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भारत ने पहली बार ट्रेन से अग्नि-प्राइम मिसाइल की लॉन्च, इससे क्या बदल जाएगा, पांच बड़ी बातें
भारत ने बुधवार को पहली बार रेल-बेस्ड मोबाइल लॉन्चर से मध्यम दूरी की अग्नि-प्राइम बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया.
रेल-बेस्ड का मतलब है कि यह लॉन्चर रेल पटरियों पर चलने वाला है और वहीं से मिसाइल को दाग सकता है.
यह अगली पीढ़ी की मिसाइल है जो 2000 किलोमीटर की दूरी तक निशाना लगा सकती है और इसमें कई अत्याधुनिक क्षमताएं हैं.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ, स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड और सशस्त्र बलों को बधाई दी है.
डीआरडीओ ने भी इसे स्ट्रैटेजिक बलों के लिए एक बड़ा 'फोर्स मल्टिप्लायर' बताया है. ऐसे में जानते हैं कि परीक्षण के क्या मायने हैं, पांच बड़ी बातें:
1. भारत के लिए क्यों है ख़ास
यह परीक्षण भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है. इस मुद्दे पर बीबीसी संवाददाता अभय कुमार सिंह ने रक्षा विशेषज्ञ संजीव श्रीवास्तव से बातचीत की.
संजीव श्रीवास्तव के मुताबिक़, "अग्नि-प्राइम जो बैलिस्टिक मिसाइल है, उसका सफल प्रक्षेपण रेल नेटवर्क के माध्यम से किया गया. यह बहुत बड़ी सफलता है".
उन्होंने कहा कि यह मिसाइल दो चरणों में काम करने वाली सतह से सतह पर मार करने वाली सॉलिड फ़्यूल आधारित मिसाइल है. इसे कैनिस्टर यानी बंद डिब्बे जैसी प्रणाली से तुरंत दागा जा सकता है.
संजीव श्रीवास्तव बताते हैं कि रेल से दागने की वजह से यह प्रणाली देश के सबसे दूरस्थ इलाकों तक ले जाई जा सकती है. उनके अनुसार, "जहां रेल नेटवर्क है, वहां से इसे आसानी से तैनात किया जा सकता है और दुश्मन के किसी भी ठिकाने को निशाना बनाया जा सकता है".
इस वजह से इसे भारत की सामरिक शक्ति में बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है.
2. कौन-कौन से देश पहले से ऐसा कर चुके हैं
इस उपलब्धि के बाद भारत दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो गया है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने एक्स पोस्ट में बताया है, "इस सफल परीक्षण ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला दिया है, जिनके पास चलते हुए रेल नेटवर्क से कैनिस्टराइज़्ड लॉन्च सिस्टम विकसित करने की क्षमता है".
उन्होंने यह भी बताया कि यह लॉन्चर सीधे रेल पटरियों पर कहीं भी चल सकता है. इसे पहले से कोई खास तैयारी नहीं चाहिए और यह पूरे देश में आसानी से ले जाया जा सकता है.
साथ ही इसमें यह क्षमता है कि यह कम समय में और दुश्मन की नज़र से बचे रहते हुए मिसाइल दाग सकता है.
संजीव श्रीवास्तव के अनुसार, "भारत के अलावा यह क्षमता अमेरिका, चीन और रूस के पास है. उत्तर कोरिया ने भी दावा किया है कि उसने ऐसा किया है लेकिन उसकी पुष्टि बाकी है.".
3. अग्नि-प्राइम मिसाइल की ख़ासियत
पीआईबी की तरफ़ से जारी जानकारी के मुताबिक़, अग्नि-प्राइम मिसाइल को अगली पीढ़ी की तकनीक के साथ तैयार किया गया है.
यह करीब 2000 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है और इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इसे जल्दी से लॉन्च किया जा सके, दुश्मन की नज़र में आए बिना.
यह मिसाइल पूरी तरह आत्मनिर्भर प्रणाली है, जिसमें कम्युनिकेशन और सिक्योरिटी से जुड़ी सारी व्यवस्थाएं पहले से लगी होती हैं.
डीआरडीओ ने कहा है कि यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा और सभी उद्देश्यों को पूरा किया. मिसाइल की उड़ान को ज़मीन पर मौजूद अलग-अलग स्टेशनों से ट्रैक किया गया और इसे "टेक्स्ट बुक लॉन्च" बताया गया.
पीआईबी ने यह भी कहा कि यह सफलता भविष्य में रेल आधारित प्रणालियों को सेवाओं में शामिल करने का रास्ता खोलेगी.
बता दें कि सड़क से दागी जाने वाली अग्नि-प्राइम को पहले ही कई सफल उड़ान परीक्षणों के बाद सेना में शामिल किया जा चुका है.
4. रेल बेस्ड लॉन्च के मायने
रेल आधारित लॉन्च सिस्टम के कई फायदे हैं. यह मिसाइल ट्रेन के डिब्बे जैसे लॉन्चर से किसी भी ट्रैक पर ले जाई जा सकती है.
इस पर बीबीसी संवाददाता चंदन जजवाड़े से रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य (ट्रैफिक) श्रीप्रकाश ने कहा, "रेलवे ट्रैक तो सभी जगह हैं. इसका मतलब यह हुआ कि लॉन्चिंग एरिया बहुत फैल गया. दुश्मन को जल्दी पता नहीं चलेगा कि मिसाइल कहाँ से दागी जाएगी".
उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रणाली स्थायी लॉन्च पैड से अलग है, जिन्हें दुश्मन पहचान सकता है.
वह कहते हैं, "मिसाइलों को टनल में छिपाकर रखा जा सकता है और जब चाहा, बाहर निकालकर दागा जा सकता है."
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि जब तक लॉन्चिंग होती है तब तक उस ट्रैक पर सामान्य रेल यातायात रोकना पड़ेगा.
इलेक्ट्रिफिकेशन के सवाल पर श्रीप्रकाश ने साफ़ किया कि अगर बिजली की आपूर्ति बाधित हो जाए तो डीज़ल इंजन का सहारा लिया जा सकता है.
उनका कहना है, "रेलवे में डीज़ल इंजन भी रहेंगे. डीज़ल इंजन बिजली पर निर्भर नहीं होते, उन्हें कहीं भी चलाया जा सकता है. ऐसे में डीज़ल का इस्तेमाल ज़्यादा बेहतर होगा."
5. डीआरडीओ के लिए कितनी बड़ी सफ़लता
इस उपलब्धि को भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम क़दम माना जा रहा है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि यह सफलता भारत को उन चुनिंदा देशों में लाती है जिनके पास चलते हुए रेल नेटवर्क से मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता है.
संजीव श्रीवास्तव का कहना है, "डीआरडीओ लगातार बड़ी सफलताएं अर्जित कर रहा है. यह मिसाइल उन सफलताओं की दिशा में एक बड़ा पड़ाव है. यह भारत के लिए गर्व की बात है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड के विज़न के साथ जुड़ता है".
उन्होंने यह भी कहा कि अब भारत न केवल अपनी सेनाओं के लिए हथियार बना रहा है बल्कि रक्षा निर्यात को भी बढ़ावा दे रहा है. "चाहे मिसाइलें हों या लड़ाकू विमान, कई राष्ट्र भारत के उत्पादों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. भारत सिक्योरिटी प्रोवाइडर के तौर पर अपनी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.