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पाकिस्तानः हिंदू शादी को मंज़ूरी देने वाला बिल पास
पाकिस्तान की संसद ने हिंदुओं की शादी को क़ानूनी मान्यता देने वाले विधेयक को पारित कर दिया है.
इस विधेयक को अब राष्ट्रपति के दस्तख़त के लिए भेजा गया है जिसके बाद इसके एक सप्ताह के भीतर औपचारिक तौर पर क़ानून बन जाने की उम्मीद है.
विधेयक को निचले सदन नेशनल एसेंबली ने पिछले साल ही पास कर दिया था मगर बाद में ऊपरी सदन सेनेट ने इसमें कुछ बदलाव किए जिसके बाद इसे फिर से नेशनल एसेंबली में भेजा गया था.
निचले सदन में इस विधेयक को लंबी बहस के बाद पारित किया गया.
पाकिस्तान में 38 लाख हिन्दू रहते हैं जो देश की आबादी का 2% हिस्सा हैं.
सिंध में अलग क़ानून
ये क़ानून अभी राजधानी इस्लामाबाद और आस-पास के इलाक़ों तथा तीन प्रांतों - पंजाब, बलूचिस्तान और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में ही लागू होगा.
सिंध प्रांत की सरकार ने हिंदुओं की शादी के लिए अलग क़ानून लागू किए हैं. पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा हिंदू सिंध में रहते हैं.
नए राष्ट्रीय विधेयक में सिंध सरकार के क़ानून के एक प्रावधान को शामिल किया गया है जो कहता है कि पति-पत्नी में से किसी भी एक व्यक्ति के धर्म परिवर्तन करने पर शादी ख़त्म की जा सकती है.
हिंदुओं का पलायन
पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक अपने साथ भेदभाव और धार्मिक दमन किए जाने की शिकायत करते रहे हैं.
वहाँ से बड़ी संख्या में हिंदुओं ने भारत में पलायन किया है.
2011 से लेकर अब तक पाकिस्तान के एक हज़ार से ज़्यादा नागरिकों को भारत ने नागरिकता दी है जिनमें ज़्यादातर हिंदू हैं.