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अंजन श्रीवास्तव: जो वागले की दुनिया से घर घर तक पहुंचे
- Author, इरफ़ान
टेलीविजन के सुनहरे दौर में, जब दूरदर्शन हर भारतीय परिवार के मनोरंजन का केंद्र था, तब एक अभिनेता ने अपनी सादगी और भरोसेमंद अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, वो अभिनेता हैं- अंजन श्रीवास्तव.
वागले की दुनिया जैसे मशहूर और लोकप्रिय सीरियल में श्रीनिवास वागले के किरदार ने उन्हें देश के कोने-कोने में पहचान दिलाई. आरके लक्ष्मण के कार्टूनों पर आधारित इस सीरियल ने एक मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार की हल्की-फुल्की ज़िंदगी को इतनी खूबसूरती से पेश किया कि अंजन श्रीवास्तव का नाम हर घर में जाना-पहचाना नाम बन गया.
अंजन श्रीवास्तव का जन्म 2 जून 1948 को कोलकाता में हुआ था. उनका परिवार उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर ज़िले से कोलकाता जाकर बस गया था.
थिएटर के प्रति उनका जुनून तब जगा जब वो कॉलेज में थे. घर के कलात्मक और बौद्धिक माहौल ने उनके अभिनय के प्रति रुझान को और बढ़ाया. उन्होंने इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन (आईपीटीए) के साथ अपने करियर की शुरुआत की, जहां उन्होंने कई नाटकों में अभिनय किया.
एके हंगल और बलराज साहनी से मुलाक़ात
यहीं उनकी मुलाकात दिग्गज अभिनेता एके हंगल और बलराज साहनी जैसे लोगों से हुई, जिन्होंने उनके अभिनय को निखारा. वागले की दुनिया ( साल1988) ने अंजन श्रीवास्तव को रातोरात स्टार बना दिया.
इस सीरियल में वह एक साधारण, मध्यमवर्गीय क्लर्क श्रीनिवास वागले के किरदार में थे, जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चुनौतियों से जूझता है, फिर भी अपने परिवार के लिए हमेशा मुस्कुराता रहता है. यह किरदार इतना जीवंत था कि लोग अंजन को असल ज़िंदगी में 'वागले जी' कहकर बुलाने लगे. आरके लक्ष्मण के कार्टून 'कॉमन मैन' की भावना को उन्होंने अपने अभिनय से जीवंत कर दिया.
'कहानी ज़िंदगी की' के इंटरव्यू में अंजन ने बताया कि इस किरदार ने उन्हें ना केवल प्रसिद्धि दी, बल्कि ये भी सिखाया कि सादगी में कितनी ताकत होती है.
कई फ़िल्मों में भी किया काम
वागले की दुनिया के अलावा, अंजन श्रीवास्तव ने कई टीवी सीरियल और फ़िल्मों में भी काम किया. 'ये जो है ज़िंदगी', 'नुक्कड़', और 'वो हुए ना हमारे' जैसे सीरियल्स में उनके किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया.
सिनेमा में उन्होंने गोलमाल, मिस्टर इंडिया, साथिया और संजू जैसी फ़िल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती हैं. फ़िल्मों से मिली शोहरत के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए वह हमेशा थिएटर के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं.
इस इंटरव्यू में उन्होंने थिएटर के उन दिनों को भी याद किया जब वह छोटे-छोटे मंचों पर बड़े सपने देखा करते थे. जब हमने उनसे अपने किए हुए किसी नाटक का संवाद बोलकर सुनाने को कहा तो सुनाते हुए लगा कि वे मंच पर ही पहुंच गए हैं. अपना स्थान भूलकर अपनी कला में लीन.
कहानी ज़िंदगी के इस इंटरव्यू में अंजन श्रीवास्तव ने अपनी निजी ज़िंदगी के कई पहलुओं को भी साझा किया. उन्होंने अपने परिवार, संघर्षों और उस दौर की बात भी की जब टेलीविज़न एक नया माध्यम था.
उनकी विनम्रता और ज़िंदगी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण हर कहानी में झलकता है. वह कहते हैं, "अभिनय मेरे लिए सिर्फ़ पेशा नहीं, बल्कि ज़िंदगी को समझने का तरीका है."
आज, 77 वर्ष की आयु में भी अंजन श्रीवास्तव का उत्साह कम नहीं हुआ. वह नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरित करते हैं कि मेहनत और ईमानदारी से हर सपना हासिल किया जा सकता है.
ये इंटरव्यू और उनकी कहानी ना केवल उनके प्रशंसकों के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है जो ज़िंदगी में सादगी और मेहनत की ताकत पर विश्वास करता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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