ग्रेच्युटी क्या होती है और इसे कैसे कैलकुलेट किया जाता है? - पैसा वसूल
अगर आप जॉब करते हैं तो निश्चित तौर पर आपने ग्रेच्युटी टर्म ज़रूर सुना होगा. आज के पैसा वसूल में जवाब उन सभी सवालों से ग्रेच्युटी से जुड़े हुए हो सकते हैं.

ग्रेच्युटी वो रकम है, जो कंपनी या आपका एम्प्लॉयर आपकी कई सालों की सेवाओं के बदले आपको देता है. ग्रेच्युटी रिटायरमेंट पर या नौकरी छोड़ने या नौकरी खत्म हो जाने पर मिलती है.
सरकार 1972 में ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम यानी पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट लेकर आई. इस अधिनियम के तहत कंपनियों के लिए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान करना अनिवार्य किया गया, बशर्ते वो निर्धारित टर्म और कंडीशन पूरी करते हों.
यह नियम कर्मचारी व संस्था दोनों के लिए ही लागू होते हैं. कोई भी कंपनी या संस्था इस अधिनियम के दायरे में आएगी, अगर उसके कर्मचारियों की संख्या बीते 12 महीनों में किसी भी एक दिन 10 या उससे अधिक हो जाती है.
ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम का मूलभूत सिद्धांत हैं - 'वन्स कवर्ड, ऑलवेज कवर्ड.' यानी कंपनी यदि बाद में अपने कर्मचारियों की संख्या 10 से कम भी कर लेती है, तो भी उसे कर्मचारी को ग्रेच्युटी का भुगतान करना ही होगा.
प्रेज़ेंटरः प्रेरणा
प्रोड्यूसरः दिनेश उप्रेती
शूट/एडिटः सुखमन दीप सिंह
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित



