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सीड्स खाने के फ़ायदे, जानिए कितना, कब और कैसे खाएं
- Author, दीपक मंडल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में यूट्यूब पर हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स और गुरुओं की मानो बाढ़ आ गई है.
हर दूसरा वीडियो आपको पंपकिन, सन-फ्लावर या चिया सीड्स खाने के चमत्कारी फ़ायदे गिनाता दिख जाएगा.
हमारी थाली में सिर्फ़ तड़के और चटनी तक सीमित रहने वाले बीज या सीड्स अब यूट्यूब पर 'सुपरफूड' बन गए हैं.
इन बीजों के फ़ायदे बताते वीडियो लाखों व्यूज़ बटोर रहे हैं.
लेकिन सवाल ये है कि सीड्स खाने का चलन सिर्फ़ एक नया 'फ़ूड फ़ैड' (खाने की आदतों का एक नया चलन) है या सेहत के लिए फ़ायदेमंद भी है.
चलिए, इनके फ़ायदे जानने से पहले ये समझ लेते हैं कि इन बीजों में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं, स्टडीज़ इनके बारे में क्या कहती हैं.
फ़ाइबर से भरे होते हैं सीड्स
लगभग 70 फ़ीसदी भारतीय अपने भोजन में पर्याप्त फ़ाइबर नहीं लेते हैं.
भारतीयों के भोजन में फ़ैट की मात्रा बढ़ती जा रही है और फ़ाइबर कम होता जा रहा है जबकि फ़ाइबर यानी रेशेदार खाने की चीज़ें दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, टाइप टू डायबिटीज़ और पेट के कैंसर को रोकने में मददगार मानी जाती हैं.
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि फ़ाइबर वाला भोजन आपका ब्लडप्रेशर ठीक रखने में मदद करता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम करता है.
डब्ल्यूएचओ और आईसीएमआर की स्टडीज़ कहती हैं कि एक वयस्क व्यक्ति को कम से कम 25 से 30 ग्राम फ़ाइबर लेना चाहिए लेकिन एक औसत भारतीय सिर्फ़ 15 ग्राम फ़ाइबर लेता है.
अगर आप फ़ाइबर के तौर पर बीज खाएं तो शरीर में इसकी कमी काफ़ी हद तक पूरी हो सकती है.
क्योंकि 20 ग्राम चिया सीड्स में 6.8 ग्राम फ़ाइबर होता है.
इतनी ही मात्रा के फ़्लैक्स सीड्स यानी अलसी के बीज में 5.4 ग्राम और इतने ही पंपकिन सीड्स में 1.3 ग्राम फ़ाइबर होता है.
हेल्दी फ़ैट्स के स्रोत
कई बीज हेल्दी अनसैचुरेटेड फ़ैट्स के अच्छे स्रोत होते हैं. ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विसेज़ के मुताबिक़ मक्खन, घी, चर्बी वाले मीट या चीज़ के बजाय अनसैचुरेटेड फ़ैट्स का इस्तेमाल शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल घटा सकता है और हृदय को स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकता है.
कुछ बीजों में ओमेगा-3 फ़ैट एएलए यानी अल्फ़ा लिनोलेनिक एसिड होता है. ये हार्ट हेल्थ के लिए बढ़िया माना जाता है.
हालांकि मछली के तेल में भी ये ओमेगा-3 फ़ैट होता है लेकन चर्बीदार मछली या ओमेगा-3 फ़ैट की गोलियां खाने से ज़्यादा फ़ायदा नहीं होता क्योंकि शरीर इसका काफ़ी छोटा हिस्सा ही सोख पाता है.
चिया, अलसी या भांग के बीज यानी हेम्प सीड्स ( उत्तराखंड में इसकी चटनी काफ़ी प्रचलित है. इससे नशा नहीं होता) ओमेगा-3 फ़ैट्स के अच्छे स्रोत होते हैं.
नेशनल डायबिटीज़, ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फ़ाउंडेशन में न्यूट्रीशिन रिसर्च की ग्रुप की हेड डॉ. सीमा गुलाटी कहती हैं, ''सीड्स ओमेगा-6 के भी बहुत अच्छे स्रोत होते हैं. ये भी पॉली अनसैचुरेटेड फ़ैट होता है जो बेहतर स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है. सीड्स प्लांट प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोत हैं.''
बीमारी से लड़ने में कैसे मदद करते हैं सीड्स
सीड्स सिर्फ़ फ़ाइबर और हेल्दी फ़ैट्स के ही स्रोत नहीं होते हैं.
इनमें प्रोटीन भी होता है और ये शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम को भी मज़बूत करते हैं.
शरीर को रोगों से बचाने के लिए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को कुछ ख़ास विटामिनों और मिनरल्स (खनिज) की ज़रूरत होती है. इनमें से कई इन बीजों में पाए जाते हैं.
ब्रिटिश न्यूट्रीशन फाउंडेशन की साइंस डायरेक्टर सारा स्टैनर के मुताबिक़, ''मिसाल के तौर पर सेलेनियम को लीजिए. ये नए इम्यून सेल (कोशिका) बनाता है और संक्रमण से लड़ने में मददगार हो सकता है. ये सूरजमुखी के बीज में पाया जाता है.''
वो कहती हैं कि ज़िंक भी हमारे शरीर के लिए अहम मिनरल है.
सारा कहती हैं, ''ज़िंक भी नए इम्यून सेल पैदा करता है. ये शरीर में नैचुरल किलर सेल्स बनाता है जो वायरस से लड़ने में मदद करता है और इम्यून सेल्स के बीच संवाद बढ़ाता है. इससे इम्यून सेल्स को पता चल जाता है कि शरीर को रोगों से कैसे लड़ना है.''
सारा के मुताबिक़ पुरुषों को हर दिन 9.5 मिलीग्राम और महिलाओं को 7 मिलीग्राम ज़िंक की जरूरत होती है. 20 ग्राम पंपकिन सीड्स में 1.5 मिलीग्राम ज़िंक होता है.
सारा कहती हैं कि कॉपर हमारे शरीर को इम्यून सेल की रक्षा करने और उन्हें बढ़ाने में मदद करता है. 19 से 64 वर्ष के लोगों को हर दिन 1.2 मिलीग्राम कॉपर की ज़रूरत होती है. 20 ग्राम तिल 0.5 मिलीग्राम कॉपर की पूर्ति कर देता है.
फ़ोलेट यानी विटामिन बी9 भी इम्यून सेल्स बनाने में मदद करता है. सूरजमुखी, तिल और फ्लैक्स सीड्स में ये भरपूर मात्रा में मिलता है.
सारा कहती हैं कि विटामिन बी6 एंटी बॉडीज़ बनाता है और इम्यून सेल्स को आपस में संवाद करने में मदद करता है. साबूत तिल में ये अच्छी मात्रा में पाया जाता है.
हड्डियों को मज़बूत बनाते हैं सीड्स
हड्डियों की मज़बूती के लिए कैल्शियम और मैग्नीशियम ज़रूरी हैं. भारत में वयस्क पुरुष और महिलाएं दोनों अपनी दैनिक कैल्शियम की ज़रूरत पूरी नहीं करते.
वयस्क लोगों को हर दिन 800 और 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की ज़रूरत होती है. लेकिन भारत में वयस्क औसतन 429 मिलीग्राम कैल्शियम ही लेते हैं.
चिया सीड्स, अलसी और तिल कैल्शियम की ज़रूरत को काफ़ी हद तक पूरी कर सकते हैं. इससे हड्डियां स्वस्थ रहती हैं.
हाल के दिनों में सीड्स खाने का चलन बढ़ा है. लोगों ने इसे सुपरफूड की तरह खाना शुरू किया है. क्या इसे सुपरफूड की तरह खाया जाना चाहिए?
इस सवाल के जवाब में डाइटिशियन और वेलनेस एक्सपर्ट दिब्या प्रकाश कहती हैं, ''सीड्स 'फूड फैड' नहीं है. ये हमारी जीवनशैली में पहले से रहे हैं. लेकिन आधुनिक जीवनशैली में हम इसे भूल गए थे. अब एक बार फिर लोगों को इसकी ज़रूरत महसूस हो रही है. पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ी है तो लोगों ने इसे खाना शुरू किया है.''
वो कहती हैं, ''आज की तारीख़ में सीड्स ज़रूरी हो गए हैं. हमारे चारों तरफ़ प्रदूषण का कोहराम है और हम जंक और प्रोसेस्ड फूड पर ज़्यादा निर्भर होते जा रहे हैं.''
वो कहती हैं कि इस तरह का भोजन लोगों की 'गट हेल्थ' यानी पेट, बड़ी आंत से लेकर रेक्टम तक को नुक़सान पहुंचाता है, लिहाज़ा सीड्स खाना ज़रूरी हो गया है.
हालांकि वो कहती हैं कि सीड्स को सुपर फूड की तरह खाकर हम अपनी स्वास्थ्य चिंताओं से निश्चित नहीं हो सकते. सीड्स हमारे रुटीन आहार का एक हिस्सा होना चाहिए.
अब आइए देखते हैं अलग-अलग सीड्स आपकी सेहत के लिए कितने मुफ़ीद हैं.
पंपकिन सीड्स
पंपकिन यानी कद्दू के बीज कैल्शियम, फ़ॉस्फोरस, मैग्नीशियम के स्रोत होते हैं. तीनों हड्डियों को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं.
पंपकिन के बीज ज़िंक, ओमेगा 3 फैटी एसिड, आयरन और फ़ाइबर से भी भरपूर होते हैं.
इनमें एंटी ऑक्सीडेंट तत्व होते हैं. एंटी ऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेंट्स को मार देते हैं. ऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर की कोशिकाओं को नुक़सान पहुंचाते हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक़ पंपकिन के बीज कैंसर के जोख़िम को भी कम कर सकते हैं.
इनमें मैग्नीशियम ज़्यादा होने से ये हृदय को भी स्वस्थ रखते हैं. ब्लड प्रेशर कम करने, शुगर कंट्रोल करने और मोटापे से लड़ने में भी काफ़ी हद तक मददगार हैं.
ज़िंक से भरपूर होने की वजह से पंपकिन सीड्स रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं.
महिलाओं के लिए ये ख़ासा फ़ायदेमंद हैं. ये महिलाओं में मीनोपॉज के बाद आने वाली दिक्कतों को दूर करने में काफ़ी मददगार हैं.
पंपकिन के बीज को रोस्ट करके, पाउडर बनाकर या सलाद पर ऊपर से डालकर खाया जा सकता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक़, इन्हें ज़्यादा खाने से बचना चाहिए. ज़्यादा खाने से गैस, डायरिया, पेट दर्द या ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है.
अगर आपको इनसे एलर्जी है तो इसकी जांच ज़रूर कर लें.
फ्लैक्स सीड्स
भूरे रंग के इन बीजों को स्वास्थ्य के लिए काफ़ी अच्छा माना जाता है. ये सबसे ज़्यादा पोषक बीजों में से एक है.
फ्लैक्स सीड्स या अलसी का बीज फ़ाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, मैग्नीशियम और प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है.
डायबिटीज़ के मरीजों के लिए ये बहुत अच्छा माना जाता है. ये ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में भी मदद करता है. कैंसर के जोख़िम को भी कम करने में ये मददगार साबित हुआ है.
ये सुपरफूड बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल को कम करता है और अच्छा एंटी ऑक्सीडेंट है. ये लोगों को वज़न कम करने में भी मदद करता है.
महिलाओं की पीरियड्स की परेशानियों को ये दूर करता है.
दिब्या प्रकाश कहती हैं, ''आप छोटा चम्मच अलसी के बीज को चबाकर खा सकते हैं. इसके अलावा आप इसकी चटनी पीसकर भी खा सकते हैं.''
बिहार और यूपी में अलसी की चटनी ख़ूब पंसद की जाती है. योगर्ट, सलाद और सूप में भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.
अलसी के बीज को खूब चबा कर खाना चाहिए और साथ ही पानी भी पीना चाहिए. वरना आपको अपच या गैस की समस्या हो सकती है.
अगर आपको अलसी से एलर्जी है तो इसकी जांच कर लें.
चिया सीड्स
चिया सीड्स काले और सफेद रंग के अंडाकार बीज होते हैं. ये सलिवा हिस्पैनिका प्लांट से निकलते हैं जो मध्य अमेरिका में पाए जाने वाले मिंट परिवार का पौधा माना जाता है.
चिया सीड्स खाने का प्रचलन भले ही अभी काफ़ी बढ़ा हो लेकिन अच्छी सेहत और पोषण के लिए ये हज़ारों साल से इस्तेमाल होते रहे हैं. माया और एज़्टेक सभ्यताओं में इसका ज़िक्र मिलता है.
प्रोटीन हमारे शरीर की मांसपेशियों के विकास और उनके बेहतर रख-रखाव के लिए बहुत ज़रूरी है.
चिया सीड्स ऐसे बीज हैं जिनमें प्रोटीन बनाने वाले सभी नौ ज़रूरी अमीनो एसिड होते हैं.
चिया सीड्स वज़न कंट्रोल करने और टाइप टू डायबिटीज़ मैनेजमेंट में बेहद कारगर साबित होते हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक़ ये पोटाशियम, मैग्नीशियम, ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड, आयरन और प्रोटीन का स्रोत होते हैं. इनमें काफ़ी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं.
हृदय को स्वस्थ रखने के साथ ब्लड प्रेशर कंंट्रोल करने में ये मददगार है.
ये कैल्शियम और फॉस्फोरस से भरपूर होता है जो हड्डियों को मज़बूत बनाते हैं.
ये गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ाता है और बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल घटाता है.
जिन लोगों को चिया सीड्स से एलर्जी है उन्हें उल्टी, डायरिया, होठों या जीभ में खुजली हो सकती है.
तिल
तिल यानी सेसमी सीड्स भारतीय खान-पान परंपरा से सदियों से जुड़ा रहा है.
काले और सफेद तिल भारत में सिर्फ़ खान-पान में ही शामिल नहीं है बल्कि पूजा और धार्मिक आयोजनों का भी अभिन्न हिस्सा है.
सीमा गुलाटी कहती हैं, ''तिल और दूसरे बीज में काफी पोषण होता है. हमारे खान-पान में काफी समय पहले से इस्तेमाल हो रहा है. ये पोषण और ऊर्जा से भरपूर होते हैं. इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में खाना चाहिए.''
तिल विटामिन बी, ज़िंक, कैल्शियम, प्रोटीन और ओमेगा फैट्स का अच्छा स्रोत है.
ये डायबिटीज़ मैनेजमेंट में काफ़ी अच्छी भूमिका निभाता है.
तिल हड्डियों को मज़बूत बनाता है और एनीमिया (ख़ून की कमी) का इलाज करने में सफल है.
महिलाओं के लिए तिल क़ाफी फ़ायदेमंद है क्योंकि वो जल्द एनीमिया की शिकार हो जाती हैं.
ये गुड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) का लेवल बढ़ाता है और बैड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) का लेवल घटाता है,
तिल स्वस्थ बालों और आंखों के लिए अच्छा माना जाता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक़ तिल चिंता और अवसाद दूर करने में भी कारगर साबित हुआ है.
सनफ्लावर सीड्स
सूरजमुखी का तेल भारत में वर्षों से इस्तेमाल किया जाता रहा है. लेकिन सूरजमुखी के बीज इस तेल से ज़्यादा पोषक हो सकता है.
इनमें विटामिन ई होता है और बिल्कुल कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है.
हड्डी को स्वस्थ रखने और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में ये काफ़ी मददगार साबित हो सकते हैं.
सूरजमुखी के बीजों में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड भी भरपूर मात्रा में होता है.
कुछ स्टडीज के मुताबिक़ इनमें लिनोलिक एसिड (सीएलए) होता है. ये एक कैंसर रोधी फैटी एसिड है. आपको लिनोलिक एसिड कई चीज़ों में मिल सकता है लेकिन सूरजमुखी के बीजों में तिल, अलसी और मूंगफली की तुलना में ये ज़्यादा होता है.
स्टडीज़ के मुताबिक़ विटामिन ई लेने से कैंसर से बचाव होता है और सूरजमुखी के बीज विटामिन ई के बेहतरीन स्रोत हैं.
सूरजमुखी के बीज शरीर के अंदर इन्फ्लेमेशन यानी सूजन को दूर करते हैं और हार्ट हेल्थ के लिए अच्छे होते हैं. क्योंकि यह एलडीएल यानी ख़राब कोलेस्ट्रॉल को घटाता है.
सूरजमुखी थायरॉइड की समस्याओं में भी मददगार है.
महिलाओं के लिए बेहद फ़ायदेमंद हैं सीड्स
दिब्या प्रकाश कहती हैं कि सीड्स खाने से युवा महिलाओं में पीसीओएस पॉलिसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम या डिज़ीज़ से बचा जा सकता है.
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) प्रजनन आयु की महिलाओं में सामान्य हार्मोनल की समस्याओं को कहते हैं. इसमें अनियमित या लंबे समय तक पीरियड्स, एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) के उच्च स्तर और अंडाशय की दिक्कतों की वजह से शरीर पर मुंहासे आने लगते हैं. शरीर में बहुत ज़्यादा बाल उगने शुरू हो जाते हैं. वज़न बढ़ता है और बांझपन आ सकता है. टाइप टू डायबिटीज़ और हृदय रोग भी हो सकता है.
लेकिन सीड्स खाने से इनफर्टिलिटी या बांझपन का जोखिम कम हो जाता है.
महिलाओं में मूड स्विंग, अनियमित पीरियड्स की समस्या कम करने के लिए सीड्स खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है.
महिलाओं में बोन डेन्सिटी घटने को भी सीड्स नियंत्रित कर सकते हैं.
इससे इनफ़र्टिलिटी के चासेंस बहुत कम होते हैं. वेट गेन, मूड स्विंग, गैर नियमित माहवारी और बोन डेंसिटी कम होने लगती है.
दिब्या प्रकाश कहती हैं, ''आजकल किशोरियों और युवा महिलाओं में भी ये दिक्कतें आ रही हैं. इसलिए अगर वे शुरू से सीड्स खाएं तो उन्हें फ़ायदा होगा. ज़्यादा उम्र की महिलाओं में मीनोपॉज़ से पैदा समस्याओं में सीड्स खाने से राहत मिलती है.''
वो कहती हैं कि महिलाओं को पीरियड्स से पहले के 15 दिनों में फ्लैक्स सीड्स या पंपकिन सीड्स खाना चाहिए और बाद के 15 दिनों में तिल. तिल महिलाओं में प्रोजेस्ट्रॉन बढ़ाता है जो महिलाओं की प्रजनन प्रणाली के लिए अच्छा होता है.
कितना और कैसे खाएं?
दिब्या प्रकाश कहती हैं कि सीड्स बहुत ज़्यादा मात्रा में नहीं खाया जाना चाहिए. इसकी छोटी मात्रा ही प्रभावी होती है.
वो कहती हैं, ''तिल को ले लीजिए. ज़्यादा तिल नहीं खाना चाहिए. तिल की ज़्यादा मात्रा वज़न बढ़ा सकती है. ज़्यादा तिल खाने से दस्त, पेट दर्द और कुछ मामलों में कब्ज़ भी हो सकता है.''
सबसे अच्छा तरीका ये होता है कि चार-पांच तरह के सीड्स को हल्का रोस्ट कर उसका मिक्स बना लें और दो चम्मच यानी 20 से 30 ग्राम तक खाएं तो उसका ज़्यादा असर होता है.
वो कहती हैं कि फ्लैक्स सीड्स दो तरह से खाया जा सकता है. कच्चे फ्लैक्स सीड्स को हल्का रोस्ट करके साबुत खा सकते हैं. या फिर इसका पाउडर बना कर खा सकते हैं. इसमें फाइटो एस्ट्रोजन होता है जो महिलाओं के हार्मोन हेल्थ के लिए अच्छा होता है.
महिलाओं को पाउडर और पुरुषों को रोस्टेड फ्लैक्स सीड्स खाना चाहिए.
दिब्या प्रकाश कहती हैं, ''जिन पुरुषों के शरीर में थोड़ा-बहुत एस्ट्रोजन हार्मोन पैदा होने की प्रवृत्ति होती है उनमें पाउडर फ्लैक्स सीड्स से वक्ष भारी होने की समस्या पैदा हो सकती है. पुरुष अगर रोस्टेड फ्लैक्स सीड्स खाएंगे तो उनके शरीर में ओमेगा 3 फैटी एसिड और फाइबर जाएगा.''
महिलाएं अगर पाउडर खाएंगीं तो उन्हें एस्ट्रोजन बढ़ाने में मदद करेगा. ये फर्टिलिटी से जुड़ा हार्मोन होता है.
दिब्या प्रकाश कहती हैं कि ज़्यादातर लोगों को चिया सीड्स खाने का सही तरीका पता नहीं होता. इसे रात में भिगोकर खाना चाहिए. आप इसे दही, लस्सी या स्मूदी में मिलाकर खा सकते हैं.
एक दिन में 30 ग्राम से ज़्यादा चिया सीड्स नहीं खाना चाहिए. चिया सीड्स खा रहे हैं तो ढाई से तीन लीटर पानी पीना चाहिए नहीं तो ब्लोटिंग (पेट फूलने) और गैस की समस्या हो सकती है क्योंकि चिया सीड्स में काफ़ी फ़ाइबर होता है और इससे गैस बन सकती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.