दिल्ली में नमाज़ पढ़ते लोगों के साथ बदसलूकी के बाद सब इंस्पेक्टर निलंबित

    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दिल्ली के इंद्रलोक इलाक़े में सड़क पर नमाज़ पढ़ते लोगों को लात मारते पुलिस सब-इंस्पेक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा है.

वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर कई लोग एक साथ नमाज़ पढ़ रहे हैं, तभी एक पुलिसकर्मी उन्हें लात मारकर उठाने लगता है.

उस वक्त वहां मौजूद कुछ लोग पुलिसकर्मी से बहस करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोग इस घटना की निंदा करते हुए दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी सज़ा की मांग करते दिख रहे हैं.

इस घटना के बाद इलाके के मेट्रो स्टेशन के आसपास लोगों ने इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया.

मेट्रो स्टेशन के बाहर शाम 6 बजे के बाद प्रदर्शन धीरे-धीरे खत्म होना शुरू हो गया.

पुलिसकर्मी को निलंबित किया गया

दिल्ली पुलिस ने इस घटना के ज़िम्मेदार सब-इंस्पेक्टर मनोज तोमर को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना से संबंधित पुलिसकर्मी के ख़िलाफ़ विभागीय जांच शुरू हो गई है. उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

उत्तर दिल्ली के डीसीपी मनोज कुमार मीणा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “वीडियो सामने आई थी. वीडियो वायरल हुई थी. उस वीडियो में जो पुलिसकर्मी दिख रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ एक्शन लिया गया है. जो पुलिस पोस्ट इंचार्ज थे, उनको सस्पेंड कर दिया गया है."

"अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है. हालात अब सामान्य हो गए हैं. जो लोकल लोग हैं, उनके साथ मिलकर ये मैसेज हमने सबको पहुंचाया है कि जो इलाके की कानून व्यवस्था है, उसे मेंटेन करना है. काफी लोग यहां से जा चुके हैं और अब ट्रैफिक भी खुल चुका है.”

घटनास्थल पर मौजूद लोगों का क्या कहना है?

घटनास्थल पर मौजूद एक बुज़ुर्ग ने कहा, "ये दिल्ली पुलिस ने बहुत बुरा किया है. नमाज़ियों को मारा है. कभी आजतक यहां ऐसा नहीं हुआ है."

वहां मौजूद एक युवा ने कहा, "ऐसा करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित की जगह हमेशा के लिए बर्खास्त करना चाहिए. अगर यह नहीं किया गया तो उसे देखकर दूसरे पुलिसवाले भी ऐसा कर सकते हैं. उसे हमेशा के लिए हटाया जाना चाहिए."

इस घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस से राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने लिखा, ''नमाज़ पढ़ते हुए व्यक्ति को लात मारता हुआ ये दिल्ली का जवान शायद इंसानियत के बुनियादी उसूल नहीं समझता."

"ये कौन सी नफ़रत है जो इस जवान के दिल में भरी है, दिल्ली पुलिस से अनुरोध है कि इस जवान के खिलाफ़ उचित धाराओं में मुक़दमा दर्ज करिये और इसकी सेवा समाप्त करिये.''

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर लिखा, "अमित शाह की दिल्ली पुलिस का मोटो है. शांति सेवा न्याय. पूरी शिद्दत से काम पर हैं."

मिस्टर हक नाम के एक यूज़र ने कांवड़ियों पर फूल बरसाते पुलिस वालों का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "दो इंडिया. इंद्रलोक दिल्ली मे नमाज़ पढ़ने वालों पर दिल्ली पुलिस लात मरती है. कांवड़ियों का बीच सड़क पर पुलिस फूल से स्वागत करती है.’’

जीनल एन गाला ने लिखा, ''दिल्ली की सड़कों पर खुल्लम-खुल्ला अधिनायकवाद. दिल्ली पुलिस इतनी संवेदनहीन क्यों है. क्या वो मुसलमानों के साथ जो सुलूक करती है क्या वैसा किसी और धार्मिक समूह के साथ करेगी.''

अशोक कुमार पांडेय ने नमाज़ पढ़ते युवा को लात मारते पुलिसकर्मी का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा.

"देखकर थोड़ी देर तो शॉक में रहा. ऐसी नीचता की उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी. सोच रहा हूँ कि पूरी दुनिया में जब यह वीडियो जाएगा तो क्या इमेज बनेगी मेरे देश की. शर्मनाक. शर्मनाक. शर्मनाक."

खुले में नमाज़ को लेकर होते रहे हैं विवाद

पिछले कुछ समय से सड़क पर नमाज़ पढ़ने को लेकर विवाद की ख़बरें आती रही हैं. गुरुग्राम में सड़क पर नमाज़ का विरोध कर रहे लोगों और पुलिस के बीच झड़पें हो चुकी हैं.

हरियाणा के गुरुग्राम में पिछले साल खुले में नमाज़ पढ़ने को लेकर हुए हुए विवाद में भीड़ ने एक मस्जिद पर हमला कर उसमें आग लगा दी थी, जिसमें 26 साल के एक इमाम की मौत हो गई थी. इसके बाद दक्षिण हरियाणा में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी.

खुले में नमाज़ के ख़िलाफ़ प्रदर्शन साल 2018 में शुरू हुए थे. वार्ताओं के बाद मुसलमान समूह खुले में नमाज़ के स्थलों की संख्या को 108 से कम करके 37 करने पर राज़ी हो गए थे.

इस साल प्रदर्शन किन कारणों से शुरू हुए ये अभी साफ़ नहीं है. विवाद के बाद अब मुसलमानों ने खुले में नमाज़ पढ़ने की जगहों की संख्या कम करके 20 कर दी है.

राजनीतिक इस्लाम पर शोध कर रहे हिलाल अहमद ने बीबीसी से कहा था, "ये उग्र समूह एक नागरिक समस्या का इस्तेमाल धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए कर रहे हैं. वो मुसलमानों से कह रहे हैं कि मस्जिदों में जाकर नमाज़ पढ़ें. समस्या ये है कि पर्याप्त संख्या में मस्जिदें ही नहीं हैं."

उनका कहना था कि गुरुग्राम में सिर्फ़ 13 मस्जिदें हैं जिनमें से सिर्फ़ एक ही शहर के नए इलाक़े में है. शहर में अधिकतर प्रवासी यहीं रहते हैं और काम करते हैं.

मुसलमानों की संपत्तियों की निगरानी करने वाले वक़्फ़ बोर्ड के स्थानीय सदस्य जमालुद्दीन कहते हैं कि बोर्ड की अधिकतर ज़मीनें शहर के बाहरी इलाक़ों में हैं जहां मुसलमानों की आबादी बहुत कम है.

वे कहते हैं कि ऐसे इलाक़ों में 19 मस्जिदों को बंद करना पड़ा है क्योंकि वहां पर्याप्त संख्या में नमाज़ी नहीं थे. उनके अनुसार बोर्ड के पास इतना पैसा नहीं है कि गुरुग्राम के महंगे इलाक़ों में ज़मीन ख़रीद सके.

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