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जीएन साईबाबा भारत की न्याय व्यवस्था पर क्या बोले...
साल 2017 में जीएन साईबाबा को दोषी क़रार देते हुए अदालत ने उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी लेकिन 14 अक्तूबर 2022 को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने उन्हें रिहा कर दिया.
प्रोफ़ेसर जी एन साईबाबा को साल 2014 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम क़ानून (यूएपीए) के तहत गिरफ़्तार कर लिया गया था. उन पर आरोप था कि माओवादियों के साथ उनके संबंध थे.
साल 2017 में उन्हें दोषी क़रार देते हुए अदालत ने उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई लेकिन 2022 में उन्हें हाई कोर्ट ने बरी कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने उस फ़ैसले को पलट दिया और साईबाबा फिर एक बार जेल पहुँच गए. इस साल पांच मार्च को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने उन्हें फिर एक बार बरी कर दिया है.
अपनी ज़िन्दगी के क़रीब दस साल इस मामले में उलझने का साईबाबा और उनके परिवार पर क्या असर हुआ?
क्या उनका भारत की न्याय व्यवस्था में यकीन बरक़रार है? यूएपीए जैसे सख़्त क़ानून के बारे में वो क्या सोचते हैं? इन सब विषयों पर उनसे बात की बीबीसी संवाददाता राघवेंद्र राव ने.
कैमरा और एडिटिंग: केंज़-उल-मुनीर और सिद्धार्थ केजरीवाल
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