कनाडा के मंत्री ने माना, अमेरिकी अख़बार को लीक किया था गृह मंत्री अमित शाह का नाम

कनाडा सरकार के विदेश उप मंत्री डेविड मॉरिसन ने देश की नागरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी को बताया है कि भारत सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कनाडाई नागरिकों को धमकी देने या उनकी हत्या के अभियान को मंजूरी दी थी.

मंगलवार को कनाडा में नागरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी की सुनवाई चल रही थी.

इस दौरान कमेटी की उपाध्यक्ष और कंज़र्वेटिव सांसद रेक्वेल डांचो ने कनाडा में नागरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल पूछ रही थीं.

पिछले साल जून में 45 साल के हरदीप सिंह निज्जर वैंकूवर के नज़दीक बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. कनाडा के प्रधानमंत्री इस हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था.

कमेटी की उपाध्यक्ष और कंज़र्वेटिव सांसद रेक्वेल डांचो ने कमेटी की सुनवाई के दौरान कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नथाली ड्रूइन से पूछा कि कनाडा सरकार की ओर से 'वॉशिंगटन पोस्ट' को कनाडा में होने वाले अपराध में भारत के गृह मंत्री के शामिल होने के बारे किसने बताया था?'

इस पर नथाली ड्रुइन ने बताया कि सरकार ने इस तरह की जानकारी पत्रकार से साझा नहीं की.

रेक्वेल डांचो अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट में 14 अक्तूबर को छपी रिपोर्ट के बारे में सवाल पूछ रही थीं. उस रिपोर्ट में अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा था कि भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कनाडा में सिख अलगाववादियों के ख़िलाफ़ अभियान के ऑर्डर दिए थे.

इसके बाद सांसद ने पूछा, "वो जानकारी पत्रकार को किसने दी थी? आपको इस बारे में पता नहीं है? आपने ये जानकारी नहीं दी थी, ठीक?"

कमेटी की सुनवाई में कनाडा केविदेश उप मंत्री डेविड मॉरिसन भी मौजूद थे.

इसके बाद डांचो ने डेविड मॉरिसन की ओर पलटते हुए पूछा, "मिस्टर मॉरिसन क्या आप कमेंट कर सकते हैं? क्या आपने ये जानकारी मुहैया करवाई थी?"

इसके जवाब में डेविड मॉरिसन ने कमेटी को बताया, ''श्योर, पत्रकार ने मुझसे कॉल करके इस बारे में पूछा. मैंने उस व्यक्ति के बारे में उन्हें जानकारी दी."

"वो वही पत्रकार थे जिन्होंने इस बारे में काफी लिखा था. पत्रकार कई स्रोतों से जानकारी लेते हैं. उन्होंने मुझसे उस व्यक्ति के बारे में पुष्टि करने को कहा. मैंने इसकी पुष्टि की.''

लेकिन डेविड मॉरिसन ने गृहमंत्री के बारे में इससे अधिक कोई बात नहीं की.

कनाडा में भारतीय उच्चायोग और भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को सामने आई इन बातों पर फ़िलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि भारत सरकार ने इस मामले में कनाडा की ओर से इसके पहले लगाए आरोपों को बेबुनियाद बता कर ख़ारिज कर चुका है.

पहले लगे आरोपों को भारत ने बताया था निराधार

जब पहली बार वॉशिंगटन पोस्ट में निज्जर के मर्डर पर ख़बर छपी थी तब भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी.

विदेश मंत्रालय ने अख़बार की रिपोर्ट पर बयान जारी कर कहा था, “रिपोर्ट एक गंभीर मामले पर अनुचित और निराधार आरोप लगा रही है.”

बयान में कहा गया, “संगठित अपराधियों, आतंकवादियों के नेटवर्क पर अमेरिकी सरकार की ओर से साझा की गई सुरक्षा चिंताओं के बाद भारत सरकार ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है जो मामले की जांच कर रही है. इसे लेकर अटकलें लगाना और ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान देना मददगार साबित नहीं होगा.”

कनाडा सरकार ने कहा था कि उनके देश में होने वाले अपराध में भारतीय एजेंटों का हाथ है.

इन अपराधों में हत्या, फिरौती और धमकी देना शामिल हैं. इन एजेंटों ने यहां कनाडाई नागरिकों को नुकसान पहुंचाने का अभियान चलाया है.

मंगलवार से पहले कनाडाई अधिकारी प्रत्यक्ष तौर पर सिर्फ ये कहते रहे थे कि इस संबंध में ज्यादा जानकारी भारत सरकार में उच्च स्तरीय लोगों के पास हो सकती है.

कमेटी में शामिल सासंद दो सप्ताह पहले कनाडाई पुलिस (आरसीएमपी) के उस चौंकाने वाले दावे के बारे में भी सवाल कर रहे थे, जिसमें उसने कहा था कि भारत सरकार के एजेंटों की कनाडा में बड़े पैमाने पर हो रहे अपराधों में मिलीभगत है.

रॉयल कनेडियन माउंटेंड पुलिस के चीफ माइक डुहेम ने मंगलवार को कमेटी के सामने गवाही दे रहे थे.

उन्होंने कहा कि पुलिस के सुबूत यही बताते हैं कि भारतीय राजनयिकों और उच्चायोग के कर्मचारियों ने भारत सरकार के लिए जानकारी जुटाई.

इनका इस्तेमाल अपराधी संगठनों को कनाडा में हिंसा की कार्रवाई के लिए निर्देश देने में किया गया. इन अपराधों में हत्या, फिरौती और धमकी देना शामिल हैं.

पिछले दिनों कनाडा के सरकारी न्यूज़ चैनल सीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में भी माइक डुहेम ने कहा था,'' हमारे पास खुफ़िया जानकारी नहीं बल्कि पुख़्ता सबूत हैं कि इस मामले में (निज्जर की हत्या) भारत की भूमिका उच्च स्तर तक है.''

डुहेम ने कहा कि पुलिस सितंबर 2023 से 13 कनाडाई नागरिकों को आगाह कर चुकी है कि उन्हें भारतीय एजेंटों से ख़तरा हो सकता है.

भारत-कनाडा संबंध और ख़राब होने की आशंका

कनाडा के मंत्री के इस बयान के बाद भारत-कनाडा संबध और और ख़राब होने की आशंका जताई जा रही है.

कनाडा में ख़ालिस्तान समर्थकों की ओर से भारत विरोधी प्रदर्शनों और खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव लगातार बढ़ा है.

कनाडा का आरोप है कि खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ है, जबकि भारत इससे इनकार करता रहा है.

पिछले दिनों इस मामले में दोनों देशों के बीच तल्ख़ी इतनी बढ़ी कि पिछले दिनों दोनों देशों ने एक दूसरे के कई राजनयिकों को निकाल दिया है.

एक-दूसरे के राजनयिकों को निकालने का फ़ैसला तब सामने आया है जब निज्जर हत्या मामले में कनाडा ने भारतीय राजनयिकों और उच्चायोग के दूसरे अधिकारियों को ‘पर्सन्स ऑफ़ इंटरेस्ट’ बताया .इसमें

कनाडा में भारत के उच्चायुक्त रहे संजय कुमार वर्मा प्रमुख रूप से शामिल थे.

कनाडा में 'पर्सन्स ऑफ़ इंटरेस्ट' उसे कहा जाता है जिसको लेकर जांचकर्ता मानते हैं कि उस शख़्स को किसी अपराध की महत्वपूर्ण जानकारी है.

सितंबर 2023 में निज्जर की हत्या के बाद प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने देश की संसद में बयान दिया था कि कनाडा के पास इस अपराध में भारतीय अधिकारियों के शामिल होने के 'ठोस सबूत' हैं. हालांकि उस समय भी कनाडा सरकार ने कोई ठोस पेश नहीं किया था.

भारत ने इस दावे को सिरे से ख़ारिज करते हुए कनाडा से सबूत की मांग की थी.

इस बार भी कनाडा के उच्चायुक्त को देश से निकालने की घोषणा के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि ट्रूडो सरकार ने भारतीय अधिकारियों के ख़िलाफ़ अपने आरोपों के समर्थन में भारत को ‘सबूत का एक टुकड़ा’ तक नहीं दिखाया था.

विदेश मंत्रालय ने कनाडा को लेकर ये भी कहा था कि वो ‘राजनीतिक लाभ के लिए भारत को बदनाम कर रहा है.’

भारत को सुबूत नहीं भेजे लेकिन कनाडा अपने रुख़ पर कायम

हालांकि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अब भी इस बात पर कायम हैं कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों का हाथ है.

लेकिन पिछले पखवाड़े राजनयिकों को निकाले जाने के मामले के तूल पकड़ने के बाद ट्रूडो ने कहा था वो अपने आरोपों पर कायम है.

लेकिन उनके पास 'साक्ष्यपूर्ण सुबूत' नहीं हैं. पहली बार जब उन्होंने इस मामले पर सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाए थे उस समय तक उनके पास सिर्फ ख़ुफिया जनाकारी थी.

विदेशी हस्तक्षेप आयोग के समक्ष गवाही देते हुए उन्होंने स्वीकार किया था कि कनाडा ने भारत के साथ कोई सबूत साझा नहीं किया है, बल्कि केवल साथ काम करना चाहता है और भारत सबूत मांगता रहा.

उन्होंने कहा था,''हमारा जवाब था, ठीक है, यह (सबूत) आपकी सुरक्षा एजेंसियों के पास है.''

बाद में उन्होंने दो कंजर्वेटिव सांसदों की निगरानी की जांच कर रहे जांच पैनल से कहा था,'' इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि भारत ने कनाडा की संप्रभुता का उल्लंघन किया है''.

भारत-कनाडा संबंधों दरार की वजह

14 अक्तूबर के बाद से कनाडा और भारत के आपसी रिश्ते अब तक के अपने सबसे मुश्किल दौर में पहुँच गए हैं.

इसी दिन भारत ने कहा कि कनाडाई सरकार की क़ानून व्यवस्था पर भरोसा न होने से वो अपने राजनयिकों को वापस बुला रहा है. वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा है कि उनके देश ने भारत के छह राजनयिकों को निष्कासित किया है.

इसके जवाब में भारत ने भी कनाडा के छह राजनयिकों को निष्कासित कर दिया.

दोनों देशों के बीच यह तनाव कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की पिछले साल हुई हत्या से शुरू हुआ था, जिसमें कनाडा ने भारत की भूमिका पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए थे.

हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को कनाडा में एक गुरुद्वारे की पार्किंग में हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. निज्जर कनाडा के वैंकूवर स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा के अध्यक्ष भी थे.

हरदीप सिंह निज्जर जालंधर के गांव भार सिंह पुरा के रहने वाले थे. भारत सरकार के अनुसार, निज्जर खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख थे और इसके सदस्यों के संचालन, नेटवर्किंग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता देने में सक्रिय रूप से शामिल थे.

18 सितंबर को कनाडा की संसद में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने बयान दिया था कि निज्जर की हत्या के पीछे "भारत सरकार की संभावित संलिप्तता के आरोपों" की जांच की जा रही है.

अक्टूबर 2023 में, भारत ने 40 कनाडाई राजनयिकों की राजनयिक छूट रद्द कर दी थी. इसके चलते कनाडाई दूतावास के क़रीब दो-तिहाई स्टाफ़ को भारत छोड़कर वापस जाना पड़ा.

भारत ने कहा था कि कनाडा सिख अलगाववादियों को जो छूट दे रहा है, वह भारत के लिए ही नहीं बल्कि कनाडा के लिए भी सही नहीं है.

मई 2024 के पहले हफ्ते में भी कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने फिर निज्जर की हत्या और भारत के साथ संबंधों का ज़िक्र किया और भारत ने इस पर आपत्ति जताई थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)