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ट्रंप कैसे पुतिन की ताक़त और भारत की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं - द लेंस
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज़ से बीते हफ़्ते ऐसे कई घटनाक्रम हुए, जिनसे कई तरह के संकेत मिलते नज़र आ रहे हैं.
भारत के पहलू से देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़्रांस होते हुए अमेरिका पहुंचे और उसके बाद जब वो भारत लौटे तो क़तर के अमीर, शेख़ तमीम बिन हमाद अल-थानी भारत आए.
भारतीय प्रधानमंत्री की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठकों की काफ़ी समीक्षा हुई और काफ़ी कुछ कहा गया.
ऐसे में कुछ सवाल भी ज़हन में आते हैं.
जैसे, क्या भारत, अमेरिका के साथ ही रूस या ईरान जैसे देशों के साथ एक संतुलन बना सकेगा? राष्ट्रपति ट्रंप के साथ रिश्ते बनाए रखने के लिए भारत का रवैया क्या होगा?
सवाल ये भी बनता है कि क़तर क्यों इस पूरे समीकरण में भारत के लिए अहम है, नेटो और यूरोप क्यों ट्रंप के रुख़ से चिंतित हैं और मध्य पूर्व में इन सभी फ़ैसलों का क्या असर होगा?
इन्हीं सवालों पर द लेंस के इस एपिसोड में चर्चा कर रहे हैं कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा.
उनके साथ इस चर्चा में शामिल हैं मिडिल ईस्ट इनसाइट्स प्लेटफॉर्म की संस्थापक डॉक्टर शुभदा चौधरी, अमेरिका की डेलावेयर यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर डॉक्टर मुक़्तदर ख़ान और जेद्दा में अरब न्यूज़ के मैनेजिंग एडिटर सिराज वहाब.
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