चीन की वो दीवार जिसके बारे में दुनिया कम ही जानती है

- Author, क्रिस्टोफ़र चैरी
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल के लिए
चीन की दीवार पूरी दुनिया में मशहूर है. उसे दुनिया के अजूबों में गिना जाता है. मगर, चीन में एक और महान दीवार है, जिसके बारे में शायद आप ने सुना ही न हो.
तो, चलिए सैर कराते हैं चीन की एक और मशहूर ऐतिहासिक दीवार की. ये दीवार, चीन के नानजिंग शहर में है. क़रीब 600 साल पुरानी ये दीवार शहर को अपने आगोश में समेटे हुए है. ये दीवार 35 किलोमीटर से भी ज़्यादा लंबी है.
नानजिंग की इस दीवार को बनाने में 35 करोड़ से भी ज़्यादा ईंटों का इस्तेमाल हुआ है. मज़े की बात ये है कि बहुत सी ईंटों में उन्हें बनाने वाले का नाम लिखा है.
90 साल की ची झिरू नानजिंग की रहने वाली हैं. उन्होंने इस दीवार को बचाने की कोशिश में बहुत योगदान दिया है.
नानजिंग, बाक़ी चीन की तरह तेज़ी से तरक़्क़ी कर रहा है. इसलिए इस दीवार के इर्द-गिर्द बहुत काम हो रहा है.
ऐसे में ची झिरू का कहना है कि हमें इस दीवार को ही नहीं, अपनी पूरी विरासत को बचाना है.
जब दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान ने चीन पर हमला किया था, तो जापानी इस दीवार को तबाह नहीं कर सके थे. लेकिन, ची झिरू कहती हैं कि हम ने ही इस दीवार को तबाह कर दिया.

इतिहास का अहम हिस्सा ये दीवार
1950 और 60 के दशक में दीवार की पूरी तरह से अनदेखी कर दी गई. इसके कई हिस्से ढह गए. दीवार की ईंटों को निकालकर दूसरी इमारतें बनाने में इस्तेमाल करने दिया गया.
नानजिंग की इस ऐतिहासिक दीवार के कुछ हिस्सों को सड़कें बनाने के लिए तोड़ा गया. कुल मिलाकर, शहर की आर्थिक तरक़्क़ी के लिए दीवार को कई जगह ढहा दिया गया.

ची झिरू बताती हैं कि उन्होंने भी इस दीवार से दो ईंटें चुराई थीं.
वो बताती हैं कि, "एक बार मैंने दीवार में एक छेद देखा. आस-पास बहुत मलबा फैला हुआ था. किसान अपनी सब्ज़ियां वहां बेचने आते थे. वो इस दीवार की ईटों पर अपने सामान को सजा कर रखते थे. कुछ लोग ईंटों को बैठने के लिए इस्तेमाल करते थे."
"मुझे यक़ीन नहीं हुआ कि लोग इन ऐतिहासिक ईंटों को टेबल बना रहे हैं. तो मैंने दो ईंटें चुरा ली और झोले में डाल कर उन्हें ले आई."
"लेकिन मुझे अपनी इस चोरी पर इतनी शर्म आई कि मैं बस में बैठने के बजाय साइकिल से दस किलोमीटर का सफ़र तय कर के घर आई."


लोगों ने लौटाईं दीवार की ईंटें
2016 में नानजिंग की स्थानीय सरकार ने एक अभियान शुरू किया. लोगों से अपील की गई कि वो इस ऐतिहासिक दीवार की ईंटें वापस कर दें, तो उन पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा.
लोगों ने 80 हज़ार ईंटें स्थानीय प्रशासन को लौटा दीं. ची झिरू ने भी चुराई हुई दो ईंटें सरकार को वापस कर दीं. इन सब को दीवार के नीचे ही बने गोदाम में रखा गया है.

अब इन ईंटों की मदद से दीवार की मरम्मत की जा रही है. दीवार के कई हिस्सों को स्थानीय लोगों के घूमने-फिरने के ठिकानों के तौर पर भी विकसित किया गया है.
ची झिरू कहती हैं कि उन्हें ये जान कर बहुत ख़ुशी हुई कि उनकी चुराई हुई ईंटों को सही ठिकाना मिल गया.
वो कहती हैं कि उन्हें ऐसा लगा कि उनका मिशन पूरा हो गया. इससे उनकी उम्र लंबी हो गई.

ची झिरू कहती हैं, "मकान नए बनाए जा सकते हैं. मगर ये ऐतिहासिक दीवार फिर से नहीं खड़ी की जा सकती."
"ये चीन की शानदार ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है. इसलिए इसे इसके गौरव के साथ बचाए रखना ज़रूरी है."
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