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रोटी तोड़ने का अंदाज़

Neil CurryNeil Curry|गुरुवार, 29 नवम्बर 2012, 13:46 IST

ऐसी बहुत सारी चीज़ें है जो विदेशियों को स्थानीय लोगों से अलग करती हैं. ये बात मुझे हमेशा कौतूहल में डालती है कि किसी स्थिति में खुद को ढालने या उससे बचे रहने का फ़ैसला लोग कैसे करते हैं. और शायद दुनिया इसी प्रश्न पर विभाजित भी है.

ये सही है कि कुछ विदेशी स्थानीय संस्कृति में ढलने से बचते हैं. मैंने अपनी यात्राओं के दौरान देखा है कि ब्रितानी और अमरीकी लोग तो स्थानीय संस्कृति में समा जाने के उद्देश्य से पहला क़दम तक नहीं उठाते.

और इस बात का सबसे बड़ा संकेत ये है कि ये लोग अंग्रेज़ी बोलने वाले हिस्से में भी ज़ोर-ज़ोर से बोलते हैं. शायद सिंद्धात ये है कि इससे लोग उन्हें बेहतर ढंग से समझ लेंगे.

और हां एक अन्य ब्रितानी बोझ जो इस ग्रह की बाक़ी प्राणियों पर लादा गया है वो है -अधेड़ मर्दों का दूसरों को सैंडल के साथ लंबे मौज़े पहनने पर मजबूर करना.

आह! और फिर वो खान-पान की आदतें.

मेरा मतलब आपने दिल्ली, रोम, मैक्सिको सिटी या सिडनी में कितने अमरीकियों को मैक्डोनाल्ड या केएफ़सी में देखा है? बहुतों को ना?

लेकिन मुझे ये कहना पड़ेगा कि ब्रिटेन आने वाला एक औसत भारतीय पर्यटक भारतीय रेस्तरां ही खोजता है और पब में भी उसे भारतीय व्यंजन ही चाहिए होते हैं.

व्यक्तिगत तौर में जिस जगह जाता हूं वहीं के खाने को अपना लेता हूं. और मुझे ये यात्रा का सबसे अच्छा पहलू लगता है. हां, इस आदत की वजह से आपकी प्लेट में नाइजीरिया में बैल के पैरों का शोरबा हो सकता है!

खुद को दूसरी जगहों के खान-पान में ढालने में सबसे बड़ा सहायक होता है खाना मूंह तक पहुंचाने के स्थानीय तरीके के इस्तेमाल से.

तो जनाब हाल के दिनों में मेरे सर पर रोटी तोड़ने की तकनीक में दक्ष होने का जुनून छाया है. क्योंकि भारत में लगभग हर विदेशी रोटी को दो हाथों से तोड़ता है, जैसे वो किसी कागज़ को फाड़ रहा हो.

मैं तो यही कहूंगा कि मुझे ये तरीका काफी भद्दा लगता है लेकिन हो सकता है कि मैं ग़लत होऊं.

बहरहाल मैं दिल्ली में अपने दफ़्तर के साथियों के खान-पान को देखता रहा हूं. और अब हम इस बारे में सार्वजनिक रूप से बात करते हैं. इसी के आधार पर मुझे लगता है कि रोटी एक हाथ से तोड़ने के कई तरीके हो सकते हैं.


तो बीते शुक्रवार मेरा सामना एक, दो और तीन उंगलियों से रोटी तोड़ने के तरीके से हुआ. और हां एक आधुनिक तरीके से भी जिसमें छोटी उंगली के रोटी में धंसा दिया जाता है.

अब बड़े ही सलीके से रोटी तोड़ने वाले एक सहयोगी का क़िस्सा. इनके बचपन की सबसे बड़ी टेंशन दरअसल रोटी तोड़ने का तरीका ही थी.

इन जनाब को रोटी तोड़ने के लिए दोनों हाथों का इस्तेमाल करना भाता था लेकिन इनके पिताश्री उन्हें एक हाथ से रोटी तोड़ने वाला बनाने के प्रति दृढ़संकल्प थे.

अब मैं कुछ ज्यादा ही जुनूनी दिख रहा होउंग लेकिन मुझे सलीके से, एक दुरुस्त आकार में तोड़ी गई रोटी देखना बहुत अच्छा लगता है.

और मैं अब इसी की खोज में हूं - मैं रोटी को बेहतरीन ढंग से तोड़ने की किसी भी तकनीक या टिप का स्वीकार करने के लिए तैयार बैठा हूं.

तो क्या है आपकी रोटी तोड़ने की बेहतरीन तकनीक?

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 15:17 IST, 29 नवम्बर 2012 Saptarshi:

    आपके लिखने का तरीका बिल्कुल अजीब है, लेकिन ये मजेदार है.

  • 2. 20:09 IST, 29 नवम्बर 2012 Rajan:

    असली भारतीय तरीका ही यही है कि आप छुरी या काँटे की परवाह किए बिना अच्छे भोजन का आनंद लें और कैसे रोटी तोड़ें.

  • 3. 10:58 IST, 04 दिसम्बर 2012 Anuj:

    आप बहुत अच्छा लिखते हैं.

  • 4. 17:18 IST, 04 दिसम्बर 2012 Arpita:

    मुझे आपका लेखन दिलचस्प लगता है। बतौर ट्रेवल कर्मी, अक्सर माराकेश, जुरिख, बार्सिलोना, लन्दन, केनकून और यहाँ तक कि क्रूगर पार्क में अपने भारतीय पर्यटकों के लिए भारतीय रेस्तराँ ढूंढते खीज होती है। स्थानीय भोजन कोई चखना ही नहीं चाहता। तरस आता है इस मानसिकता पर।

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