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मेरी अंजुला मिस...

सुशील झासुशील झा|बुधवार, 05 सितम्बर 2012, 09:51 IST

टीचर्स डे याद आते ही मन में गुदगुदी सी होती है. मुझे ये याद नहीं आता कि उस दिन टीचर पढ़ाने नहीं आते. मुझे ये भी याद नहीं आता कि उस दिन दसवीं-बारहवीं के कौन से सीनियर पढ़ाने आते थे. याद आती है तो बस अंजुला मिस. (नाम बदला हुआ)
अंजुला मिस बस दो साल ही स्कूल में रहीं लेकिन सबकी फेवरिट. गजब सुंदर. हमको अंजुला मिस से सुंदर दुनिया में कोई नहीं लगती थी. सातवीं आठवीं में होंगे हम. छोटे से. अंजुला मैम की शादी हुई नहीं थी. लंबी चोटी, बाल एकदम नए स्टाइल में. बाल लहरा कर चेहरे पर आते तो वो बाल झटक देती थीं और क्लास के बच्चे मैम को देखते और बस देखते ही रह जाते.

मैम साइंस पढ़ाती थीं और उनकी क्लास में कोई बच्चा अनुपस्थित नहीं होता था. हम तो मैम को देखते ही रहते. उनकी क्लास में कोई केमिस्ट्री-फिजिक्स समझ में नहीं आता था. मैम की क्लास खत्म होती तो मन करता मैम के पीछे पीछे दूसरी क्लास में चले जाएं.

मैम की स्कूटी के पीछे पीछे तेज़ तेज़ साइकिल चलाना अभी भी नहीं भूले हैं. तब समझ में नहीं आता था कि ये क्या हो रहा है. कुछ दिनों बाद पता चला कि मैम की शादी हो रही है तो उस दिन सीने में दर्द भी हुआ था. लेकिन मैम फिर भी अच्छी ही लगी थी. अंजुला मैम ने जिस दिन स्कूल छोड़ा तो मैंने कहा भी था-मैम आप हमको बहुत अच्छी लगती हैं.

मैम बोलीं- मैं समझ सकती हूं. बड़े हो जाओगे तब मैं नहीं कोई और अच्छी लगेगी. अंजुला मैम की ये बात जब भी याद आती है तो बस मुस्कुरा उठता हूं.

इस बात को पता नहीं कितने साल हो गए. शिक्षक दिवस पर कई और शिक्षकों की याद आती है. किसी ने पढ़ाया. किसी ने समझाया. किसी ने डांटा. किसी ने पीटा. सबकी याद दिमाग के एक एक कोने में है लेकिन अंजुला मिस दिल के किसी कोने में कहीं छुप बैठी हैं.

मुझे पहले लगता था कि ऐसा मेरे साथ ही हुआ है. कल दफ्तर में दोस्तों से ऐसे ही ज़िक्र किया तो पता चला मैं अकेला नहीं हूं. लगभग सभी के मन में किसी न किसी टीचर के प्रति ऐसा लगाव होता ही है. अब आप उसे क्रश कह लीजिए.....लड़कपन कह लीजिए या जो मन है वो कह लीजिए...मेरे लिए तो एक कसक है जो मुझे अच्छी लगती है.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 11:27 IST, 05 सितम्बर 2012 s:

    जो आत्मा को जगाये वही सच्चा गुरु है

  • 2. 14:25 IST, 05 सितम्बर 2012 BHEEMAL Dildarnagar:

    आपने नियमित लेखन से कुछ रास्ता बदल के लिखा, उसके लिए धन्यवाद.

  • 3. 15:30 IST, 05 सितम्बर 2012 saurabh yadav:

    आपने बिलकुल सही लिखा है.

  • 4. 23:12 IST, 05 सितम्बर 2012 Devjeet:

    आपका ये लेख पढ़कर मुझे अरुणा मेम की याद आ गयी | हालाँकि अब उनकी शादी हो गयी लेकिन आज तक मैंने उन्हें अपने फसबूक में जोड़ रखा है | हैप्पी टीचर्स डे !!

  • 5. 03:44 IST, 06 सितम्बर 2012 Murari:

    आपका ये लेख पढ़कर मुझे मैं हूँ न फिल्म के चांदनी मेम की याद आ गयी | बहुत अच्छा लेख सुशील जी !

  • 6. 12:05 IST, 06 सितम्बर 2012 vimal kishor singh.:

    आपकी कल्पना तो कमाल की है. सभी स्कूलों में महिला टीचर ही होनी चाहिए. छात्र अनुपस्थित नही रहेंगे.

  • 7. 17:24 IST, 06 सितम्बर 2012 E A Khan, Jamshedpur (Jharkhand):

    जिस उम्र में यह सब आप के साथ हुआ कोई अनहोनी बात नहीं है अनहोनी तो यह बात है की अभी तक आप इस दर्द को संजोये हुए है. आखिर जीने के लिए कुछ तो होना चाहिए. एक शेर का मिसरा है "मेरी उम्र तो कटी है तेरे इश्क के सहारे" अब बीच में अपनी टीचर जी के बारे में श्रिधा वगैरह की बात मत कहियेगा. आप के दिल की इस टीस पर टीचर्स डे के पुनीत अवसर पर हम पाठक आप के साथ हैं. इस मतलबी दुनिया में कौन किसको इस तरह याद रखता है.

  • 8. 00:42 IST, 07 सितम्बर 2012 Dr.Ranjan:

    धन्यवाद सुशील जी. हैप्पी टीचर्स डे

  • 9. 09:58 IST, 07 सितम्बर 2012 Mohd Anis:

    सुशील जी आपने तो हमें बहुत पुरानी बातें याद दिला दीं. बहुत रोमांचकारी लेख है.

  • 10. 14:02 IST, 07 सितम्बर 2012 Navin Kumar:

    भावनाये सही है लेकिन वर्णन गलत.

    लम्बी चोटी और खुले बाल ? विरोधाभास है सुशील जी

  • 11. 05:52 IST, 08 सितम्बर 2012 raj kumar verma:

    बहुत सुंदर.

  • 12. 08:25 IST, 08 सितम्बर 2012 Anup Adhyaksha:

    आपकी कहानी में कुछ कुछ मेरा नाम जोकर फिल्म के राजू किरदार का अपनी शिक्षिका के प्रति आकर्षण वाली गुदगुदी है.

  • 13. 10:11 IST, 08 सितम्बर 2012 yougal pandey:

    मुझे 3 -4 टीचर याद आ गये.अच्छा लेख

  • 14. 13:34 IST, 08 सितम्बर 2012 himmat singh bhati:

    अपने बहुत ही सुंदर मन में गुदगुदी पैदा करने वाली मार्मिक बातें की हैं, पर सुशील जी आज के परिपेक्ष्य में जो देश कि राजनीति चल रही है, उसे देखते हुए, सभी माताओं पिताओं ने अपने बच्चे के भविष्य के लिए जो सपने संजोये हुए है, क्या वह सपने पूरे होंगे.

  • 15. 14:20 IST, 08 सितम्बर 2012 dkmahto ranchi:

    यह है पत्रकारिता करने के बाद बीबीसी जैसे संस्था से जुड़े पत्रकारों द्वारा, विवेचना करने का सबसे अच्छा विषय.
    कीप इट अप.

  • 16. 19:10 IST, 08 सितम्बर 2012 BHARAT GURJAR:

    सुशील जी बहुत रोमांचकारी लेख है

  • 17. 23:37 IST, 08 सितम्बर 2012 SYED WASEEM ZAIDI:

    इस तरह का अर्टिकल अगर कोई छठवीं या सातवीं क्लास का छात्र पढ़ेगा तो क्या उसके मन में अपने टीचर के लिए बुरा विचार नहीं पैदा नहीं होगा. क्या समाज करप्ट नहीं होगा ?

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