टी के सांसद संजय जायसवाल, भारत जोड़ो अभियान की राष्ट्रीय सचिव और समन्वयक कामायनी स्वामी और बिहार से बीबीसी संवाददाता सीटू तिवारी.
प्रोड्यूसरः शिवालिका पुरी
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः सुमित वैद्य
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां कर सकते हैं. आप हमें एक्स, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)



